देवी बनर्जी लंबे समय से आज़ाद फाउंडेशन के साथ काम कर रही हैं और जरूरतमंद लड़कियों की मदद करती आ रही हैं। आजाद फाउंडेशन में इन लड़कियों को ड्राइविंग सीखाया जाता है और देवी उन्हें ये निश्चिन्तता देती हैं कि उन्हें गाड़ी चलाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इन लड़कियों का सारा पेपर वर्क देवी खुद ही करती हैं। 
 
खुद भी हैं राइडर
देवी खुद ही बुलेट भी चलाती हैं और कभी अकेले तो कभी ग्रुप में देश के दूर दराज के इलाकों में निकल जाती हूं। दिल्ली में पली-बढ़ी देवी लगभग 14 साल की उम्र से ही बुलेट चलाना शुर कर दिया था।
 
कम नहीं रही चुनौतियां
देवी की उम्र आज 50 साल है और वो अपने 26 वर्षीय बेटे के साथ रहती हैं। पति के नहीं रहने पर आमतौर पर महिलाएं बिखर जाती हैं, लकिन देवी ने अपने साहस और हौसले को बिखरने नहीं दिया। वो काम करती रही। देवी कहती हैं, काम में हमारी चुनौतियां ऐसी हैं कि लोगों को खासतौर से लड़कियों के परिवार वालों को हर कदम पर ये समझाना पड़ता है कि क्यों ड्राइविंग सीखना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है और कैसे वो उन लड़कियों को आत्मनिर्भर करता है। 
 
ये है मेरी सलाह
महिलाएं डर या झझकें नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। मैं उन्हें यही कहना चाहती हूं कि जब वो आगे बढ़ेंगी, तभी तो वो उनके रास्ते भी खुलेंगे। बढ़ने के पहले ही घबरा जाएंगी तो आगे का रास्ता कठिन होता नज़र आएगा। 
 

 

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