मॉर्निंग ग्लोरी की ख़ास बात
हिंदी में इसे लोग नील का पौधा कह करके भी सम्बोधित करते हैं। इस पौधे की लम्बाई लगभग 6 फीट तक होती है और इसपर लगने वाले बैगनी रंग के फूल हर किसी को भाते हैं।
Morning Glory Benefits: मॉर्निंग ग्लोरी को इपोमिया नील के नाम से जाना जाता है। यह एक बेल है जिसे सामान्यतौर पर घरों की सजावट को ध्यान में रखकर उगाया अथवा लगाया जाता है। यह देखने में बहुत ही ख़ूबसरत होता है और हमारे घर की ख़ूबसूरती को कई गुना बाधा देता है। हिंदी में इसे लोग नील का पौधा कह करके भी सम्बोधित करते हैं। इस पौधे की लम्बाई लगभग 6 फीट तक होती है और इसपर लगने वाले बैगनी रंग के फूल हर किसी को भाते हैं। यह फूल अपनी ख़ूबसूरती की वजह से हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं। यह एक इंडोर और बारहमासी पौधा है जिसपर पूरे साल पेड़ लगते हैं। इसे आप अपने घर के गेट अथवा टेरेस गार्डन में भी लगा सकते हैं।
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इपोमिया नील का पौधा कैसे उगाएं?

इपोमिया नील एक ऐसा पौधा है जो गर्म जलवायु में बहुत ही आसानी से पनपता है। यह पूरी तरह से सूर्य के संपर्क में रहना पसंद करता है। इसलिए, इसको लगाने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से सूखा होना चाहिए। लेकिन यह बहुत अधिक गीली अथवा सूखी भी नहीं होनी चाहिए। मिट्टी की इस दशा से पत्तियों को नुकसान हो सकता है। इपोमिया नील के पौधे को कुछ लोग पौध से लगते हैं तो कुछ लोग इसके बीज से लगाते हैं। बीज से यदि आप उगाना चाहते हैं तो आप इसके बीजों को सीधे मिट्टी में लगा सकते हैं। जब तक यह बीज अंकुरित न हो जाएं और जड़ें बढ़ने न लगें तब तक नियमित रूप से पानी देते रहें। कुछ दिनों बाद जब यह अच्छे से विकसित हो जाए तो इसके रख रखाव में आपको ज़्यादा समय नहीं देना पड़ेगा।
इपोमिया नील का रखरखाव
यह एक बेल है जिसकी वजह से एक इसको किसी चीज़ की सपोर्ट की ज़रूरत होती है। इसलिए आपको इस बात का ख़्याल रखना चाहिए। इस पौधे की समय समय पर छंटाई करते रहना चाहिये। वैसे वसंत ऋतु पौधों की छंटाई का सबसे अच्छा और आदर्श समय होता है। इसको कितनी धूप और कितने पानी की ज़रूरत होती है इस बात का भी ख़्याल रखना होता है। अधिक धूप से पौधे को काफ़ी नुक़सान हो जाता है। बदलते मौसम का भी इस पर बहुत ही ज़्यादा प्रभाव पड़ता है इसलिए इस बात को भी ख़्याल रखना चाहिए। समय के अनुसार ही इसकी देखभाल करना चाहिए ताकि यह अच्छे से विकसित हो सके।
इपोमिया नील के उपयोग

इपोमिया नील का उपयोग कई रूपों में किया जाता है। सबसे पहले यानी कि 20वीं सदी के अंत से इसे एक सजावटी पौधे के रूप में उगाया जाना शुरू हुआ था। बाद में सजावट के साथ साथ इसे इसके औषधीय गुणों के लिए भी उपयोग किया जाने लगा। वर्तमान में इसका उपयोग चिकित्सा में ख़ूब किया जा रहा है। इसका उपयोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग के इलाज के लिए भी किया जाता है। इसके बीज के गुणों में एंटीकोलिनर्जिक, एंथेलमिंटिक, एंटिफंगल और एंटीस्पास्मोडिक आदि शामिल हैं। बालों से जुओं को हटाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
