शादी के लिए मानसिक रूप से कैसे हों तैयार: Mentally Preparation for Marriage
Mentally Preparation for Marriage

Mentally Preparation for Marriage: शादी एक नई जिंदगी की शुरूआत है जिसमें दो अनजाने युवा एक-दूसरे पर विश्वास, प्यार और समर्पण से अटूट रिश्ते में बंधते हैं। हमारे समाज में तो शादी जन्म-जन्मांतर तक साथ चलने वाला रिश्ता माना जाता है। लेकिन शादी का नाम सुनते ही कुछ लड़कियां तुनक जाती हैं और साफ तौर पर मना कर देती हैं। कुछ के मन में अनजाना डर, आशंकाएं या एंग्जाइटी होती हैं। जिनकी वजह से महिलाएं शादी के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार नहीं कर पाती। इसके पीछे शादी के बारे में न तो उन्हें शादी के बारे में पढ़ाया जाता है, न ही पेरेंट्स से खुले तौर पर बातचीत हो पाती है। अपने हमउम्र दोस्तों से मिली आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर शादी और ससुराल वालों को लेकर उनके मन में एक डर बैठ जाता है। जिसके चलते वो शादी से इंकार करती हैं।

लेकिन अगर युवतियों को शादी केे प्रति पोजीटिव विचार होने पर शादी के प्रति अपनी सोच बदल सकती हैं। एंग्जाइटी को दूर कर खुद को मानसिक रूप से तैयार कर सकती हैं और पूरे काॅन्फिडेंस से जीवन की नई शुरुआत कर सकती है

स्वीकारें सदियों से चली आ रही परंपरा

एक उम्र के बाद शादीे होती है और शादी के बाद लड़की को मां-बाप का घर छोड़कर ससुराल जाना पड़ता है। शादी के बाद उनका अपना घर-संसार, अपनी फैमिली होगी-युवतियों को समाज में मौजूद परंपरा कोे स्वीकारना जरूरी है। इसके प्रमाण वे अपने दोस्तों, नाते-रिश्तेदारों की शादी में देख सकती हैं। ऐसे बहुत कम मामले होंगे जिनकी शादी न हुई हो या जो शादी के बाद अपने मां-बाप के घर रह रही हों। लिहाजा युवतियों को मन में यह बात बैठा लेनी चाहिए कि देर-सवेर सही, शादी तो होनी ही है। तभी वो खुद को शादी के लिए तैयार हो सकती हैं।

माता-पिता से बिछुड़ने का डर

शादी के बाद अपने माता-पिता से बिछुड़ने, उनके लाड-प्यार के साये से दूर जाने या अलग रहने का डर युवतियों के मन के किसी कोने में जरूर होता है। साथ ही ‘बेटी तो पराया धन होती है’ मानसिकता भी उनमें जाने-अनजाने शादी के प्रति डर पैदा करती है। मन में यह फीलिंग भी रहती है कि बचपन से जिस घर में वह पली-बड़ी है। जब वही उसका नहीं है, तो इसकी क्या गारंटी है कि ससुराल भी उसका घर होगा। इस मनःस्थिति के चलते उनके मन में शादी न करने की बात रह-रहकर आती है और वो शादी से कतराती हैं। 

जबकि उन्हें पाॅजीटिव रवैया रखना चाहिए कि मां-बाप का घर शादी के बाद घर तो हमेशा आपका रहेगा। साथ ही एक नया घर-परिवार उनकी जिंदगी में शामिल होगा रहा है। जिसके लिए उन्हें खुश होना चाहिए। मन में डर न बैठाएं, नए घर मे सब बहुत अच्छा होगा।

जहां तक अपने मां-बाप से बिछुड़ने का गम है तो युवतियों को यह भी देखना चाहिए कि पहले के जमाने में जरूर शादी के बाद लड़की वाकई दूर हो जाती थी, कई बार तो सालोंसाल उनसे मिलना या उनसे बात करना नहीं हो पाता था। लेकिन आज के डिजीटिलाइजेशन के जमाने में मोबाइल ने अपनों से बिछुड़ने का गम और दूरियां मिटा दी हैं। स्मार्टफोन के माध्यम से किसी भी समय बात करके उनसे मन की बात शेयर कर सकती हैं। वीडियो काॅल के जरिये तो उन्हें एक-दूसरे से दूर होने का अहसास नहीं होगा।

