करवा चौथ में चाँद को छलनी से क्यों देखते हैं?: Karwa Chauth Story
Karwa Chauth Vrat Rule

Overview:

माना जाता है कि करवा चौथ का व्रत करने से सुहागिनों को चौथ माता अखंड सुहाग का आशीर्वाद देती हैं। करवा चौथ का व्रत करने के दौरान हर सुहागन को कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस कठिन व्रत को करने के भी कुछ नियम हैं।

Karwa Chauth Vrat Rule: कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। साल की 12 चौथ में से करवा चौथ को सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चौथ माना जाता है। यही कारण है कि हर सुहागिन इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती है। माना जाता है कि इस व्रत से सुहागिनों को चौथ माता अखंड सुहाग का आशीर्वाद देती हैं। करवा चौथ का व्रत करने के दौरान हर सुहागन को कई बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस कठिन व्रत को करने के भी कुछ नियम हैं। आपकी छोटी सी गलती इस व्रत को खंडित कर सकती है। आइए जानते हैं कि करवा चौथ के व्रत के दौरान आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।  

Karwa Chauth Vrat Rule-हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल करवा चौथ का त्योहार 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
According to the Hindu calendar, this year the festival of Karva Chauth will be celebrated on 20 October.

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल करवा चौथ का त्योहार 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर को सुबह 6.46 बजे होगा, जो 21 अक्टूबर को प्रात: 4.16 बजे पर समाप्त होगा। इसलिए 20 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। शाम को महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करवा चौथ पूजन का शुभ समय 20 अक्टूबर को शाम 5.45 बजे से शुरू होगा, जो शाम को 7.01 बजे तक रहेगा।  

करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है। ऐसे में इस दिन सुहागिनों को  अन्न और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। इस पवित्र व्रत में सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व होता है। इसलिए आपको हमेशा श्रृंगार करना चाहिए। सिंदूर, पाजेब, बिछिया, मेहंदी, बिंदी, चूड़ियां, मंगलसूत्र और लाल या किसी भी शुभ रंग के वस्त्र धारण करना जरूरी है। इस दिन किसी भी सुहागन को दूसरी महिला को सुहाग का सामान नहीं देना चाहिए।

करवा चौथ के व्रत में चौथ माता की कथा सुनने का बहुत महत्व है। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए अपने घर की परंपरा के अनुसार समय तय करके चौथ माता की कथा सुनें। कुछ महिलाएं दोपहर में और कुछ महिलाएं संध्या समय में कथा सुनती हैं। समय कोई भी हो, लेकिन कथा सुनना जरूरी है। इसी के साथ करवा चौथ का व्रत चंद्र पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। इसलिए अपना व्रत चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही खोलें। सबसे पहले आप चंद्र देव को अर्घ्य दें, इसके बाद व्रत का पारण करें। किसी कारणवश अगर आप चांद नहीं देख पा रही हैं तो आज के डिजिटल युग में आप वीडियो कॉल या गूगल मीट और जूम मीटिंग जैसे विकल्प चुनकर भी चंद्र दर्शन कर सकती हैं। लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण होता है।  

कई महिलाओं को दिन में सोने की आदत होती है। लेकिन करवा चौथ के व्रत के दिन सुहागिनों को दिन में नहीं सोना चाहिए। माना जाता है कि इससे व्रत का फल नहीं मिलता है। साथ ही दोष भी लगता है। हालांकि बीमार और गर्भवती महिलाओं को इस नियम से मुक्त रखा गया है। इस दिन आपको अपने कपड़ों के रंग का बहुत ही सोच समझकर चयन करना चाहिए। नीले, काले, भूरे, बैंगनी आदि रंगों के कपड़े न पहनें। इसकी जगह लाल, गुलाबी, पीले, हरे, नारंगी जैसे रंगों का चयन करें।  

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...