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बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए इन बातों का रखें ध्यान

किसी बात पर अड़ जाना, नाराज़ होना, हठ करना, ऐसा स्वभाव जरूरी नहीं है कि किसी खास आयु वर्ग से जुड़ा है, क्योंकि ऐसा व्यवहार केवल बच्चों में ही नहीं, बल्कि किशोर, वयस्क और यहां तक कि बुजुर्गों में भी देखा जा सकता है। इस तरह के लक्षण ऐसे शख्स के साथ काम करने की चुनौतियों को और बढ़ाते हैं।

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जाने बच्चों को कैसे समझाएं समय का महत्व

बच्चों और किशोरों को समय के प्रभावी प्रबंधन में दक्ष होना चाहिए, जिससे वे पढ़ाई-लिखाई को समय देने के साथ ही ऐसी अच्छी आदतें भी विकसित कर सकें, जिससे भविष्य में उन्हें फायदा हो।

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परीक्षा के तनाव को न आने दें आसपास

परीक्षाएं प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का अभिन्न हिस्सा होती हैं और वे इनसे बचने की चाहे जितनी कोशिश करें लेकिन ये ऐसी चुनौती होती हैं, जिनसे बचा नहीं जा सकता। छात्र इस चुनौती को कैसे लेते हैं और कैसे निपटते हैं, इस पर जीवन में चुनौतियों के प्रति उनका रवैया निर्धारित होता है।

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अड़ियल और जिद्दी बच्चों को कैसे करें ठीक

बच्चों को कुछ समझाना अब बहुत चुनौतीपूर्ण काम हो गया है। विशेष तौर पर किशोरावस्था में बच्चे न सिर्फ बहस करते हैं, बल्कि वे हठी और अडिय़ल रवैया भी दिखाते हैं, जिससे उनके कुछ और समझने का दायरा बेहद सीमित हो जाता है।

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