पहले ही बेहिचक शंकाओं का निवारण करना है बेहतर

शादी के बाद उम्रदराज पेरेंट्स की जिम्मेदारी कौन लेगा, उनकी देखभाल कौन करेगा-लड़की के मन में यह डर भी बना रहता है। इसके लिए जरूरी है कि लड़का-लड़की शादी से पहले ही पूरी साफगोई से बुजुर्ग पेरेंट्स की देखभाल करने के तरीके को स्पष्ट कर लेना चाहिए। इस संबंध में लड़के की सहमति होनी जरूरी है।

इसी तरह अगर आप शादी के बाद अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है या वर्तमान नौकरी छोड़ना नहीं चाहती। इसके लिए भी जरूरी है कि लड़की को न केवल भावी पति से, बल्कि उनके पेरेंट्स से इसकी परमिशन पहले ही ले लें। ताकि शादी के बाद उनके दवाब में लड़की को अपने सपने पूरे न करने का गम झेलना पड़े।

स्वछंद तौर-तरीकों से जरूर कराएं अवगत

Mentally Preparation for Marriage
Mentally Preparation for Marriage

अगर कोई लड़की एकल परिवार में रहने वाली है और बचपन से ही हाॅस्टल में पढ़ी और अब नौकरी कर रही हो। तो वह निश्चय ही स्वच्छंद विचारों वाली और आत्मनिर्भर होगी। अगर उसकी शादी संयुक्त परिवार में तय हो रही हो, तो उसके लिए वहां के तौेर-तरीके अपनाना और काम करना कठिन हो सकता है। संयुक्त परिवार में एडजस्ट होने में उसे दिक्कतें आ सकती हैं।

शादी के बाद होने वाली किचकिच या तनातनी से बचने के लिए लड़की को अपने भावी पति से साफ बात कर लेनी चाहिए। या फिर अपने पेरेंट्स को संयुक्त परिवार में शादी न कराने के लिए आगाह कर देना चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत न हों। पेरेंट्स को भी भावी पति और उसके परिवार वालों से लड़की के व्यवहार को छुपाना नहीं चाहिए। उनकी रजामंदी से ही शादी करनी चाहिए।

पोजीटिव विचार लेकर जाएं ससुराल

अमूमन हर लड़की के मन में यह एंग्जाइटी रहती है कि जिस घर में जा रही है, वो कैसा होगा। जीवनसाथी कैसा होगा, उनका व्यवहार कैसा होगा। परिवार के दूसरे सदस्य कैसे होंगे। अक्सर ससुराल के सदस्यों के प्रति जाने-अनजाने मन के किसी कोने में नेगेटिव सोच भी रहती है जो सुनी-सुनाई बातों पर यकीन कर या दूसरे के उदाहरण देखकर बनती है। जैसे-सास अच्छी नहीं होती, गुस्सैल होती है, तानाशाह बनने की कोशिश करती है। या फिर ननद अपना मतलब निकालने वाली होती है जिसकी वजह से इधर की बात उधर लगाती रहती है।

जरूरी है कि लड़कियों को दूसरों के उदाहरणों पर कान नहीं देने चाहिए क्योंकि जरूरी नहीं कि जैसा दूसरों के साथ हुआ, उसके साथ भी हो। इस तरह की सोच रखनी चाहिए कि ससुराल उनका नया घर है। इसे स्वर्ग जैसा खूबसूरत बनाना है जिसमें सबका आदर और प्यार हो। हालांकि हरेक का रहने का तौर-तरीके, सोचने का स्टाइल अलग-अलग होता है। लड़कियों को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि वो अपने अच्छे रवैये से वहां का माहौल अच्छा बनाएगी। जैसे उसके पेरेंट्स और भाई-बहन उसके लिए बहुत खास हैं, वैसे ही ससुराल में सास-ससुर, देवर, ननद भी उसके लिए महत्वपूर्ण माननेे चाहिए। उनका आदर करके, छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और अपने अच्छे रवैये से लडकियां सबका मन जीत सकती हैं। निश्चय ही ससुराल के सदस्य उन्हें सरमाथे पर बिठाकर रखेंगे।

जिम्मेदारियां कैसे निभाएंगी

यह सच है कि मां-बाप के साये मे अक्सर लड़कियां ऐश करती हैं। कइयों को घर की जिम्मेदारी संभालना, काम करना या सबकी देखभाल करना नहीं आता। लडकियां इसी पेशोपश में रहती हैं कि ससुराल में सबकी जिम्मेदारी वो कैसे संभालेंगी। उनके मन में यह डर हमेशा बना रहता है।

गौर करें तो ऐसा सभी के साथ होता है। शादी से पहले जरूरी नहीं कि सभी लड़कियों को काम करना आता हो, घर की जिम्मेदारी संभालनी आती हो। शुरू में ज्यादातर सभी ऐसी ही होती हैं, फिर दूसरे परिवार के तौर-तरीके और काम करने का ढंग अलग भी हो सकता है। जब लड़कियां नए घर-परिवार में जाती हैं, सबके साथ रहना शुरू करते हैं, समय के साथ-साथ अनुभव पाकर सीख लेती हैं। वैसे अगर लड़कियां चाहेें तो इस बारे में दूसरों से सलाह ले सकती हैं, शादी को लेकर दिल में बैठे डर को मिटाने के लिए किताबें पढ़ सकती हैं या यू-ट्यूब वीडियो देख सकती हैं।

टाइम मैनेजमेंट है जरूरी

सबसे बड़ी परेशानी वर्किंग लड़कियों की होती है। शादी के बाद लडकियां आगे बढ़ने के सपने पूरा करना चाहती हैं। लेकिन उनके मन में यह डर भी रहता है कि घर-परिवार को देखने के साथ अपने लक्ष्यों को पूरा कैसे कर पाएंगी। इसके लिए जरूरी है कि लडकियों को घर और नौकरी के बीच बैलेंस बनाकर चलना चाहिए। टाइम को ठीक तरह से मैनेज करके चलना चाहिए क्योंकि उनके लिए परिवार और काम दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। लड़कियां भावी पति, ससुराल वालों के सहयोग और समझदारी से इस समस्या का हल ढूंढ सकती हैं।

दूसरों से न करें तुलना

शादी करने जा रही लड़कियों के मन में भावी पति को लेकर बहुत उत्तेजना रहती है कि घोड़े पर सवार होकर मेरे सपनों का राजकुमार आएगा, उसके इशारों पर नाचेगा, आसमान से चांद-तारे तक तोड़ लाएगा या किसी फिल्मी हीरो की तरह उसका पूरा ध्यान रखेगा, उसकी हर ख्वाहिश और  हर काम करेगा।  जबकि लड़कियों को जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएं रखना गलत है। वास्तविकता में जब सपनों की दुनिया का राजकुमार उन्हें नहीं मिलता, तो उन्हें कई बार आघात पहुंचता है। जिससे उनके बीच लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं।

जरूरी है कि लड़कियों को अपने पति की तुलना किसी से नहीं करनी चाहिए। यह मानकर चलना चाहिए कि परफेक्ट कोई नहीं होता। हर व्यक्ति में गुण-अवगुण सभी में होते हैं, अपने जीवनसाथी को हर हाल में स्वीकार करना चाहिए। अच्छी गृहस्थी चलाने के लिए जरूरत हो तो लड़कियों को उसके रंग में ढल जाना चाहिए। दोनों में अच्छी अंडरस्टेंडिंग जरूर होनी चाहिए। यह मानकर चलें कि गृहस्थी की गाड़ी किसी एक व्यक्ति के अच्छे होने से नहीं चलती। दूसरे को उसके हिसाब से कई बातें छोड़ने या झुकने की भी जरूरत पड़ती है जिसके  लिए उसे तैयार रहना चाहिए।

एक-दूसरे के प्रति रहे वफादार

यह भी संभव है जहां दो बर्तन होंगे वो आपस में टकराएंगे ही। नोंक-झोंक या लडाई-झगड़ा तो हर फैमिली में होती है। उसके समाधान के लिए आपस में खुलकर बात करनी चाहिए, न कि अपने परिवार वालों, दोस्तों से इसके बारे में बात करनी चाहिए। इससे रिश्ते में कड़वाहट आ सकती है। इसके बजाय एक-दूसरे के प्रति वफादार रहने की कोशिश करनी चाहिए तभी वे अटूट रिश्ता कायम कर सकते हैं। दिमाग में यह बात बिठानी जरूरी है कि शादी के बाद आपको जीवन का बेस्ट फ्रेंड मिलता है, उसका सम्मान करना चाहिए। उनका प्यार, विश्वास जीतना चाहिए तभी एक-दूसरे की बाॅन्डिंग मजबूत होती है।

एक-दूसरे को दें पूरी स्पेस

लड़कियों को शादी के बाद पूरा स्पेस देने की कोशिश करनी चाहिए। भले ही उन्होंने नई जिंदगी की शुरुआत की हो, उनकी अपनी पसंद-नापसंद हैं उन्हें अपने हिसाब से काम करने की छूट होनी चाहिए। यह समझना चाहिए कि उनके अपने पेरेंट्स, भाई-बहन या फ्रेंड-सर्कल भी हैं, उन्हें उनके साथ बात करने या उनका काम करने की छूट देनी चाहिए।

(डाॅ पूजा आनंद शर्मा, मनोवैज्ञानिक, विश्वास हीलिंग सेंटर, दिल्ली)