ट्रैडीशनल इंश्योरेंस दीर्घकाल में कम रिटर्न देते हैं पर यह यूनिट लिंक्ड पॉलिसीज़ की तुलना में कम चंचल भी होते हैं। ट्रैडीशनल इंश्योरेंस बीमा कराने वाले को जनरल फंड के प्रदर्शन के आधार पर वार्षिक बोनस आदि भी देते हैं। कानूनन यह प्राथमिक रूप से सरकारी बॉण्डों में निवेशित होते हैं। दूसरी ओर यूनिट-लिंक्ड पॉलिसीज़ बाज़ार से जुड़ी रहती हैं। यह निवेशक कोइक्विटी मार्केट्स में पहुंच की अनुमति प्रदान करती हैं। इस कारण रिटर्न तो तुलनात्मक रूप से ऊंचे हो सकते हैं पर वे ज्यादा अनिश्चित होते हैं।
 
यदि आपकी आयु 50 वर्ष से कम है और आप 10 वर्ष का एक ‘लॉन्ग-टर्म प्लान’ ले सकते हैं तो आपके लिए यूनिट-लिंक्ड पॉलिसी लेना एक बेहतर और ‘कॉस्ट-इफेक्टिव’ (बचत वाला) विकल्प होगा। पर यदि आप 50 वर्ष से ज्यादा आयु के हैं और कम अवधि में ज्यादा रिटर्न के इच्छुक हैं तो ट्रैडीशनल इंश्योरेंस लेना आपके लिए अधिक अनुकूल रहेगा।
 
 व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप अपने इंश्योरेंस प्लान को मॉडल करें
यदि आप एक जीवन-बीमा इंश्योरेंस प्लान लेने वाले हैं तो पहले आपको इसकी कवर साईज़ निर्धारित करना पड़ेगा। जीवन बीमा का अर्थ है आपके आश्रितों को पर्याप्त धन उपलब्ध कराना, आपकी आय के एवज में- अगर आपकी असामयिक मृत्यु हो जाती है। आपको यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि आपका जीवन बीमा मूल पारिवारिक खर्च, आपके बच्चों की पढ़ाई सम्बन्धी बड़े खर्च, शादी इत्यादि का खयाल रखेगा कि नहीं। क्योंकि इन सब कामों में आपको ऋण भी लेना पड़ सकता है। यह सब सुनिश्चित करने के लिए आप स्वयं से पूछें कि क्या आप ही परिवार के एकमात्र कमाऊ व्यक्ति हैं या कई ऐसे सदस्य हैं जो जीवन बीमा करा सकते हैं! या कोई अन्य वैकल्पिक आय के साधन उपलब्ध हैं क्या?
 
इंश्योरेंस कवर
साधारणतया आपके जीवन बीमा को आपकी दस वर्षों की आमदनी को कवर करना चाहिए। सबसे बड़ी बात, आप कतई नहीं चाहेंगे कि स्वयं को ‘अंडरइंश्योर’ कराएं। क्योंकि यदि आपका इंश्योरेंस कवर पर्याप्त नहीं है, तो आपको इंश्योरेंस कराने की जरूरत ही क्या है! इंश्योरेंस लम्बे काल और बड़े कवर की होनी चाहिए। यानी जितने आप कम उम्र के हों उतना ही इस इंश्योरेंस से लाभ होगा। प्राय: इंश्योरेंस कंपनियां आपको कम अवधि की पॉलिसी पेश करती हैं- यानी जो 10 या 15 वर्षों में पूरी हो जाएं- जिसका प्रीमियम भी ज्यादा हो। इससे बेहतर 20 से 30 वर्ष की पॉलिसी लेना है, जिसका प्रीमियम भी कम से कम हो। हालांकि ऐसी पॉलिसियां ज्यादा प्रलोभक तो लग सकती हैं क्योंकि प्रीमियम दीर्घ काल वाली पॉलिसीज़ के मुकाबले काफी कम होता है पर इसकी कॉस्ट लॉन्ग टर्म में ज्यादा लाभकारी सिद्ध नहीं होगी। बेशक यह कुछ घटक है जो आपके प्रीमियम को प्रभावित करते हैं। इंश्योरेंस कंपनियां कई अन्य पैरामीटरों को अपने संज्ञान में रखती हैं जब वे आपका प्रीमियम निर्धारित करती हैं। इनमें शामिल हैं आपकी उम्र और इसलिए अलग-अलग उम्र पर अलग-अलग प्रीमियमनिकाले जाते हैं। अन्य घटक हैं आपकी शारीरिक सेहत, पॉलिसी की शर्तं और बेशक, आपकी आमदनी!

