Overview:
कई बार तो लोगों को यह पता ही नहीं चल पाता है कि आखिर पूरी सैलरी चली कहां जाती है। बिना फिजूलखर्ची के भी महीने के अंत में वे खाली हाथ रह जाते हैं।
Expense Journaling Benefits: महंगाई के इस दौर में समझदारी के साथ घर चलाना भी किसी कला से कम नहीं है। कई बार तो लोगों को यह पता ही नहीं चल पाता है कि आखिर पूरी सैलरी चली कहां जाती है। बिना फिजूलखर्ची के भी महीने के अंत में वे खाली हाथ रह जाते हैं। बचत हो नहीं पाती और खर्चे आगे से आगे तैयार रहते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है तो आज जानते बचत की शानदार ट्रिक।
एक छोटी ट्रिक है बड़े काम की

बचत की इस सीक्रेट ट्रिक का नाम है ‘एक्सपेंस जर्नलिंग’। इसका मतलब है अपने रोज के खर्चे को लिखना। यह आदत आज भले ही आपको अजीब और बेकार लगे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फिजूलखर्ची को काफी हद तक बचाया जा सकता है। ऐसा करने से न सिर्फ आप अपने खर्चों का सही हिसाब कर पाएंगे, बल्कि इससे बजट सुधारने में भी मदद मिलेगी। इससे आर्थिक सकारात्मकता बढ़ेगी।
हस्तियों, कंपनियों और लोगों की पसंद
ऐसा नहीं है कि एक्सपेंस जर्नलिंग कोई नई बात है। सदियों से हमारे पूर्वज यह करते आए हैं। पहले ही घर में यह चलन था। दुनियाभर की कई बड़ी हस्तियां इसे फॉलो करती हैं। इतना ही नहीं हर बड़ी और सफल कंपनी अपने एक्सपेंस को लिखकर ही मुनाफे का हिसाब लगाती है। दुनियाभर के लाखों लोग इस अच्छी आदत को फॉलो करते हैं। एक ब्रिटिश सर्वे में सामने आया कि दुनिया में 23 प्रतिशत लोग डायरी लिखते हैं। जिसमें वे पर्सनल बातों के साथ ही आर्थिक खर्च भी लिखते हैं।
ये हैं एक्सपेंस जर्नलिंग के फायदे
एक्सपेंस जर्नलिंग के फायदे आपकी सोच से कहीं ज्यादा हैं। यह आर्थिक मैनेजमेंट का एक सटीक तरीका है। आप चाहें तो खर्चे को लिखें या एप में सेव करें।
1. सही बजट बनाने में मददगार
एक्सपेंस जर्नलिंग से आप अपने खर्चों के बारे में सटीक जानकारी रख पाते हैं। जिससे बजट मैनेज रहता है और आप आमदनी का बेहतर तरीके से उपयोग कर पाते हैं। साथ ही फिजूलखर्ची का भी पता लग पाता है।
2. पहले शाह खर्च, बाद में उधार से बचाव
अधिकांश लोगों के साथ ऐसा होता है कि सैलरी आने के शुरुआती दिनों में वे खुलकर खर्च करते हैं। बिल चुकाने के साथ ही बाहर खाना, शॉपिंग, घूमना—फिरना और महीने के बाकी दिनों में तंगहाल हालत। एक्सपेंस जर्नलिंग आपको इससे बचाएगी। इससे आपको खर्चे की सटीक जानकारी रहेगी।
3. होगी फिजूलखर्ची की पहचान
अक्सर लोग यही सोचते हैं कि रुपए घर में ही तो खर्च हो रहे हैं। यह बात काफी हद तक सही भी है। लेकिन इस बीच हमारी फिजूलखर्ची भी बहुत होती है। जिसे अक्सर लोग पहचान नहीं पाते। जब आप उसे लिखते हैं तो आपको इसका पता लग पाता है।
4. सेविंग की शुरुआत
अपने खर्चों पर लगाम लगाकर आप सेविंग की आदत को बढ़ा सकते हैं। जब फिजूलखर्ची रुकेगी तो ऐसा करना आसान हो सकता है। इससे आपको फाइनेंशियल स्ट्रेस से भी राहत मिलेगी। भविष्य को लेकर आशंकाएं दूर होंगी।
इसलिए है काम की आदत
कुछ लोगों को एक्सपेंस जर्नलिंग बेकार की आदत लग सकती है। क्योंकि ऑनलाइन पेमेंट के दौर में वे इसे जरूरी नहीं मानते। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे दिमाग की बनावट ऐसी है कि जब हम कुछ लिखते हैं तो उसे बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। ये बातें हमें लंबे समय तक याद भी रहती हैं। ऐसे में खर्च लिखने से फाइनेंशियल बिहेवियर में सुधार होने लगता है। हालांकि शुरुआत में यह काम बोरिंग, मुश्किल और गैर जरूरी लग सकता है। लेकिन कुछ ही दिनों में इसका असर नजर आने लगेगा। इसलिए बड़ों के साथ छोटे-छोट खर्च भी लिखें।
