विजयादशमी का पर्व श्री राम एं रावण के माध्यम से प्रदूषित चेतना पर विजय का पर्व है। त्रेता युग में श्री राम ने शारदीप नवरात्र में मां भगवती की पूजा अर्चना करके अन्ततः अश्विनी शुक्ल दशमी को रावण का वध करके विजय पाई थी। इसलिए यह विधि संदेश मिलता है कि असत्य चाहे जितना भी बलवान क्यों न हो एक न एक दिन उसे हारना पड़ता ही है अर्थात् सत्य की असत्य पर अधर्म की धर्म पर, दुगुर्णों की सदाचार पर विजय अवश्य होती है रावण राज्य आतंक, अनाचार, शोषण तथा अत्याचार का प्रतीक है। तथ मर्यादा पुरूषोतम राम सत्य, समर्पण और सेना मार्ग पर चलते हुए उन्होंने अपनी लड़ाई में जनमानस को जोड़ा। रावण को दशानन कहा गया क्योंकि उनके यह दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक है।

विजयादशमी के दिन हम रावण का पुतला जलाकर बाह्य रावण को तो दहन कर देते हैं परन्तु अपने अंदर बैठे अनगिनत रावण को बाहर निकाल फंेकने का संकल्प नहीं लेते। यह रावण हैं कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार एवं यौन हिंसा, नशा, गंदगी, भ्रष्टाचार अशिक्षा, अंधविश्वास, मिलावट, कुपोषण-गरीबी व भुखमरी तथा महिला अपराध आदि। जब तक हम लोग इन बुराइयों के खत्म करने के भाव को आत्मसात नहीं करेंगें तब तक असली विजयादशमी पर्व मनाना सार्थक नहीं होगा। यदि हम ऐसा करने में सफल हो गए तो हमारा देश विश्व शक्ति बन सकता है। जब यह बुराइंया विदा होंगी, सच का परचम लहरायेगा तो यकीनन रामराज्य आ जाएगा।

शिरडी के साईं बाबा का महाप्रयाण भी इसी दिन हुआ था इसलिए यह विधि साईंबाबा का महासमाधि दिवस भी बन गई हैं।

लें आज प्रण, खत्म करें यह रावण
घोर कलियुग के इस दौर में बुराइयों का दशानन अट्टहास कर रहा है। इसने निम्नलिखित दस प्रमुख बुराइयों का मुखौटा ओढ़ ररख है। अब वह समय आ गया है जब इनको जड़ से उखाड़ फेंका जाए और रामराज्य की स्थापना की जाए।

कन्या भू्रण हत्या- लिंग भेदी अन्याय का राक्षस अदृश्य रहकर भी हमें लहूलुहान कर रहा है। वैसे तो हमारे देश में स्त्री को देवी के रूप में पूजा जाता है परन्तु आज बालिकाओं के गिरने ग्राफ से हमें चेतना होगा। बेटियां आज भी परिवारों में बोझ बनी हुई हैं। दहेज रूपी दानव के कारण बहुत सी कन्या भ्रूण हत्याएं गर्म में ही करां दी जाती हैं। इसे रोकने के लिये बनाये गये सख्त कानून भी नाकामयाब हो रहे हैं। गली-गली में खुले अल्ट्रासाउंड और पैथोलाॅजी सेंटरों में लिंग की जांच के बाद कन्या भ्रूण हत्या का सिलसिला अनवरन जारी है।
बलात्कार, यौन हिंसा व महिला अपराध-महिलाओं के साथ-साथ छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं । यह बलात्कारी अधिकतर कोई और नहीं बल्कि उसने ही रिश्तेदार या आस-पड़ौस के लोग होते हैं। जो शराफत का नकाब ओढ़े ऐसी घिनौनी हरकतों को अंजाम देते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर या वधू वध दहेज के कारण हो यह महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध न केवल देश की यदि खराब कर रहे हैं बल्कि आबादी के आधे हिस्से को उसके मौलिक अधिकारों से भी वंचित रखते हैं।

महिलाओं पर होने वाले अपराध आधुनिक रावण द्वारा हो रहे हैं। ये आधुनिक रावण बाइक ले चलते हैं, स्टाइलिश ऐनक लगाते हैं और मौका मिलते हैं महिलाओं के पर्स, चेन व बालियां छीनकर रफूचक्कर हो जाते हैं साथ ही साथ छेड़खानी व अश्लील हरकतें भी करते हैं, शहर का पोश इलाका हो या भीड़-भाड़ वाली जगह ये लोग महिलाओं के साथ छेड़खानी, छिनौती आदि अपराध करने से गुरेज नहीं करते।

