Summary: ऑटो वाले की बेटी ने किया कमाल, मीनाक्षी हुड्डा वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियन
मीनाक्षी हुड्डा ने रोहतक की गरीबी और संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए 24 साल की उम्र में वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2025 में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।
World Boxing Cup 2025: ग्रेटर नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स 2025 में भारत की मीनाक्षी हुड्डा ने इतिहास रच दिया है। 48 किग्रा भार वर्ग में विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा ने उज्बेकिस्तान की फोज़ीलोवा को 5-0 से मात देकर भारत को इस टूर्नामेंट का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। यह जीत सिर्फ़ एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय बॉक्सिंग की मजबूती का शक्तिशाली संदेश है। भारत के लिए यह शानदार शुरुआत है और आने वाले दिनों में यह सफलता स्वर्णिम इतिहास में बदल सकती है।
गरीबी से हार नहीं मानी
24 साल की उम्र में रोहतक की मीनाक्षी हुड्डा ने लिवरपूल में आयोजित चैम्पियनशिप में सफलता हासिल कर हर किसी को चौका दिया है। उनकी यह उपलब्धि उस लड़की की कहानी है, जिसकी शुरुआत बॉक्सिंग रिंग से नहीं, बल्कि किराए के ऑटो रिक्शा की पिछली सीट से हुई थी।
चार भाई–बहनों में सबसे छोटी मीनाक्षी बचपन से अपने पिता श्रीकृष्ण को रोज़ कड़ी मेहनत करते देखती थीं। गरीबी उनके हर कदम के साथ चलती थी। पिता को उसकी प्रतिभा पर कभी शक नहीं हुआ लेकिन खर्चों की चिंता सताती थी। वो हमेशा यही सोचते थे कि खास डाइट, ग्लव्स और ट्रेनिंग… मैं सब कैसे कर पाऊँगा?

कोच ने ख़रीदकर दिया पहला बॉक्सिंग किट
लेकिन माँ की दृढ़ता और कोच विजय हुड्डा के विश्वास ने सबकुछ बदल दिया। केवल 12 साल की उम्र में मीनाक्षी विजय हुड्डा की स्थानीय बॉक्सिंग अकादमी से जुड़ीं। कोच ने उनके अंदर छिपी काबिलियत तुरंत पहचान ली। उन्होंने ही उनके लिए पहला बॉक्सिंग किट खरीदा, सही डाइट सुनिश्चित करवाई और पिता को समझाकर ट्रेनिंग की अनुमति दिलाई। एक बार जब श्रीकृष्ण ने अपनी बेटी को रिंग में देखा, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे रोज़ उसे ऑटो में लेकर अकादमी पहुँचाते, टूर्नामेंट्स के लिए पैसे उधार लेते और रिंगसाइड खड़े होकर सबसे ज़ोर से उसका हौसला बढ़ाते।
पहले भी कई जगह जीत हासिल की
धीरे-धीरे मीनाक्षी को सफलताएँ मिलने लगी। सब जूनियर जीत, इंडिया स्कूल गेम्स खिताब, 2019 युवा राष्ट्रीय स्वर्ण, सभी जगह मीनाक्षी ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 2021 में सीनियर नेशनल्स में सिल्वर, 2022 में एशियन अमेचर बॉक्सिंग चैम्पियनशिप (52 किग्रा) में सिल्वर, 2023 और 2024 में राष्ट्रीय चैंपियन बनीं।
खुश हूं कि देश के लिए मेडल जीता
मीनाक्षी कहती हैं, “विश्व चैंपियन बनना मेरा सपना था। मैंने उसे हासिल किया… और यह सिर्फ़ शुरुआत है। प्रतियोगिता देश में हो रही थी, इसलिए क्राउड का सपोर्ट जबरदस्त था। में खुश हूँ कि देश के लिए मेडल ला सकी।“ वह आगे कहती हैं कि वर्ल्ड चैंपियन बनने से ज्यादा मुश्किल उस स्टेटस को बनाये रखना है। ऑटो ड्राइवर की बेटी आज विश्व मंच पर भारत का तिरंगा लहरा रही है।
आज भारत के 15 बॉक्सर फाइनल मुकाबलों में उतर रहे हैं, जिससे देश की मेडल उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। इससे पहले दो बार की विश्व चैंपियन निकहत ज़रीन, जादुमणि सिंह एम (50kg), पवन बर्तवाल (55kg), सचिन सिवाच (60kg) और हितेश गुलिया (70kg) भी फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित कर चुके हैं।
