मालिश और स्नान से नवजात को बनाएं स्वस्थ और सुरक्षित: Benefits of Massage
Benefits of Massage

Benefits of Massage: मां बनना बेहद खास और सुखद अहसास है। बच्चे के घर में आने से मां की दुनिया ही बदल जाती है। लेकिन इस बदलाव के साथ मां पर नन्हे शिशु की ढेर सारी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां भी आती हैं। नन्हे शिशु की सही देखभाल के साथ उसकी मालिश और स्नान कराना अपने आप में एक खास अनुभव है… बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर उन्हें हर मुसीबत से बचाया जा सकता है।

खासकर उनकी मालिश और नहलाने को लेकर खासी सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही नन्हे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है, उसकी सही देखभाल और लालन पालन में सावधानी उसे मजबूत बनाती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडिएट्रिक्स बच्चे को नहलाने के लिए ऐसी पद्धति की सलाह देती है, जो बच्चे की विभिन्न इंद्रियों के विकास में भी सहयोग करे। साथ ही नन्हे बच्चे के लिए मालिश और स्नान को आरामदायक और सुकूनभरा अहसास बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। नहलाने के दौरान बच्चे से ज्यादा से ज्यादा बातचीत की जानी चाहिए।

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बच्चा चूंकि मां की गर्भ में बंधा हुआ सा होता है अत: उसकी जोड़ों को खोलने के लिए और हड्डियों की मजबूती के लिए मालिश सबसे अहम है। अक्सर लोग मालिश के लिए दाई पर निर्भर रहते हैं पर कोशिश यही करें कि बच्चे के मालिश कोई रिश्तेदार जैसे दादी, नानी, बुआ या फिर मां ही करे। मां के हाथों का प्यार भरा स्पर्श बच्चे को सुरक्षा का अहसास दिलाता है। रोजाना बच्चे को नहलाने से पहले उसकी मालिश जरूर करनी चाहिए। मालिश से न केवल बच्चे के शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है बल्कि उसके शरीर की कसरत भी होती है।

BENEFITS OF MASSAGE
Massage Tricks

बच्चे की मालिश के लिए बेबी ऑयल, सरसों या जैतून के तेल का चुनाव करें। मालिश करने का सबसे सही तरीका यह है कि आप जिस कमरे में बच्चे की मालिश करने जा रही हैं, उसकी खिड़किया और दरवाजे अच्छी तरह बंद कर दें ताकि बाहर की हवा बच्चे को प्रभावित न करे। फिर आप अपने पैर फैलाकर बच्चे को अपने दोनों पैरों के बीच लिटाएं और अपने हाथों में तेल लगा कर बच्चे की मालिश शुरू करें। मालिश की शुरुआत हमेशा बच्चे के पैरों से करें। फिर हल्के हाथों से उसके पेट और छाती की मालिश करें। उसके बाद बच्चे को पेट के बल उलटा लिटाकर उसकी पीठ और कमर की मालिश करें और सबसे अंत में बच्चे के सिर की मालिश करें।

मालिश से बच्चे की मांसपेशियों को व्यायाम व विश्राम मिलता है और बच्चा तनाव-थकान मुक्त होकर आराम की नींद सोता है। मालिश करते समय सावधानी बरतें कि हाथ कोमलता से चलें और बच्चों के नाजुक अंगों को झटका न लगे।

मालिश के कुछ समय बाद बच्चे को स्नान करवाएं। मालिश के बाद नहलाने से बच्चे की त्वचा स्वस्थ होती है। सबसे पहले सभी आवश्यक सामान जैसे बेबी शैंपू, बेबी सोप, टावेल आदि अपने पास पहले ही रख लें ताकि आपको बीच में उठना न पड़े। बच्चे को नहलाते समय आपकी यही कोशिश होनी चाहिए कि वह पानी से डरने की बजाय स्नान में आनंद व प्रसन्नता का अनुभव करे। नवजात शिशुओं को स्पॉन्ज स्नान की तुलना में टब में नहलाने पर ज्यादा आनंद मिलता है और वे ताजगी और चुस्ती-फुर्ती महसूस करते हैं। बच्चे को खुशबूदार स्नान करवाते समय मां भी सुकून और खुशी महसूस करती है।

