Summary : अदरक की सबसे ख़ास बात
अदरक न सिर्फ स्वाद और सुगंध बढ़ाता है बल्कि पाचन को बेहतर, सूजन को कम और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मदद करता है।
Grow Ginger in Pots: अगर आप घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों के पौधे खुद उगाना चाहते हैं तो अदरक इसके लिए बेहतरीन शुरुआत है। अदरक न सिर्फ स्वाद और सुगंध बढ़ाता है बल्कि पाचन को बेहतर, सूजन को कम और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मदद करता है। अच्छी बात यह है कि इसे मिट्टी, मौसम और देखभाल को लेकर ज्यादा नखरे नहीं होते। थोड़ी धूप, हल्की नमी और सही तरीके से लगाया जाए तो अदरक गमले में भी खूब फलता है। आइए जानें इसे लगाने की आसान विधि और सही देखभाल के तरीके।
गमला और मिट्टी का सही चुनाव करें

अदरक की जड़ें चौड़ाई में फैलती हैं इसलिए गहरा नहीं बल्कि चौड़ा गमला चुनना बेहतर होता है। प्लास्टिक या मिट्टी के किसी भी गमले में इसे उगाया जा सकता है, बस ड्रेनेज होल होना जरूरी है ताकि पानी जमा न रहे। मिट्टी हल्की और दानेदार होनी चाहिए जिसमें कार्बनिक खाद की मात्रा संतुलित हो। सामान्य रूप से दो भाग गार्डन सॉयल, एक भाग रेत और एक भाग कम्पोस्ट मिलाकर तैयार की गई मिट्टी अदरक के लिए आदर्श मानी जाती है। भारी मिट्टी जड़ों के विकास को रोकती है इसलिए इसे हर हाल में टालें।
अदरक की गांठ को लगाने से पहले तैयार करें
बाजार से खरीदा हुआ अदरक सीधे गमले में नहीं लगाया जाना चाहिए। सबसे पहले स्वस्थ, मोटी और ताजगी से भरी गांठें चुनें, जिन पर उभरी हुई आंखें दिखाई दें। इन्हें दो-तीन घंटे पानी में भिगोकर रखें ताकि उनमें मौजूद रसायन धुल जाएं और अंकुर निकलने की संभावना बढ़े। यदि गांठ बड़ी हो तो उसे एक-दो इंच के टुकड़ों में काट लें और ध्यान रखें कि प्रत्येक टुकड़े में कम से कम एक आंख जरूर हो। इन्हें एक दिन सुखने दें ताकि कटे हुए हिस्से पर एक परत बन जाए और सड़न की संभावना न रहे।
लगाने का सही समय और तरीका अपनाएं

अदरक गर्म और नम जलवायु को पसंद करता है इसलिए इसे फरवरी से जून के बीच लगाना सबसे अच्छा रहता है। गमले में मिट्टी भरने के बाद अदरक के टुकड़ों को आंख ऊपर की ओर रखें और सिर्फ एक इंच मिट्टी से ढक दें। बहुत गहराई में लगाने से पौधा धीमे उगता है या अंकुर नहीं निकलता। पहली सिंचाई हल्की करें और तब तक इंतजार करें जब तक मिट्टी हल्की सूख न जाए। शुरुआती दिनों में पौधे के पास पानी जमा होने से यह आसानी से सड़ जाता है, इसलिए संतुलित नमी बनाए रखें।
धूप, पानी और खाद का संतुलन कायम रखें
अदरक को तेज धूप की नहीं बल्कि रोजाना 3-4 घंटे हल्की धूप या परोक्ष रोशनी की जरूरत होती है। पानी सप्ताह में 2-3 बार पर्याप्त है लेकिन मौसम के अनुसार इसे कम या ज्यादा किया जा सकता है। ध्यान रखें कि मिट्टी लगातार गीली रहे पर भीगी न हो। महीने में एक बार देसी खाद या वर्मीकम्पोस्ट देना पौधे की बढ़त के लिए अच्छा होता है। रासायनिक खादों से बचें क्योंकि वे मिट्टी की संरचना खराब कर देती हैं।
कटाई और उपयोग के लिए तैयार पौधा

अदरक धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए धैर्य रखें। लगभग आठ से नौ महीने बाद जब पौधे की पत्तियां पीली होने लगें, तब समझ लें कि कटाई का समय आ गया है। मिट्टी को हल्का सा हटाएं और जड़ों को निकाल लें। आप चाहें तो पूरी जड़ निकाल लें या कुछ हिस्सा छोड़कर बाकी पौधे को बढ़ने दें। ताजा घरेलू अदरक की खुशबू और स्वाद बाजार वाले से कहीं अधिक होते हैं और इसका इस्तेमाल चाय से लेकर सब्जियों तक हर चीज में किया जा सकता है।
