Char Dham Yatra: पहाड़ों के प्रति विशेष आकर्षण रखते हैं और ईश्वर के लिए आपके मन में आस्था है तो चार धाम यात्रा का मन बना सकते हैं। रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। गर्मियों की छुट्टियों में पूरे परिवार के साथ बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा की जी सकती है।
हिं दू धर्म में चार धाम की यात्रा को बहुत ही शुभ माना जाता है। वेद-पुराणों में भी चार धाम की यात्रा का महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में इन चार धामों की यात्रा कर लेता है, वह
समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। ये चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा है। बता दे कि हिंदू धर्म में दो प्रकार के चार धाम की यात्रा होती है।
पहली चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल है। तो वहीं दूसरी चार धाम की यात्रा में बद्रीनाथ, जगन्नाथ, रामेश्वरम और द्वारका धाम की यात्रा शामिल है। देश के विभिन्न हिस्सों में ये पवित्र धाम स्थित हैं,
जहां दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। चार धाम की यात्रा के लिए हर साल तारीखों का ऐलान किया जाता है। चार धाम की यात्रा के तारीखों का ऐलान होने का बाद तीर्थयात्री को सबसे पहले इसके लिए पंजीकरण या रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है, इसके बाद ही आप चार धाम यात्रा कर सकते हैं। वहीं इस साल सरकार
की ओर से कई तरह की नई व्यवस्थाएं भी चार धाम की यात्रा के लिए लागू की गई हैं, जिससे कि यह पवित्र धार्मिक यात्रा तीर्थ यात्रियों के लिए सुखद और सरल बन सके। जैसे कि चार धाम यात्रा से पहले एक महीने तक किसी तरह की वीआईपी दर्शन की इजाजत नहीं होगी। सभी श्रद्धालु को सामान्य प्रक्रिया से ही
दर्शन करने होंगे।
चार धाम यात्रा की तारीखों का हुआ ऐलान, ऐसे करें पंजीकरण

हर वर्ष की तरह इस साल भी चार धाम की यात्रा की जाएगी। इसके लिए तारीखों की घोषणा कर दी गई है। बता दें कि 30 अप्रैल 2025 से चार धाम की यात्रा की शुरुआत होने वाली है। इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोले जाएंगे। वहीं 2 मई 2025 को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलेंगे। इसके बाद बद्रीनाथ के दर्शन 4 मई 2025 से होंगे। उत्तराखंड में स्थित इन चार धामों के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। 6 महीने तक इन चार धाम की यात्रा चलती है और इसके बाद फिर से मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
अगर आप ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन काउंटर में जाकर करवा सकते हैं। मार्ग पर विभिन्न स्थानों जैसे- हरिद्वार, ऋषिकेश, बड़कोट, सोनप्रयाग और पांडुकेश्वर में स्थित निर्दिष्ट ऑफलाइन पंजीकरण काउंटरों पर जा सकते हैं। ऑफलाइन पंजीकरण के लिए यात्रियों को फोटो, आईडी प्रूफ और
मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी।
चार धाम की यात्रा का धार्मिक महत्व
चार धाम की यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यमुनोत्री से चार धाम यात्रा की शुरुआत करने से बिना किसी बाधा यात्रा पूर्ण होती है। इसके बाद गंगोत्री धाम की यात्रा शुरू होती है, जोकि
मां गंगा को समॢपत मंदिर है। इस यात्रा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होती है। केदारनाथ शिव के 12 ज्योतिॄलगों में एक है। केदारनाथ के दर्शन से शिवजी की कृपा मिलती है। चार धाम यात्रा का चौथा और अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है। बद्रीनाथ के दर्शन के बाद चार धाम यात्रा का समापन होता है।
चार धाम यात्रा कौन-कौन सी हैं

चार धाम की यात्रा के बारे में तो हम सभी सुनते हैं। लेकिन अधिकतर लोगों को यह मालूम नहीं होता ये चारों धाम कौन-कौन से हैं और कहां हैं। बता दें कि हिंदू धर्म में दो तरह के चार धाम की यात्रा है। पहली चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल है। ये चारों धाम उत्तराखंड में ही हैं। इसलिए आप इसे एक ही धाम की यात्रा भी कह सकते हैं। इसके अलावा दूसरी चार धाम की यात्रा में बद्रीनाथ, जगन्नाथ, रामेश्वरम और द्वारका धाम की यात्रा शामिल है। ये पवित्र चार धाम एक ही स्थान पर न होकर देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं, जहां दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। हिमालय के शिखर पर बद्रीनाथ मंदिर स्थित है। ओडिशा राज्य में समुद्र के तट पर जगन्नाथपुरी है। यह धाम भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र किनारे ‘रामेश्वरम’ तीसरा धाम है। वहीं गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे पवित्र पुरियों में एक धाम ‘द्वारका’ भी है।
चार मठ और चार धाम का परस्पर संबंध
1. चार मठों की स्थापना का उद्देश्य वैदिक ज्ञान और अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को बनाए रखना था।
2. चार धाम यात्रा का उद्देश्य भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन देना है।
3. इन दोनों की स्थापना आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी, जिससे सनातन धर्म की अखंडता बनी रहे। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ और चार धाम यात्रा हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। चार मठ वेदों की शिक्षा और धर्म के प्रचार का कार्य करते हैं, जबकि चार धाम तीर्थ यात्रा के माध्यम से आध्यात्मिक उत्थान और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं।
भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा में इनका अत्यधिक महत्व है और ये सनातन धर्म को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन स्थलों की यात्रा करने से व्यक्ति केवल धर्म का पालन ही नहीं करता, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी अग्रसर होता है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन होगी रिजिस्ट्रेशन
चार धाम यात्रा की शुरुआत भले ही 30 अप्रैल से होगी, हालांकि पंजीकरण या रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 20 मार्च से ही शुरू हो गई है। यात्रा के लिए 60 प्रतिशत पंजीकरण ऑनलाइन और 40 प्रतिशत ऑफलाइन होंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आप उत्तराखंड चार धाम यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट Https://registrationand- touristcare .uk.gov.in/. कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए
आपको फोटो अपलोड करनी होगी और आइडी प्रूफ (आधार कार्ड), सबमिट करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद
यात्रा पास मिलेगा, जिसे आपको यात्रा के दौरान अपने साथ रखना होगा।
