Summary: औली हिल स्टेशन: गर्मियों में भी बर्फ और एडवेंचर का मजा लेने की बेस्ट जगह
उत्तराखंड के उत्तराखंड में स्थित औली अपनी बर्फीली ढलानों, रोपवे और शानदार हिमालयी नजारों के लिए मशहूर समर डेस्टिनेशन है।
यहां स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और मिनी स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरती पर्यटकों को खास अनुभव देती है।
Auli Hill Station: गर्मियों के मौसम में अक्सर लोगों को ऐसी जगह पर घूमते हुए देखा जाता है। जहां उन्हें ठंडक का एहसास हो सके। यह समय छुट्टियों का होता है इसलिए अधिकतर लोग ट्रैवलिंग का प्लान भी इसी समय करते हैं। अधिकतर लोग इस समय हिल स्टेशंस पर जाना पसंद करते हैं। उत्तराखंड का औली भी एक ऐसे ही जगह है जो फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर प्रसिद्ध है।
उत्तराखंड को वैसे भी देवभूमि के नाम से पहचाना जाता है। यहां पर प्रकृति के जो अद्भुत नजारे हैं वह किसी को भी दीवाना बना सकते हैं। यहां एक या दो नहीं बल्कि कई सारे हिल स्टेशन है जो गर्मियों में पर्यटकों के भीड़ से गुलज़ार रहते हैं। यह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 290 किलोमीटर और ऋषिकेश से 252 किलोमीटर दूर है। अगर आपको गर्मियों में बर्फबारी का आनंद लेना है तो आप यहां जा सकते हैं।
मन मोह लेगी औली की सुंदरता
इस हिल स्टेशन पर आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ समर वेकेशन एंजॉय कर सकते हैं। अगर एक बार आप यहां पहुंच जाएंगे तो आपका वापस आने का मन ही नहीं करेगा क्योंकि यहां की खूबसूरत वादियां आपका दिल जीत लेगी। यहां स्नो एक्टिविटीज का आनंद भी उठाया जा सकता है।
यहां लें बर्फबारी और एक्टिविटीज का आनंद

गर्मियों के मौसम में भी औली पूरी तरह से बर्फ से भरा रहता है। आप यहां अपने पार्टनर दोस्तों और परिवार के साथ बर्फ से खेल सकते हैं, स्कीइंग का आनंद ले सकते हैं। यहां स्नोबोर्डिंग, स्नो मोटरबाइक, स्केटिंग और स्लेजिंग का आनंद लिया जा सकता है।
मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से मशहूर

औली को अपनी खूबसूरती की वजह से मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से पहचाना जाता है। दिल्ली से यहां की दूरी 519 किलोमीटर पड़ती है। जब आप यहां जाएंगे तो यहां बर्फ से ढके हुए पहाड़, हरे भरे पेड़ पौधे और आसपास के सुंदर नजारे आपका मन मोह लेंगे। यहां से कुछ ही दूरी पर बद्रीनाथ और फूलों की घाटी के प्रवेश द्वार के नाम से मशहूर जोशी मठ स्थित है।
यहां है 2500 साल पुराना पेड़
औली केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं बल्कि अपने 2500 साल पुराने पेड़ के लिए प्रसिद्ध है। इसे अमर कल्प वृक्ष के नाम से पहचाना जाता है। यहां पर आदि गुरु शंकराचार्य ने ज्ञान प्राप्त किया था।
देखें ये जगह
एशिया का दूसरा सबसे लंबा रोपवे: औली में आपको 4.15 किलोमीटर लंबा रोपवे देखने को मिलेगा। यह आने वाले पर्यटकों को समुद्र तल से 10000 तक की ऊंचाई पर ले जाता है। यह 22 किलोमीटर लंबा एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोपवे है।
त्रिशूल पर्वत: यहां समुद्र से 23,490 फीट की ऊंचाई पर त्रिशूल पर्वत भी मौजूद है। भगवान शिव के त्रिशूल के नाम पर इसका नाम रखा गया है। यहां एक रहस्यमय जलाशय और रूपकुंड झील भी मौजूद है।
नंदा देवी: यह भारत का सबसे ऊंचा पर्वत है जो 7817 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। इसे भारत के सबसे ऊंची हिल स्टेशन के तौर पर पहचाना जाता है। यहां नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान भी मौजूद है। यहां आप जैव विविधता से रूबरू हो सकते हैं।
आर्टिफिशियल झील: यह औली की एक बहुत ही पुरानी झील है जो काफी ऊंचाई पर मौजूद है। यह दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित झील में से एक है। इस काम बर्फबारी के महीने में ढलनों पर कृत्रिम बर्फ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था।
