जैसे ही भइया घर आए तो पिताजी ने कहा, ‘कहां गया था, ब्लडीफूल? गधा कहीं का’, वगैरह-वगरैह। जब पिताजी चले गए तो मैंने भइया से पूछा, ‘भइया जी, फूल तो सुना है, यह ब्लडीफूल क्या होता है?’ भइया बोले, ‘खून जैसा लाल फूल।’ कुछ महीनों बाद स्कूल में एक दिन टीचर ने पूछा, ‘अनीता, फूल के आगे विशेषण लगाओ, जैसे कि खूबसूरत फूल, लाल फूल आदि। मैंने तपाक से बोला, ‘ब्लडीफूल सर’, मेरा ऐसे कहते ही सारी क्लास की हंसी छूट गई। उस दिन मुझे पता चला कि ब्लडीफूल का मतलब महामूर्ख होता है।

2- छुट्टी और सजा
जब मैं दूसरी कक्षा में पढ़ता था, एक दिन की बात है। मैं स्कूल जाने के पहले नाश्ता कर रहा था, पर बहुत धीरे-धीरे खा रहा था। मैंने बोला कि आप खिलाओ तो जल्दी खा लूंगा पर मेरी मम्मी को यह पसंद नहीं था, इसलिए वे नहीं खिला रही थीं। चूंकि स्कूल के लिए देर हो रही थी तो नानी खिलाने लगीं और कहा कि, ‘विहान, जल्दी खाओ क्योंकि आपकी मम्मी ने देख लिया तो हम दोनों की छुट्टी हो जाएगी।’ मेरा इतना कहना था कि मैं खुश होकर बोला कि नानी, फिर तो बड़ा मजा आएगा। स्कूल नहीं जाना पड़ेगा और हम लोग खूब खेलेंगे। मेरा इतना कहना था कि नानी को हंसी आ गई। विहान ने ‘छुट्टी’ का मतलब ‘सजा’ न समझ कर छुट्टी समझ लिया। जब नानी ने अपनी बात का सही मतलब बताया तो मैंने जल्दी से अपना नाश्ता खत्म किया।
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