नया साल… नयी उम्मीदें… नए सपने और नए संकल्प। उम्मीदों का अनन्त आकाश, आकाश में छितराया हुआ इंद्रधनुष। कितनी अनूठी लगती है उन रंगों की छटा। नया वर्ष इसी तरह हमारे जीवन में विविध रंगों की रंगोली सजाता है। शायद यही वजह है कि हर कोई उसका स्वागत उत्सुकता और खुले दिल से करता है। अनगिनत हसरतें, अनगिनत सपने पूरे हो जाने के द्वार खुल जाते हैं। नए वर्ष के साथ नए संकल्प किए जाते हैं। उगते सूरज की पहली किरण यह विश्वास जो देती है कि आने वाला वर्ष हर तरह से मंगलमय और खुशियों से भरा होगा।
नए साल का संकल्प
नए साल के आगमन के साथ ही प्रति वर्ष संकल्प लेने का दौर चलता है और इसमें सबसे आगे रहता है हमारा युवा वर्ग। न्यू इयर रेजोल्यूशन के रूप में युवक-युवतियां अजीबो-गरीब संकल्प लेते हैं। कुछ इन वायदों को पूरा करते हैं तो कुछ चंद दिनों में ही पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं। युवा पीढी जोश में आकर ये कसमें खाती क्यों है? इस सम्बन्ध में मनोविज्ञान की व्याख्याता, स्नेहा शर्मा का कहना है, ‘युवा वर्ग नए साल को एक पड़ाव के रूप में देखता है। चाहता है कि अच्छी शुरुआत हो, पिछले साल की गलतियों से छुटकारा पाना चाहते हैं।’ ऐसे में क्या यह बेहतर नहीं कि संकल्पों की गठरियां जोडऩे के बजाय बीते वर्ष की गलतियों का मूल्यांकन किया जाए।

रिश्तों की गरमाहट
न्यू इंडिया एश्योरेंस कम्पनी में सहायक प्रशासनिक अधिकारी मीना बोली, ‘मैं अपने सगे सम्बन्धियों, दोस्तों को ई-मेल द्वारा सम्पर्क करके रिश्तों की गरमाहट बढ़ाना चाहूंगी। उन लोगों को धन्यवाद भी दूंगी जो मेरा मार्गदर्शन करते रहते हैं।’ केनरा बैंक में ऑफिसर, प्रवीण रहेजा कहती हैं, ‘ये संकल्प पूरे तो होते नहीं, फिर लेने का क्या फायदा। 10-11 घंटे मगज खपा कर घर आते हैं तो संकल्प पूरे करने का जोश ही कहां बचता है।’ दिल्ली में सीए विवेक भी इससे सहमत हैं, ‘संकल्प पूरा करने की रौ में ढेर सारी बन्दिशें लगाना मुझे पसन्द नहीं, दिमाग में फीड प्राथमिकता सूची के कामों को अंजाम देने की ईमानदार कोशिश बनी रहे, बस यही चाहूंगा।‘
अहम सवाल
बहरहाल, नए साल की इस परम्परा के संबंध में अहम् सवाल यह है कि क्या वास्तव में इस प्रकार के संकल्पों का कोई फायदा है। मनोवैज्ञानिकों का जवाब है कि संकल्प लेना कुल मिलाकर फायदे का ही सौदा है क्योंकि नए साल के मौके पर उत्साह से लबालब लोग सकारात्मक संकल्प लेते हैं जो उनमें कुछ समय के लिए ही सही, नई ऊर्जा तो भरता ही है। केंद्रीय विद्यालय की अध्यापिका, श्रीमती विमला पंत ने अपनी भलाई-बुराई करने की बुरी आदत दूर करने की ठानी तो यकीनन काफी हद तक नकारात्मक विचारों से दूर रह सहकर्मियों की चहेती बन गई। संकल्प उन्हीं के पूरे नहीं होते जो तैश में आकर संकल्प ले लेते हैं।

ऐसे लें संकल्प
ऐसे संकल्प लें जो सहजता से पूरे होने वाले हों, जैसे-
- जिससे मिलें मुस्कुराकर मिलें, इससे आपके व्यक्तित्व में चार-चांद लग जाएंगे।
- पुरानी गलत आदत जैसे अधिक भोजन करना, सिर खुजलाना, नाखून चबाना आदि से छुटकारा पाने के लिए संकल्प लें।
- ज्ञान बढ़ाने के लिए 2 घंटे रोज अच्छी पुस्तक पढ़ने या एक घंटे इंटरनेट पर व्यावसायिक साइट्स देखने का संकल्प लें।
वास्तव में अपने आपको सबसे अच्छी तरह आप समझती हैं। सो इसका फैसला आप ही कर सकती हैं कि कौन से संकल्प पर आप अच्छी तरह अमल कर पाएंगी। बेशक संकल्प पूरे न हों लेकिन संकल्प से प्रेरणा मिलती है। बहुत से संकल्पों में से एक-दो तो पूरे होंगे, उनका पूरा होना आगे बढऩे का हौसला देगा। जीवन सुगमता से चले, इसके लिए अनिवार्य है कि निराशा हावी होने देने के बजाय कर्म करते रहें। इस तरह सकारात्मक परिणाम स्वत: सामने आ जाते हैं।
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