Hindu Belief
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Sundarkand Path: सुंदरकांड, रामायण का पांचवां अध्याय, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह अध्याय भगवान हनुमान जी की वीरता, भक्ति और सीता जी के प्रति समर्पण का अद्भुत वर्णन करता है। यह माना जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में आने वाले कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सुंदरकांड का पाठ घर में नकारात्मक शक्तियों और बुरी आत्माओं से रक्षा करने के लिए भी किया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि सुंदरकांड का पाठ ग्रह-दोषों के निवारण में भी सहायक होता है।

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सुंदरकांड का पाठ मनोकामना पूर्ति के लिए भी किया जाता है। सुंदरकांड का पाठ मन को शांत करने और आत्मिक शांति प्राप्त करने में भी मददगार होता है। सुंदरकांड का पाठ अक्सर मंगलवार को किया जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान हनुमान जी को समर्पित होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुंदरकांड में सुंदर शब्द का क्या मतलब होता है, अगर नहीं तो आज हम आपको इस लेख के द्वारा विस्तार से बताएंगे कि आखिर क्यों सुंदरकांड में सुंदर शब्द का इस्तेमाल किया गया है और इस शब्द का क्या मतलब है।

रामायण में कुल 7 अध्याय हैं

रामायण, हिंदू धर्म का महाकाव्य, सात कांडों में विभाजित है, जिन्हें “सोपान” भी कहा जाता है।

  1. बालकांड: भगवान राम का जन्म, उनके बालपन की लीलाएं और शिक्षा-दीक्षा इस कांड में वर्णित हैं।
  2. अयोध्याकांड: राम का राज्याभिषेक, कैकेयी द्वारा राम के वनवास का षड्यंत्र, सीता हरण और राम का वनगमन इस कांड का विषय है।
  3. अरण्यकांड: राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास, ऋषियों से उनकी भेंट, रावण द्वारा सीता का अपहरण और जटायु-शर्पणखा युद्ध इस कांड में चित्रित हैं।
  4. किश्किंदा काण्ड :राम का वानरों से मित्रता, सुग्रीव-बाली युद्ध और हनुमान जी का सीता की खोज में लंका जाना इस कांड का मुख्य भाग है।
  5. सुंदरकांड: हनुमान जी का लंका दहन, सीता से मिलना और राम को संदेश देना इस कांड में वर्णित है।
  6. लंकाकांड: राम-रावण युद्ध, रावण के कुटुंबियों का वध, विभीषण का आत्मसमर्पण और रावण का वध इस कांड का मुख्य आकर्षण है।
  7. उत्तरकांड: राम का अयोध्या लौटना, सीता का अग्नि परीक्षा, लव-कुश का जन्म और राम का राज्य त्याग इस कांड में वर्णित हैं।

आखिर 5वें अध्याय का नाम सुंदरकांड क्यों है

रामायण के 7 कांडों में से एक, सुंदरकांड, हनुमान जी की वीरता और भक्ति के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका नाम “सुंदरकांड” क्यों रखा गया? कई मान्यताएं हैं जो इस नाम के पीछे का रहस्य बताती हैं। कथावाचक रसराज जी महाराज के अनुसार, पूरे सुंदरकांड में “सुंदर” शब्द का प्रयोग 8 बार होता है। जिस भूतल पर हनुमान जी ने लंका में छलांग लगाई, उसे “सुंदर” कहा जाता है। जब हनुमान जी सीता जी को राम जी की मुद्रिका दिखाते हैं, तो मुद्रिका पर लिखा राम नाम भी “सुंदर” कहकर संबोधित किया जाता है।

रावण ने जब सीता जी का अपहरण किया था उसके बाद, यह पहला मौका था जब सीता जी को सकारात्मक “सुंदर” संदेश मिला था। इस कांड में हनुमान जी सीता जी का दर्शन करते हैं, जो उनके लिए “सुंदर” अनुभव था। सीता जी को रावण के बंधन से मुक्त कराना और राम जी का संदेश देना भी “सुंदर” कार्य था। हनुमान जी द्वारा लंका का दहन एक “सुंदर” दृश्य था, जो रावण के अत्याचार का अंत दर्शाता है। लंका में “सुंदर” भवनों का दहन भी इस कांड का हिस्सा था। हनुमान जी की भक्ति, वीरता और आत्मविश्वास का प्रदर्शन इस कांड में “सुंदर” रूप से चित्रित किया गया है। हनुमान जी का साहस और राम जी के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है।
रसराज जी महाराज द्वारा बताए गए कुछ और कारण जो “सुंदरकांड” नाम को दर्शाते हैं। जब हनुमान जी लंका जाने के लिए समुद्र को लांघते हैं, तो समुद्र उनका मार्ग रोकने का प्रयास करता है। हनुमान जी अपने वीर पराक्रम से समुद्र को पराजित करते हैं और लंका पहुंचते हैं। इस प्रकार, हनुमान जी भयंकर और अभिमानी समुद्र का अभिमान चूर कर देते हैं, जो इस कांड को “सुंदर” बनाता है। एक कथा के अनुसार, रावण की लंका “त्रिकुटाचल” नामक तीन पर्वतों पर बनी थी। इनमें से “सुंदर” नामक पर्वत पर ही अशोक वाटिका थी, जहाँ माता सीता को बंदी बनाकर रखा गया था। इसी “सुंदर” पर्वत पर हनुमान जी और माता सीता की भेंट हुई थी, जो इस कांड को “सुंदर” बनाता है। हनुमान जी का सीता जी से मिलना और राम जी का संदेश देना इस कांड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भक्ति, मिलन और आशा का “सुंदर” दृश्य है। सीता जी को रावण के बंधन से मुक्ति का मार्ग भी इसी कांड में प्रशस्त होता है।

मैं आयुषी जैन हूं, एक अनुभवी कंटेंट राइटर, जिसने बीते 6 वर्षों में मीडिया इंडस्ट्री के हर पहलू को करीब से जाना और लिखा है। मैंने एम.ए. इन एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर्स किया है, और तभी से मेरी कलम ने वेब स्टोरीज़, ब्रांड...