स्नान का समय बच्चे और मां दोनों के लिए दिन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। यही वह समय है जब केवल वे ही दोनों साथ होते हैं इसलिए इस समय का भरपूर लाभ उठाएं। बच्चे की आंखों में देखें, उसे निहारें, दुलारें, उसकी नन्ही नाजुक उंगलियों को छुएं, उससे बातें करें। आपके स्पर्श से बच्चे और आपके बीच का संबंध और मजबूत होगा।

स्नान को आप अपने बच्चे के लिए बहुत सी बातें सीखने का समय बना सकती हैं। बच्चे को नहलाते समय उसके साथ खेलें और साथ ही उसे बताएं कि आप क्या कर रहे हैं। टब में आप उसके पसंदीदा खिलौने डाल दें। खिलौनों को छूकर, हाथ में लेकर वह नई चीजों की समझ विकसित करेगा।

मां की आवाज का बच्चे की शुरुआती सीख, समझ और भाषा के विकास में बेहद महत्वपूर्ण योगदान होता है। मां की आवाज और लोरी बच्चे के आहार संबंधी व्यवहार में भी बेहद सुधार करती है। ऐसे नवजात शिशु जो अपनी मां की आवाज ज्यादा सुनते हैं, उनके दिमाग के उस हिस्से में अधिक सक्रियता देखी गई जहां भाषा का विकास होता है।

स्नान के समय को मजेदार बनाने के साथ ही बच्चे की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। नहलाते समय बच्चे को एक पल के लिए भी अकेला न छोड़े। स्नान से पहले ही सभी जरूरी चीजें जैसे बच्चे को लपेटने के लिए तौलिया, साबुन आदि पास में रख लें। उसके बाद ही बच्चे को लेकर आएं। पानी के तापमान का भी पूरा घ्यान रखें कि वह ज्यादा गर्म या ठंडा न हो। नवजात बच्चों की आंखें साधारण शैंपू लगने से प्रतिक्रिया स्वरूप बंद नहीं होती इसलिए बच्चे को नहलाने के लिए उनके लिए बने खास बेबी सोप और बालों को धोने के लिए कोमल और खास बने बेबी शैंपू का ही प्रयोग करें ताकि उनकी आंखों में आंसू न आएं। नहलाने के बाद हल्के हाथों से थपथपाते हुए बच्चे के शरीर को पोंछें और नमी को बनाए रखने के लिए बच्चे के पूरे शरीर पर बेबी लोशन अवश्य लगाएं।

नहलाते समय ही नहीं उसके तुरंत बाद का समय भी बच्चे के साथ जुड़ने के लिए बेहद उपयोगी होता है। नहलाने के बाद बच्चे को अपने साथ चिपटाएं। उससे पूछें कि क्या उसे स्नान में मजा आया। उसकी खुशी को सराहें और उसे पुचकारें। इस प्रकार बच्चे के स्नान का यह नियमित रिचुअल केवल उसकी साफ-सफाई के लिए ही नहीं, उसके संपूर्ण विकास के लिए एक मजेदार और महत्वपूर्ण समय बन जाएगा।

  • नवजात बच्चे की आंखों और चेहरे को साफ करने के लिए हल्के गीले रुई के टुकड़ों का इस्तेमाल करें।
  • नवजात के नाजुक अंगों की रोजाना सफाई आवश्यक है।
  • बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स, अंडर ऑर्म्स और गर्दन की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • बच्चे के कान और नाक की सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल मुलायम सूती कपड़े के कोने से बच्चे के कान का बाहरी हिस्सा साफ करना चाहिए।