Bel Patra : महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व तो है ही इसके साथ ही पूरे साल शिवजी की पूजा के लिए उनकी प्रिय चीजों को उन्हें अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि भोलेनाथ को उनकी प्रिय चीजें चढ़ाने से भगवान खुश होते हैं। भगवान शिव की पूजा में बहुत सारी चीजें चढ़ाई जाती हैं लेकिन सबसे ज्यादा महत्व बेलपत्र का होता है और फलों में बेर को विशेष महत्व दिया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ‘शिवलिंग की पूजा में बेल के पेड़ की पत्तियों का बहुत ही अधिक महत्व है। स्कंदपुराण में बिल्वपत्र के महत्व के बारे में बताया गया है कि यदि बेलपत्र के साथ शिवलिंग की पूजा की जाए तो सभी पापों का नाश होता है। इस पेड़ की पत्तियां एक साथ 3 की संख्या में जुड़ी होती हैं और इसे 1 ही पत्ती माना जाता है। शास्त्रों में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने का महत्व बताया गया है। चलिए आपको इस लेख में बताते हैं क्यों भगवान शिव को अर्पित किया जाता है बिल्वपत्र और बेर…

इसके पीछे एक धार्मिक कथा है, जिसके अनुसार एक बार माता पार्वती को बहुत पसीना आ रहा था। तब उन्होंने अपनी उंगलियों से माथे के पसीने को साफ किया। इससे पसीने की कुछ बूंदे मदार पर्वत पर जा गिरी और उन्हीं बूंदों से बेल का पेड़ उत्पन्न हुआ। माना जाता है कि बेलपत्र बहुत ही पवित्र होता है। इसमें मां पार्वती के कई रूपों का वास है। इस वृक्ष की जड़ों में माँ गिरिजा, तने में मां महेश्वरी, इसकी शाखाओं में मां दक्षायनी, बिल्वपत्र की पत्तियों में मां पार्वती, इसके फूलों में मां गौरी और बेल पत्र के फलों में मां कात्यायनी का वास हैं। इसके साथ ही इसमें माता लक्ष्मी का भी वास होता है। इसलिए भगवान शिव की पूजा के लिए बिल्वपत्र को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी तरह बेर का फल भगवान शिव को अर्पण किया जाता है और सभी शिव मंदिरों में विशेषकर महाशिवरात्रि के समय इसे बेल के समान ही महत्व दिया जाता है।
