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Digital Detox: मोबाइल से दूरी है कुछ समय के लिए जरुरी
Important of Digital Detox

Digital Detox: डिजिटल समय में स्मार्टफोन के बिना कोई काम नहीं चल पाता है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन के साधन के रूप में लोगों के हाथों में मोबाइल ने जगह बना ली है। ये लोगों की ज़िन्दगी पर इस कदर हावी हो गया है कि इससे निकलना आसान नहीं है।

30 वर्षीय रितू अपना मोबाइल खराब होने से इतनी बेचैन हो गई कि उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें! उसे मोबाइल के बिना एक – एक पल गुजारना काफी मुश्किल लग रहा था। उसे लग रहा था कि इतने कम समय में क्या -क्या बदलाव हो गए होंगे। रितु अपने फोन से दूर होने की वजह से काफी परेशान हो गई थी लेकिन उसकी परेशानी उस वक्त और बढ़ गई जब उसने अपने तीन साल के मासूम बच्चे को मोबाइल में इतना खोया हुआ पाया कि उसने अपनी मां को भी नहीं देखा। ऑफिस से थकी हुई घर पहुंची रितु उम्मीद कर रही थी कि उसका बच्चा दौड़ कर उसके गले लग जाएगा। अफसोस ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यह कहानी सिर्फ एक रितू की नहीं बल्कि हमारे आस – पास मौजूद अधिक तर लोगों की है।

वहीं दूसरी ओर दिन में 12 घंटे से भी ज्यादा सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने वाली 22 वर्षीय स्नेहा बताती हैं कि फोन का लगातार इस्तेमाल करने से सिर में भयंकर दर्द रह ने लगा था। सिर
दर्द से परेशान होकर उसने अपने लिए फोन को कम इस्तेमाल करने का संकल्प लिया। पहले तो फोन से अपने आप को दू रखना बेहद मुश्किल काम था लेकिन धीरे – धीरे उसने अपने आप को दूसरे काम में व्यस्त रखना शुरू कर दिया। अब वह चार घंटे से ज्यादा फोन का इस्तेमाल नहीं
करती हैं। दिल्ली विश्विद्यालय में पढ़ने वाली स्नेहा का कहना है कि फोन से दूर होने से मेरा
पढ़ाई में मन लगने लगा है और मैं पह ले से ज्यादा खुश रहने लगी हूं। यह मोबाइल रूपी दानव बच्चों को माता -पिता से दूर कर रहा है। इस समस्या का समाधन जल्द ही हर अभिभावक को ढूंढना होगा नहीं तो बच्चों के भिवष्य को खराब होने से कोई नहीं बचा सकता है। शहरों में महिलाएं वॄकग होने के कारण अपने बच्चों को दादा – दादी के पास छोड़ कर जाते हैं। ग्रैंड पैरेंट्स बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें अपना मोबाइल दे देते हैं। वह यह नहीं जानते हैं कि बच्चे पर इसका क्या असर हो रहा है ? जहां लोगों का कहना है कि एकल परिवार हो जाने से बच्चे मोबइल के प्रति ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं लेकिन घर में रह ने वाले बड़े – बुजुर्ग स्वयं पूरे दिन फोन पर वीडियो देखने में व्यस्त रहते हैं।

बच्चों पर मोबाइल से होने वाले दुष्प्रभाव

  1. बच्चों में चिड़चिड़ापन
  2. नींद की कमी
  3. ज़िद्दीपन
  4. अकेलापन
  5. एकाग्रता और कमजोर याददाश्त
  6. बच्चों की आंखों में दर्द रहना
  7. धुंधला दिखाई देना
  8. आंखों की नसें कमजोर होना
  9. सिर दर्द की शिकायत
  10. मोटापा
  11. नर्वस सिस्टम का कमजोर होना

समय रहते क्या कर सकते हैं

बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए उनसे रोज बातचीत जरूर करें। कौन सी चीजों पर बच्चा क्या रिएक्ट कर रहा है इस पर नजर रखें। डेढ़ से दो घंटे से ज्यादा बच्चों को दिन में फोन का इस्तेमाल न करने दें। आने वाली पीढ़ी को सुधारने का काम हमारे हाथ में है, इसिलए बिना देर किए आप आजसे ही सजग हो जाएं। मनो वैज्ञािन कों का कहना है कि बच्चे जब अपने आप को अकेला महसूस करते हैं तो वह इन आर्टिफीसियल चीजों के पीछे ज्यादा भागते हैं। बच्चे अब पहले की तरह अनुसाशित नहीं रहे वे बहुत ज्यादा गुस्सैल हो गए हैं। उनकी बात नहीं मानी गई तो वह कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। इसलिए समय रहते बच्चे के व्यवहार को देखकर मनोवैज्ञानिक से मिले। बच्चे हमेशा बड़ों का अनुकरण करते हैं इसलिए पहले आप मोबाइल से दूरी बनाए रखने का अभ्यास करें। उसके बाद ही बच्चों को किसी तरह की हिदायत दें। अन्यथा बच्चे आपसे प्रश्न कर सकते हैं कि आप खुद पूरा दिन फोन में लगे रहते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए आप मोबाइल का इस्तेमाल केवल जरूरत होने पर ही करें। वक्त किसी के लिए भी बेहद अहम होता है, जिस तरह आप अपने कमाए हुए पैसों को बहुत सोच – समझ कर इस्तेमाल करते हैं वैसे ही समय का भी इस्तेमाल करें। फोन पर रिश्तेदारों को हाय -हेल्लो करने के बजाय उन के घर पर जाकर मिलें। इससे आप के रिश्ते भी सुधरेंगे और आपसी प्रेम भी बढ़ेगा वैसे भी आज के समय में भाईचारे और प्रेम की कमी हो रही है।

