फेंगशुई में दोष निवारण के लिए सिक्कों, बांस के पौधों, मछली घर, पवन घंटी, प्रतिमाओं, चित्रों, बागुआ, पाकुआ तथा दर्पण आदि का उपयोग किया जाता है। दर्पण का फेंगशुई में अधिक महत्वपूर्ण है। दर्पण में नकारात्मक ऊर्जाओं को समावेश करने तथा परावॢतत करने का विशेष गुण है। इसकी इसी विशेषता के कारण सकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवाह को इच्छित ढंग से प्रवाहित कर इसका पूरा लाभ उठाया जा सकता है तो दूसरी ओर नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवाह को रोककर वापिस धकेला जा सकता है।
फेंगशुई या वास्तु में सावधानीपूर्वक दर्पण का उपयोग करने से यह दोगुनी गति से इच्छित फल देने की क्षमता रखता है क्योंकि दर्पण ही अकेली ऐसी वस्तु है जो किसी बिंब का प्रतिबिंब बनकर दोगुने को प्रदर्शित करता है। फेंगशुई में सामान्यत: तीन प्रकार के दर्पण जैसे बागुआ, पाकुआ व साधारण दर्पण का उपयोग किया जाता है।
चार प्रकार के होते हैं दर्पण
दर्पण के मुख्यत: चार आकार प्रयोग किए जाते हैं। जैसे- अंडाकार, गोल, आयाताकार व वर्गाकार। इन आकारों का चयन उस स्थान के मुखिया की जन्मतिथि, लगाने का उद्देश्य व किस दिशा में लगाया जाना है इस पर निर्भर करता है। इसी प्रकार उसकी आवश्यकतानुसार फ्रेमिंग का भी चयन किया जाता है। आजकल कुछ स्थानों में अष्टकोण व त्रिभुजाकार तथा पंचकोणीय शीशों का चलन दोष निवारण के लिए देखा गया है जो कि सर्वथा उचित नहीं है।

ध्यान रखें ये बातें
- कॉन्केव मिरर घर के बाहर लगाने चाहिए जो कि सामूहिक नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर की ओर उत्सर्जित करते हैं जबकि कॉन्केव मिरर सकारात्मक ऊर्जाओं को आकर्षित करते हैं। इन्हें अन्दर व बाहर आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाया जा सकता है।
- भोजन कक्ष व बैठक में दर्पण सकारात्मक ऊर्जा को दोगुना करके परिवार के सदस्यों में पारस्परिक सौहार्द व खुशहाली का वातावरण बनाता है। अवांछित चौकोर खंभों की चारों दीवारों पर दर्पण इसके दोषों को न्यूनतम करता है।
- यद्यपि किसी ने अपने घर या व्यापारिक संस्थान का निर्माण वास्तु अनुसार कराया है उस परिस्थिति में भी गलत दिशा में शीशे का प्रयोग वांछित संपन्नता व समृद्धि में रुकावट डालने में पूरी तरह से सक्षम होता है।
- शीशे को बाहर की ओर लगाते समय इसका ध्यान रखना चाहिए कि शीशा मुख्य द्वार का प्रतिबिंब न दिखाए और मुख्य द्वार के अंदर शीशा इस प्रकार न लगाएं जिससे आगंतुक का प्रवेश के समय दर्पण में प्रतिबिंब नजर आए।
- यदि घर या व्यापारिक स्थान पर कोई कोना कटा या बढ़ा हो तो उसके दोष को भी दर्पण द्वारा ठीक किया जा सकता है। इस प्रकार के शीशे जमीन से कुछ इंच की ऊंचाई पर ही लगाए जाएं इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए और वास्तु विशेषज्ञ की देखरेख में ही ऐसे दोषों का निवारण करना चाहिए।
- बहुत बार ऐसा देखने में आता है कि शयन कक्ष में शीशा न लगाकर अनजाने में किसी प्रकार की सजावट का सामान रख लेते हैं जिसमें दर्पण की तरह प्रतिबिंब परिवर्तित करने की क्षमता होती है। छोटे घरों में बाहर के मनोरम दृश्यों को शीशे के माध्यम से घर में समाहित करने का प्रयोग करना चाहिए।
क्या करें?
- कैश बॉक्स में दर्पण का उपयोग लाभकारी होता है।
- उत्तर की दीवार पर दर्पण धन-संपदा बढ़ाने में सहायक होता है।
- पूर्व की दीवार पर शीशा नई ऊर्जा का संचार कर बौद्धिक क्षमता का संचार करता है।
- भोजनकक्ष में टेबल के ऊपर शीशा लगाना शुभ होता है।
- यदि मुख्य द्वार के सामने सीढिय़ां हैं तो पाकुआ लगाना चाहिए।
- पड़ोसी का मुख्य द्वार आपके मुख्य द्वार के सामने पड़े तो पाकुआ लगाना उचित रहता है।
- यदि किसी कारणवश गलत दिशा में लगे शीशे को हटाना संभव न हो तो उसे पर्दे से ढक देना चाहिए।
क्या न करें?
- दो शीशों को आमने-सामने नहीं लगाना चाहिए। मुख्यद्वार के सामने दर्पण न लगाएं।
- दक्षिण व पश्चिम की दीवारों पर दर्पण का उपयोग न करें।
- शयनकक्ष में दर्पण का उपयोग आपसी संबंधों में खटास, बीमारी व विवाह संबंधी परेशानी उत्पन्न करता है।
- टूटे हुए व खंडित शीशे का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- ऐसे शीशों को जिनमें धूमिल व टेढ़ी-मेढ़ी छवि नजर आए उनका उपयोग नहीं करना चाहिए।
- सीढ़यों के नीचे शीशा लगाना अशुभ ऊर्जाओं को बढ़ाता है।
(साभार – साधना पथ)
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