Hindi Love Story: रेलवे की नौकरी में मीता बहुत खुश थी। सारा दिन पंख लगाकर कहाँ उड़ जाता था।पता नहीं चलता था। जब मीता की नौकरी लगी थी| तब विभाग में कर्मचारी भी बहुत थे,अब अगर मीता की नौकरी लगती तो बडा मुश्किल होता नौकरी करना,क्यो कि ऑन लाइन का समय आ गया है ऑफिस मे ज्यादातर काम ऑन लाइन ही हो रहा है।भला हो फड़से बाबू का थोड़ा बहुत कम्प्युटर सिखा दिया था।ऐसे ही पंख लगाकर दिन उडते चले जाते है, मीता अकेली रहती थी|अकेली जान का खाना बनाने मे कितना टाइम लगता है|नही,खाना बनता तो कैन्टीन से ही लेकर खा लेती, दो कप चाप पी लेती।पिता जी गजेन्द्र सिंह रेलवे में थे,ऑन ड्यूटी उनको अटैक आ गया था। मीता को उनकी जगह अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।वो इंदौर मे रहती थी,पूरा परिवार चित्तोड़ में रहता था।
महिने भर में जाती रहती थी| परिवार मे माँ ,छोटे दो भाई,एक छोटी बहन थी। मीता सबसे बड़ी थी।बड़ी होने के कारण उसे ही जिम्मेदारी निभानी थी। रेलवे की नौकरी मे ही दोनों भाईयो की शादी उसने कर दी थी|बहन की शादी कर दी थी।सभी अपने घर परिवार मे सुखी थे। चितोड मे ही उसने मकान बडा बनवा दिया था। भाईयो भाभीयो और बच्चो से घर भरा पूरा था।लेकिन इन जिम्मेदारियो के कारण वो खुद का जीवन भूल गयी थी,अपना घर नहीं बसा पायी थी।
जब भी वो चित्तोड़ जाती तो भाभियो और उनके बच्चो को देखकर खुश होती। माँ से जब भी अपने साथ रहने को बोलती माँ तुरंत मना कर देती थी,माँ को अपने पोते पोतियो में सुख मिलता था।वो मीता को भी यही बोलती रिटायरमेट के बाद चितोड आकर रहे, बच्चों के साथ मन लगा रहेगा।मीता जानती थी जब भी वो चितोड आयी है| बच्चो की देखभाल में बिजी हो जाती है| भाभी भैया उसे घर पर बच्चों को संभालने की ड्यूटी देकर खुद घूमने,मूवी देखने निकल जाते थे।इंदौर में रेलवे की ड्यूटी, घर पर बच्चो की ड्यूटी।उसकी खुशियां घूमना फिरना,सपने सब राख हो गये है।
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कोरोना ने भी अच्छे—अच्छे घरो को उजाड़ दिया है|मीता का एक भाई कोरोना ने खा लिया।दो बच्चे छोड़ गया था,भाभी बच्चो के सहारे जीवन बिता रही थी। भाई किसी प्रायवेट कंपनी मे था। थोड़ा बहुत मुआवजा मिला था उसे माँ ने बैंक में रखवा दिया था| उसका ब्याज और पापा की पैशंन जो माँ के नाम बैंक मे आती थी। उससे सब घर अच्छे से चल रहा था। बड़ा भाई रेलवे के छोटे मोटे ठेके लेता था।उसके भी दो बच्चे थे।
मीता को रिटायर होने में 6 माह शेष थे|मीता ये सोचकर परेशान थी, वो रिटायरमेंट के बाद क्या करेगी? घर चितोड जाकर भाभी और बच्चों की केयर टेकर बनेगी या इंदौर में अकेली रहेगी।उसका कोई सहारा ही नहीं है। फिर मीता को ध्यान आया इंजीनियर विभाग के मधुकर उसे कई बार बोल चुके है मीता रिटायरमेंट के बाद की लाइफ कैसे बिताओगी ?अभी तो भाइयो की शादी उनकी देखभाल में जीवन होम कर दिया खुद के लिये भी सोचो।
मीता चुप रहती थी।
मीता जानती थी कोरोना में मधुकर जी की पत्नी की मौत हो गयी है।पच्चीस वर्षीय बेटी है | मधुकर जी को रेलवे से रिटायर हुए तीन वर्ष बीत चुके है।
बेटी पापा की चिंता में शादी नही कर रही है| मधुकर जी ने कई रिश्ते बताए हैं पर वो टाल देती है। बोलती है,
पापा आपको छोडकर कहीं नहीं जाऊँगी।मधुकर चुप रह जाते।
मीता मधुकर का इशारा समझती थी। लेकिन उसका परिवार -? परिवार -? उसका परिवार कहाँ है? वो तो अकेली है।भाइयो का परिवार है,बहन का परिवार है उसका परिवार कहां है ? लेकिन भाई ,माँ, बहन इस बात की अनुमति देंगें ? समाज में थू थू होगी -|
समाज कौन सा समाज?जब वो अनुकंपा पर रेलवे में गयी थी, किसी ने हाल चाल नही जानें, कैसे हैं हम ? ऑफिस हो या समाज सबने फायदा उठाने के लिये सोचा। लेकिन उम्र भी देखनी चाहिये।साठ साल की उम्र में क्या सुख मिलेगा?क्यो सुख नही मिलेगा ?