3. नशा – पश्चिमी देशों की तर्ज पर आज हमारे देश में भी नशे की लत बच्चों से लेकर युवाओं तक में बढ़ती जा रही है। शराब गांजा मांग ही नहीं कफ सीख तक का नशा किया जा रहा है । नशा युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है और हम उसे बर्बाद होते देख रहे हैं। एक बार मौजमस्ती के लिए किया गया नशा धीरे से कब आदत में शुमार हो जाता है। पता ही नहीं चलता। सरकार द्वारा नशा मुक्ति केन्द्र तथा जगह जगह नशा रोकने के अभियान भी चलाए जा रहे हैं परन्तु जब तक हम खुद इसे छोड़ने के लिए अपनी बिल पावर मजबूत नहीं करेंगे तब तक इससे बच पाना असम्भव है। मार्ग दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह शराब पीकर वाहन चलाना है जिससे अनेक परिवार संकटग्रस्त हो रहे हैं। अब बढ़ती नशाखोरी को रोकना ही होगा।

गंदगी- हर शहर में गंदगी नासूर बनती जा रही है। संसाधनों की कमी, लोगांे में सिविक सेंस का अमान तथा नगर-निगम प्रशासन के लचर रवैये के कारण कूड़ा गलियों व सड़कों पर बिखरा पड़ा रहता है और कई दिनों तक कूड़ा उठने से बदबू व गंदगी के कारण उसके आसपास रहना या वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है जो कि बीमारियों की जड़ है।

अशिक्षा-अशिक्षा रूपी रावण आज भी देश में मौजूद है। 23प्रतिशत बच्चे अशिक्षित है वहीं 41प्रतिशत लड़कियां अशिक्षित हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा है। स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी चीजोें का अभाव है। यह थोड़ा खुशी का विषया है कि पहले की अपेक्षा आज साक्षरता बढ़ी है। जहाॅं 1947 में यह 18प्रतिशत थी वहीं अब यह 75 प्रतिशत हो गई है (2011 में) । पुरूषों के मुकाबले स्त्रियांे में साक्षरता अभी भी कम है पुरूषों में 32 प्रतिशत है। तो स्त्रियों में 65 प्रतिशत लगभग है। गावों में आज भी लोग लड़कियों को पढ़ने नहीं देते हैं। जब तक हम समाज में बैठे इस अशिक्षा रूपी रावण का संहार नहीं करेंगे तब तक देश तरक्की नहीं कर सकता।

भ्रष्टाचार-देश को भ्रष्टाचार नामक सबसे बड़े राक्षस ने त्रस्त कर रखा है। धरातल से शिखर तक इसकी मौजूदगी सर्वत्र दिखाई पढ़ती है।कहीं लाखों करोड़ों तो कहीं इसका रूप सूक्ष्म जीवाणु सरीखा होता है। देश में यह कैंसर की तरह दिन दूनी रात चैगुनी गति से फैलता जा रहा है। इससे पहले कि यह लाइलाज हो जाए इसका खात्मा करना अति आवश्यक हो गया है। आलम यह है कि अपने हक के काम करवाने के लिए भी अफसरों, क्लर्कों की जेबें गर्म करनी पड़ती हैं। भ्रष्टाचारी व्यक्तियों का सामाजिक बहिष्कार करके ह इस दानव पर विजय पाना सम्भव है तभी हमारी कोशिश रंग लाएगी।

7 कुपोषण-गरीबी-भुखमरी- देश में इन तीनों समस्याओं का होना राष्ट््रीय शर्म की बात है। यह समस्याएं नरभक्षी राक्षस जैसी हैं जो भावी पीढ़ी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से पंगु बना रही हैं। गरीबी के कारण भुखमरी की समस्या और भ्ुाखमरी के कारण कुपोषण देश की गंभीर समस्या है। बच्चे कुपोषण के अधिक शिकार होते हैं कुपोषण के कई कारण है खानपान के पोषक पदार्थों के अभाव के कारण लोग डायरिया , मलेरिया न्यूमोनिया, टीवी जैसी संक्रमणकारी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं लेकिन गरीबी महिलाओं की खराब दशा, खुले में शौच करने वालों की बड़ी संख्या और स्वच्छ पेयजल की कमी जैसे सामाजिक कारक भी हैं इसे प्रभावित करते हैं । इन समस्याओं से निजात पाने के लिए महिलाओं का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है।

8. मिलावट –थोडे़ से मुनाफे के लिए कुछ लोग दूसरों की जिदंगी दावं पर लगाने के लिए कुछ लोग दूसरों की जिदंगी दाव पर लगाने के लिए बाज नहीं आते खाने की हर चीज मिलावटी है। यहां तक जीवन रक्षक दवाये भी नकली आ रही है। मिलावटी खाद्य सामग्री के कारण लोग नाना प्रकार की जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। जब तक मिलावट खोरों को कड़ी सजाएं नहीं मिलेंगी तब तक मिलावट रूपी राक्षस अपना खेल खेलता रहेगा।

तो आइये इस विजयादशमी पर्व पर हम सब विषले बन चुकी इन सब बुराइयों को जड़ से मिटाने का संकल्प लें तभी हमारा यह महापर्व मनाना सार्थक होगा। विजयादशमी की शुभकामनाओं के साथ।

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश