परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव के लिए बहुत से कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें पढऩे का कौशल सुधार, परीक्षा के समय से जुड़े बाहरी कारण शामिल हैं। ऐसा न सिर्फ स्कूलों या कॉलेजों की परीक्षाओं के दौरान, बल्कि विभिन्न प्रतिस्पर्धी एवं प्रवेश परीक्षाओं के दौरान भी दिखता है और आजकल ऐसी परीक्षाओं की लोकप्रियता काफी बढ़ रही है। परीक्षाएं प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का अभिन्न हिस्सा होती हैं और वे इनसे बचने की चाहे जितनी कोशिश करें लेकिन ये ऐसी चुनौती होती हैं, जिनसे बचा नहीं जा सकता है। हालांकि छात्र इस चुनौती को कैसे लेते हैं और उससे कैसे निपटते हैं, इसी बात पर जीवन में ऐसी चुनौतियों के प्रति उनका रवैया निर्धारित होता है।
 
प्रभावी अध्ययन रणनीति अपनाएं :- यह जरूरी नहीं है कि परीक्षाओं को हमेशा तनाव और दबाव से जोडक़र देखा जाए! आज की परीक्षा व्यवस्था में प्रत्येक परीक्षा में सफल होने के लिए सभी छात्रों को बुनियादी तौर पर पढऩे के कुछ तरीके आना आवश्यक है और वह भी अधिक पसीना बहाए बिना। परीक्षा में जरूरी नहीं है कि आप आखिरी समय में घबराएं! प्रभावी अध्ययन रणनीति अपनाने की खातिर छात्रों के लिए कौशल और रणनीति से लैस होना बेहद आवश्यक है लेकिन इसके साथ ही जरूरी है कि वे न सिर्फ शैक्षिक मांग से निपटने में सक्षम हों बल्कि सामाजिक, संस्थागत के साथ ही उनकी पढ़ाई संबंधित अपनी अपेक्षाओं को भी पूरी करें।
 
अच्छी नींद लें :- आपको परीक्षा से पहले आधी रात तक जागकर पढऩे की जरूरत नहीं है। इसके बदले पढऩे की योजना कुछ इस तरह बनाएं, और उसे दृढ़ता से पूरी भी करें, जिससे आपकी पर्याप्त नींद सुनिश्चित हो सके।
 
स्वस्थ रहें :- परीक्षा के समय में बीमार पडऩे से खराब कुछ नहीं हो सकता। इसलिए जरूरी है कि आप जंक फूड से परहेज करें, स्वस्थ आहार लें और खुद को स्टडी रूम तक सीमित करने के बजाय अधिक से अधिक शारीरिक गतिविधियां करें।
 
स्टीमुलेंट्स से परहेज करें :- यह भ्रम है कि कैफीन, निकोटिन या कोई अन्य पदार्थ परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकते हैं। इसके उलट इनसे आपकी बेचैनी बढ़ सकती है, तनाव बढ़ सकता है!
 
स्वयं पर ध्यान दें :-  दोस्तों से प्रतिस्पर्धा करने से आपको प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि अपने और अन्य किसी के काम की तुलना नहीं करनी चाहिए। इसके बदले आपको खुद की अपेक्षाओं को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए।
 
परीक्षा से पहले और बाद में :- परीक्षा की सुबह विषय दोहराने का सही समय नहीं होता, क्योंकि इससे आपको सिर्फ भ्रम होगा। दोस्तों से अन्य बात करें! परीक्षा के बाद सवालों पर चर्चा नहीं करें, नोट्स की अदला बदली न करें या नंबर की गणना न करें। अगर आपको लगता है कि आपने परीक्षा में अच्छा नहीं किया है, तो खुद को थोड़ा समय दें। खुद को कोसने के बजाय अगली परीक्षा पर ध्यान दें।
 
अंकों का नहीं, कोशिशों का आकलन :- ध्यान रखें कि परीक्षा में मिले अंकों पर ध्यान देने के बजाय अपनी मेहनत पर ध्यान दें। अगर नतीजे आपकी मेहनत के अनुरूप नहीं है तो विभिन्न बाहरी कारकों को भी ध्यान में रखें और अपनी कोशिशों का व्यावहारिक आकलन करें।
 
परीक्षा जीवन का अंत नहीं :- परीक्षाएं आपके जीवन का एक छोटा सा हिस्सा है और आप जीवन में आगे क्या करेंगे यह सिर्फ इन पर निर्भर नहीं है। ये सिर्फ राह में एक कदम है और आपके जीवन की सफलता सिर्फ एक परीक्षा में आपके प्रदर्शन पर निर्भर नहीं है बल्कि इस पर निर्भर है कि आप अपने जीवन में विभिन्न चुनौतियों से किस तरह निपटते हैं।
 
हमेशा बात करें :- ध्यान रखें कि परीक्षा के दौरान बेचैनी महसूस करना सामान्य है, लेकिन इस बारे में बात करें। अपनी भावनाएं दोस्तों, अभिभावकों, शिक्षकों के साथ साझा कर सकते हैं। अगर निपटना मुश्किल है तो ध्यान रखें कि आपके आसपास लोग आपकी मदद कर सकते हैं।
 
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