मैं चौथी क्लास में पढ़ती थी और मेरे भइया सातवीं क्लास में थे। भइया अक्सर ऊट-पटांग हरकतें करते थे और पिताजी की डांट खाते थे। एक दिन पिताजी अधिक गुस्से में थे, क्योंकि भइया ने कुछ गड़बड़ कर दी थी। जैसे ही भइया घर आए तो पिताजी ने कहा, ‘कहां गया था, ब्लडीफूल? गधा कहीं का, वगैरह-वगरैह। जब पिताजी चले गए तो मैंने भइया से पूछा, ‘भइया जी, फूल तो सुना है, यह ब्लडीफूल क्या होता है? भइया बोले, ‘खून जैसा लाल फूल। कुछ महीनों बाद स्कूल में एक दिन टीचर ने पूछा, ‘अनीता, फूल के आगे विशेषण लगाओ, जैसे कि खूबसूरत फूल, लाल फूल वगैरह…। मैंने तपाक से बोला, ‘ब्लडीफूल सर, मेरा ऐसे कहते ही सारी क्लास की हंसी छूट गई। उस दिन मुझे पता चला कि ब्लडीफूल का मतलब महामूर्ख होता है।

 

 

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