डिजिटल डिटॉक्स क्यों है जरूरी

टेक्नोलॉजी से दूर रहना बिल्कुल असंभव है लेकिन फोन के स्क्रीन को थोड़ा कम टच कर के
आप अत्यधिक खुश रह सकते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि डिजिटल डिटॉक्स करके आप इस
चीज से थोड़ा दूर रह सकते हैं।

Digital Detox
Importance of Digital Detox
  • अगर आप भी फोन की दुनिया से बाहरी निकलना चाहते हैं तो जब आप अपनों के साथ हो तो अपने फोन या टेबलेट को एयरप्लेन मोड पर कर दें या फिर दूसरे कमरे में रख दें।
  • पूरे  दिन  में कुछ समय केवल अपने  िलए निकालें। इस  मय में खुद को टेक फ्री जोन में रखें। रिलैक्सिंग बाथ लें या पार्क में घूमें।
  • खाने की टेबल से फोन को दूर ही रखें। खाना खाते समय खाने पर और अपने आसपास बैठे हुए लगों से बात करें।
  • बेडरूम में फोन पर समय बिताने के बजाय, अपने पार्टनर पर ध्यान दें। अपने बेडरूम को नो -टेक जोन बनाकर आप न केवल पार्टनर से बेहतर नजदीकी का अनुभव करेंगे, बल्कि अच्छी नींद भी पाएंगे।
  • सुबह उठ कर फोन देखने के बजाय सूरज की रोशनी को देखें। पौधों में पानी डालें। मॉर्निंग वॉक पर जाएं।
  • डिजिटल की दुनिया में लोगों के अंदर िकताबें और अखबार पढ़ने की दिलचस्पी कम रह गई है। डिजिटल रीडिंग के समय आपका दिमाग काफी भटकता है। वहीं जब आप किताबें पढ़ते हैं तो आपका मस्तिष्क स्थिर रहता है और सूचनाओं को बेहतर ढंगसे समझते हैं। किताबों से दोस्ती करें और एकाग्र होने की कोशिश करें।
  • फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे ह्रश्वलेटफॉर्म हमें दूर – दरा के लोगों से जोड़ने में मदद करते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं की मानें तो हम सोशल मीडिया पर जितना समय बिताते हैं, उतना ही ज्यादा बुरा महसूस करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम वहां अपने आसपास के लोगों के बाहरी जीवन को ही देख पाते हैं और वो दिनों – दिन हमारे दिमाग पर हावी होता चला जाता है, जिस के चलते हम अवसाद से घिर जाते हैं। यिद आप सही मायने में खुश रहन चाहते हैं तो अपनों से मिलिया- जूलिया उनके साथ चाय पर चर्चा करिये।
  • फोन और कंह्रश्वयूटर पर लगातार देखते रहने से आंखों में सूखापन की समस्या बढ़ जाती है इसिल ए 20 मिनट का ब्रेक लें और डिजिटल डिवाइस को ना देख कर कोई अच् छी सी पेंटिंग को देखें या आसमान की तरफ देखें।
  • अलार्म फोन में लगाने की जगह एक अलार्म घड़ी खरीदलें। उस से आपको फोन अपने पास रख कर नहीं सोना होगा
  • फोन पर टेक्स्ट पढ़ते समय उसे उठा कर आंखों की सीध में रखें, बजाय गर्दन झुकाकर पढ़ने के, इस तरह आप ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम से बच सकते हैं। गर्दन की मांस पेशियों में होने वाली अकड़न को ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहते हैं। यह परेशानी गर्दन का झुकाव आगे की तफ होने के कारण हो ताहै।

कैसे समझें  कि  डिजिटल डिटॉक्स  की जरूरत है

यिद आप हर एक मिनट या उससे भी कम समय में मोबाइल को स्क्रॉल करते हैं तो आप मोबाइल
की लत के शिकार हैं। ऐसे में आपको या आपके अपनों को डिजिटल डिटॉक्स  होने की जरूर त है।
ऐसा इस लिए क्योकि  यह आपके स्वास्थ्य और व्यिक्तत्व व्यवहार और सामाजिक दायरे को हिला
रहा है। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब यही है कि कुछ समय के  लिए  ही सही लेकिन मोबाइल से दूरी बनाकर रखें। ताकि आप अपना कीमती समय बाकी रचनात्मक कामों में लगाएं। यह टेक्नोलॉजी से घिरे युवाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण चिकित्सा बन रहा है। इसका मतलब है डिजिटल दुनिया से खुद को दूर करना। लोग खुद को अपने स्मार्टफोन और इंटरनेट से कुछ घंटों, दिनों या महीनों के लिए दूरी तय करने का लक्ष्य रखते हैं। यूनिविर्सटी ऑफ बाथ की रिसर्च के मुताबिक 1 सप्ताह का डिटॉक्स है असरदार। डिजिटल डिटॉक्स करना आसान नहीं होता। शुरुआती दौर में एक घंटे सुबह और एक घंटे रात को फोन से अपने आप को दूर रख कर आप अपनी पसंद की चीजें कर के खुश रह सकते हैं।

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