Overview: 10 से 18 जनवरी 2026 तक भारत मंडपम में लौट रहा है किताबों से जुड़ने
दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 सिर्फ किताबों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और संस्कृति का उत्सव है। यहाँ आप नई किताबें खोज सकते हैं, लेखकों से मिल सकते हैं, बच्चों के लिए सीखने के नए रास्ते खोल सकते हैं और दुनिया भर की संस्कृतियों को एक ही जगह महसूस कर सकते हैं।
जनवरी 2026 में यह मेला हर उस व्यक्ति के लिए एक यादगार अनुभव होगा, जो पढ़ने, सोचने और सीखने से प्यार करता है। किताबों के इस महाकुंभ का हिस्सा बनना सचमुच एक खास अनुभव है।
Delhi World Book Fair 2026: नई दिल्ली, 10 से 18 जनवरी 2026 — अगर आपको किताबों की दुनिया से प्यार है, कहानियों में रमने और नए विचारों से जुड़ने का शौक है, तो जनवरी 2026 में होने वाला दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (NDWBF 2026) आपके लिए एक शानदार अवसर है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाला यह मेला दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला है जहाँ विचारों, कहानियों और संस्कृतियों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यह केवल किताबें खरीदने-बेचने का ही नहीं, बल्कि एक पूर्ण सांस्कृतिक और बौद्धिक उत्सव है।
पुस्तक मेलों का इतिहास

पुस्तक मेलों की परंपरा काफी पुरानी है। पहला पुस्तक मेला 1462 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में आयोजित किया गया था। यह वह दौर था जब गुटेनबर्ग ने मुद्रणयंत्र का आविष्कार किया था और किताबें आम लोगों तक पहुँचने लगी थीं। आज, फ्रैंकफर्ट बुक फेयर दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाशन व्यावसायिक मेला है, जहाँ दुनिया भर के 80% कॉपीराइट समझौतों पर बातचीत होती है।
वैश्विक स्तर पर पुस्तक मेले मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
व्यावसायिक मेले: जैसे फ्रैंकफर्ट बुक फेयर, जो प्रकाशकों, एजेंटों और व्यापारियों के लिए होते हैं।
लोकप्रिय मेले: जैसे मैड्रिड बुक फेयर, जो आम पाठकों के लिए खुले होते हैं और जहाँ लेखकों से मिलना, किताबें खरीदना और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखना होता है।
संयुक्त मॉडल: जैसे ग्वाडालाजारा (मैक्सिको) अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला, जहाँ व्यावसायिक और लोकप्रिय, दोनों ही पहलू शामिल होते हैं।
दिल्ली विश्व पुस्तक मेला एक संयुक्त मॉडल को बखूबी प्रस्तुत करता है, जहाँ व्यापार और उत्सव दोनों का सम्मिश्रण है।
दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026: क्या है खास

53वें संस्करण में आयोजित हो रहा यह मेला शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा आयोजित किया जाता है। भारत दुनिया में प्रकाशन के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है, और यह मेला इस बढ़ते उद्योग की झलक प्रस्तुत करता है।
इस बार के मेले की प्रमुख विशेषताएं
विशाल पैमाना: हॉल नंबर 2 से 6 तक फैला यह मेला 11:00 बजे सुबह से 8:00 बजे शाम तक खुला रहेगा। यहाँ हज़ारों स्टॉल, प्रकाशक और लाखों आगंतुक होने की उम्मीद है।
राइट्स एक्सचेंज फोरम (12-13 जनवरी): यह एक अनूठा B2B मंच है, जहाँ भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशक एक साथ बैठकर किताबों के अनुवाद और वितरण अधिकारों पर चर्चा करते हैं। यह विभिन्न भाषाओं के साहित्य को एक-दूसरे तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण जरिया है।
अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी: दुनिया भर के प्रकाशक, दूतावास और सांस्कृतिक केंद्र यहाँ पुस्तक विमोचन, कार्यशालाएँ और साहित्यिक संवाद आयोजित करते हैं।
सीईओ स्पीक: प्रकाशन जगत के शीर्ष नेताओं के लिए एक विशेष ब्रेकफास्ट कॉन्फ्रेंस, जहाँ भारतीय और वैश्विक पुस्तक व्यापार पर विचारों का आदान-प्रदान होता है।
पाठकों और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र
यह मेला सिर्फ व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उम्र के पाठक और पूरे परिवार के लिए एक रंगारंग अनुभव लेकर आया है।
बच्चों का मंडप: यहाँ कहानी सुनाने के सत्र, कार्यशालाएँ, प्रतियोगिताएँ और लेखकों से सीधा संवाद होगा। यह बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने का शानदार तरीका है।
लेखक मंच और लेखक कॉर्नर: ये विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए मंच विमर्श, पैनल चर्चा और पुस्तक विमोचन का केंद्र बनेंगे। यह आम पाठकों के लिए अपने पसंदीदा लेखकों से रूबरू होने और उनकी रचना-प्रक्रिया को समझने का सुनहरी मौका है।
थीम पवेलियन: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन द्वारा तैयार यह पवेलियन कलात्मक प्रदर्शनियों, ग्राफिक्स और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से मेले की थीम को जीवंत करेगा।
उत्सवों का उत्सव: यह एक ऐसा आयोजन है जो भारत भर के 100 से अधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सवों को एक ही छत के नीचे लाता है। 32 से अधिक सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम: मेले का माहौल और भी जीवंत बनाने के लिए संगीत बैंड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी, जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही प्रतिभागियों को आकर्षित करती हैं।
“अतिथि देश” की परंपरा: एक संस्कृति की झलक
दुनिया के बड़े पुस्तक मेले अक्सर किसी एक देश या क्षेत्र को ‘अतिथि देश’ के रूप में आमंत्रित करते हैं। इसका उद्देश्य उस देश की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच प्रदान करना होता है। लेखक, कलाकार और प्रकाशक अपनी संस्कृति के दूत बनते हैं। उदाहरण के लिए, 2022 के फ्रैंकफर्ट मेले में अतिथि देश स्पेन था। ऐसे मौकों पर अनुवाद अनुदान भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो विभिन्न भाषाओं के साहित्य को दुनिया तक पहुँचाने में मदद करते हैं। दिल्ली मेले में भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी गतिविधियों और सहयोग के अवसर मौजूद रहते हैं।
आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारी
तिथि: 10 से 18 जनवरी, 2026
स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली
समय: प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
संपर्क: राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत
