बच्चों को मनी मैनेजमेंट कैसे सिखाएं
आठ से दस साल की उम्र के बीच बच्चे अक्सर दूसरे बच्चों से अपनी तुलना शुरू कर देते हैं, जैसे दोस्तों के पास महंगी चीजें हैं तो उसके पास क्यों नहीं, आदि।
Money Management: जिस तरह बच्चों को घर के छोटे-छोटे कामों में हाथ बंटाना सिखाना जरूरी है, उसी तरह उनको बचपन से मनी मैनेजमेंट भी सिखाना जरूरी है, तभी वो पैसों का महत्त्व समझ सकेंगे। कई बार बचपन के लाड़ प्यार में हम बच्चों को पैसों के महत्व और मनी मैनेजमेंट के बारे में बताना ही भूल जाते हैं। सही मायने में आठ साल की उम्र के बाद से ही बच्चों को मनी मैनेजमेंट के बारे में बताना शुरू कर देना चाहिए।
आठ से दस साल की उम्र के बीच बच्चे अक्सर दूसरे बच्चों से अपनी तुलना शुरू कर देते हैं, जैसे दोस्तों के पास महंगी चीजें हैं तो उसके पास क्यों नहीं, आदि। इस समय बच्चे के मानसिक विकास पर सबसे अधिक ध्यान देना होता है। ऐसे में वह अपनी बाकी चीजों के साथ ही अपने खर्चों को भी खुद ही नियंत्रित करेगा तो उसे बेहतर मनी मैनेजमेंट सिखाया जा सकता है। जानते हैं कैसे सिखाएं बच्चों को मनी मैनेजमेंट-
Money Management:पॉकेट मनी देना शुरू करें

बच्चों के पॉकेट मनी से उन्हें बेहतर मनी मैनजमेंट सिखाया जा सकता है। हर महीने बच्चों को एक निश्चित राशी पॉकेट मनी के रूप में देना शुरू करें। उसके बाद आप मूलभूत खर्च जैसे स्कूल फीस, ट्यूशन या एक्टिविटी क्लास की फी,कपड़े, भोजन आदि के अलावा जो भी बच्चे डिमांड करते हैं, उन्हें उनकी पॉकेट मनी से खर्च करने के लिए कहिये। जब उन्हें अपनी ही बचत का पैसा खर्च करना पड़ेगा, तब ही वह सोच-समझकर खर्च करना सीखेंगें।
घर का बजट बनाने से उन्हें शामिल करें

घर का बजट बनाते समय बच्चों को भी शामिल करें। उन्हें भी इस बात की जानकारी होनी चहिये कि आपके खर्चे कितने हैं, जिससे वो आपसे हर समय महंगी चीज़ें खरीदने की ज़िद ना करें। भूलकर भी बच्चों की महंगी से महंगी डिमांड पूरी करने की आदत न डालें।
बचत करने की आदत बनाएं

बच्चों की आदत डालें कि उन्हें जितनी पॉकेट मनी मिली है, उसमें से थोड़ा-बहुत कुछ भी बचाने की कोशिश करें। आप चाहें तो बचत का एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और लक्ष्य को हासिल करने के बाद बच्चों को कुछ छोटा उपहार भी दे सकते हैं।
शॉपिंग पर साथ ले जाएं

जब भी आप शॉपिंग पर जाएं बच्चों को साथ ले जाएं और वहां पहले से तैयार की हुई लिस्ट के हिसाब से ही सामान खरीदें ना ही खुद लिस्ट के बाहर अनावश्यक कोई सामान लें और ना बच्चों को लेने दें। इससे उन्हें भी मनी मैनेजमेंट समझ आएगा। लिस्ट तैयार करते समय भी उनको साथ बिठा सकते हैं।
वास्तविक खर्चे और अनावश्यक खर्चों में अंतर समझाएं

बच्चे अक्सर टीवी या फिर दोस्तों के पास चीज़ें देखकर खुद भी खरीदने की ज़िद करते हैं, जबकि उन चीज़ों की वास्तव में उन्हें जरूरत ही नहीं होती है। आप प्यार से बच्चों को बताएं की अनावश्यक सामान पर अगर वो सारा पैसा खर्च कर देंगे तो हो सकता है समय आने पर वो सही में ज़रूरत के किसी सामन को ना खरीद सकें।
अब आप भी अपने 8 से 10 साल के अपने बच्चे को इन तरीकों से सिखाएं मनी मैनेजमेंट।