 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज़ के विभिन्न रूप
यह लाइफ पॉलिसी प्लान एक खास अवधि के लिए होता है जो प्राय: अधिकतम 35 वर्ष तक जा सकता है।
 
ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस– जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह एक समूह के लिए होता है किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं- अर्थात् एम्प्लोयर्स या एसोसिएशनों के लिए जहां एक साथ कई लोगों को कवर किया जाता है। हर बीमा करने वाले के अपने नियम व शर्तें होती हैं- यथा उम्र का ब्रैकिट, कम से कम लोगों की संख्या एक गु्रप पॉलिसी के लिए, इत्यादि।
 
सीनियर लाइफ इंश्योरेंस- यद्यपि नाम से तो यह वरिष्ठों के लिए इंश्योरेंस इंगित करता है पर यह होता एक जनरल इंश्योरेंस प्लान ही है। फर्क सिर्फ यह है कि सारे बीमा करने वाले एक उम्र से ज्यादा लोगों के लिए इंश्योरेंस नहीं करवाने को राज़ी होते और यदि होते भी हैं तो वे काफी ज्यादा प्रीमियम की मांग करते हैं।
 
कई फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि एक टर्म प्लान सबसे अच्छा जीवन जीने का प्रकार है क्योंकि यह कम कीमत पर काफी बड़ा कवर प्रदान करता है। एक टर्म प्लान का प्रीमियम तुलनात्मक रुख से एक एन्डाउमेन्ट प्लान के प्रीमियम से या किसी मनीबैक पालिसी या किसी यूनिट-लिंक पॉलिसीज़ से काफी छोटा होता है जो उतनी ही कवरेज देते हैं जितने में यह देता है। इसका एक कारण यह है, दूसरों के मुकाबले, टर्म प्लान में कोई इन्वेस्टमेंट कंपोनेन्ट नहीं होता और पूरा प्रीमियम केवल रिस्क को कवर करने को ही समर्पित होता है।
 
 
सम्पूर्ण जीवन योजना- इसमें कोई परिपक्वता की तारीख नहीं होती और इंश्योरेंस पार्टी की मृत्यु के बाद रकम उसके निकट के रिश्तेदारों को दे दी जाती है।
 
यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स- यह जीवनबीमा और इक्विटी या डेट ओरिएंटेड म्यूचुअल फण्ड्स का संयुक्त रूप होता है।
 
एन्डाउमेन्ट प्लान्स- यह एक निवेश और टर्म लाइफ इंश्योरेंस का संयुक्त रूप है जो इस प्रकार तैयार किया जाता है कि पॉलिसी के खत्म होने पर एक आश्वस्त रकम दे दी जाए।
 
पेंशन प्लान्स- यह भविष्य को स्थायित्व देने के प्लान हैं और खासतौर पर बुढ़ापे के लिए होते हैं। हर प्लान की अपनी विशेषताएं होती हैं। सामान्यत: आप अपना प्रीमियम शिड्यूल के अनुसार ही देते हो जो 5, 10, 20 साल का हो सकता है और फिर एक निश्चित अवधि के बाद आपको हर महीने या हर तिमाही पर एक बंधी रकम मिलने लगती है जो पेंशन की भांति सारी जिन्दगी चलती है।
 
मनीबैक पॉलिसीज़- यह वह पॉलिसीज हैं जिनमें एक निश्चित अवधि के बाद आपको एक निर्धारित राशि प्राप्त होती है और आपकी मृत्यु के बाद सारी रकम आपके बेनीफिशरीज़ को दे दी जाती है।
 
चाइल्ड प्लान्स- यह प्लान्स इंश्योरेंस और निवेश के संयुक्त रूप से बनाए गए प्लान्स होते हैं जो उन मां-बाप के लिए होते हैं जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए प्लान्स बनाना चाहते हैं।
 
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