सीईओ- ‘की सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस ‘ 

वारंगल के एक गरीब परिवार में जन्मी ज्योति का बचपन संघर्षपूर्ण रहा लेकिन जोश और लगन के बलबूते पर आज ज्योति एक कंपनी ‘की सॉफ्टवेयर
सॉल्यूशंस की सीईओ हैं।

संघर्ष से डर नहीं
सोलह साल की उम्र में उनकी शादी 10 साल बड़े व्यक्ति से कर दी गई और वो दो बच्चियों की मां बनीं लेकिन आर्थिक परेशानियों से जूझती ज्योति ने हार नहीं मानी और कम आमदनी में ही प्रौढ शिक्षा अध्यापक के रूप में एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया।

खुद बनाई राह
बचपन से संघर्षों में पली ज्योति को पति की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला। 1992 में वारंगल से 70 किलोमीटर दूर एक स्कूल में स्पेशल टीचर की नौकरी मिली। उसके बाद स्थाई नौकरी मिली, जहां उन्हें मात्र 2750 रुपये मिलते थे। धीरे-धीरे आगे बढऩे की चाह ने ज्योति को हौसला दिया। इसी बीच उन्होंने अमेरिका में रहने वाली अपनी चचेरी बहन से प्रभावित होकर सॉफ्टवेयर कोर्स करने का फैसला किया ताकि वह अपना भविष्य अमेरिका में बना सकें। इसके बाद एक वक्त वो भी आया जब 2000 में वह स्वयं अमेरिका पहुंच गईं।

की सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस की शुरुआत

अमेरिका में उन्हें 60 डॉलर वाली एक नौकरी मिली और  फिर मिला सॉफ्टवेयर कंपनी बनाने का ऑफर। अंग्रेजी अच्छी नहीं होने की वजह से नौकरी कर पाना मुश्किल  था। तब एक बड़ा निर्णय लिया अपनी कंपनी शुरू करने का।

मदद के लिए हमेशा आगे
आज एक मुकाम हासिल कर चुकीं ज्योति अनाथ बच्चों के लिए काम करना चाहती हैं। इसके अलावा वे कई तरह की चैरिटी में भी हिस्सा ले रही हैं।

सफलता के मंत्र

  •  निर्भीक बनें।
  •  आत्मनिर्भर रहें।
  •  समझौता न करें।
  •  कुछ भी नामुमकिन नहीं।
  •  स्वयं को परिस्थिति के अनुरूप ढालें।
  •  आंख और कान खुले रखें।