शरीर का सुख ? मन ने सवाल किया।
लेकिन ईश्वर ने भी अपनी महिमा ऐसी बनायी है कि कोई दु:ख कुछ दिनों बाद धुंधला होने लगता है बड़ी से बड़ी खुशी की चमक भी कुछ समय बाद फीकी पड़ने लगती है। वो अनुकंपा में आयी तो कितने टेंशन में थी लेकिन फिर पापा का दर्द धीरे धीरे धुँधला पड़ने लगा |छोटे भाइयो में जीवन कब बीत गया पता नहीं चला। ऐसे ही बीत जायेगा ये जीवन|
शरीर की मांग परेशान नही करती ये भी परमेश्वर ने जीवन चक्र ऐसा बनाया है शायद।फिर क्यो मधुकर की बात मानी जाए। दिमाग ने कहा।
अभी वर्किंग में तो स्टॉफ के साथ हंसना बोलना,उनके घरों में आना जाना होता है। 8, 9 घन्टे का साथ होता है। रिटायरमेन्ट के बाद कौन, समय देगा ? क्लोज फ्रेंड ही साथ देते है।वो कहते है रेलवे की दोस्ती सिग्नल तक |उसके बाद,
बातें करने के लिये,सुख दुःख बाँटने के लिये एक साथी चाहिये ही।उसके लिये क्या मधुकर बुरे है ? साथ घूमना फिरना | लेकिन, मधुकर जी की लडकी अनु क्या मानेगी? सोचो के भंवर में डूबते उतरते मीता कब नींद की गोद में सो गयी पता ही नहीं चला।
सुबह उठी सर भारी था। हाथ पैर टूट रहे थे।मीता ने दो दिन की छुट्टी भेज दी। इंचार्ज को। दो दिन रेस्ट करुगी | सारा दिन आराम करती रही,थोडी खिचडी, दही खा ली थी|फिर दिन मे सो गयी।एक दो कलीग ने मोबाइल पर हाल चाल जाने थे। एक सहेली अर्चना जरूर आयी थी| थोडी देर बैठकर चली गयी, जाते जाते ये बोल गयी अब तो वैसे भी अकेले रहने की आदत डाल ले,कुछ महीनों बाद कोई झाँकने वाला नहीं है |
शाम को वो कॉफी बनाकर टी.वी खोल कर बैठ गयी,मीता को न्यूज चेनल और म्यूजिक चेनल पसंद थे,जिसके वो गीत देखती थी। तभी कॉल बेल बज उठी।
अभी कौन आ सकता है ?जल्दी ही उठकर दरवाजा खोला।
सामने मधुकर अपनी बेटी अनु के साथ खड़े थे।
आप मधुकर जी।वो संकोच से भर गयी। बिखरा है घर।आइये- आइये।कहकर वो सोफे पर बिखरे कपडे समेटने लगी
रहने दीजिये घर हैं घर को घर जैसा रहने दीजिये।कहते हुए मधुकर सोफे पर बैठे गये उनकी बेटी सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी। मै यहाँ से गुजर रहा था सोचा आपसे मिलता चलूँ |तबियत ठीक है। मधुकर जी बोले।
दो दिन से छुट्टी पर हूँ|
तबियत थ ड़ी ठीक नहीं है,मीता बोली ।
मै तो रिटायर हूँ|मुझे नहीं पता चला|मधुकर बोले|
जी ऐसा कुछ विशेष नही। मीता बोली।आप बैठिये मैं चाय बना लाती हूँ।मीता बोली।
अरे नही,आप बैठिये। चाय हम घर से पीकर निकले थे।अनु बोली ।
फिर मेरे प्रस्ताव पर सोचा, अकेली कैसे रहोगी?चितौड या इंदौर जाओगी ?मधुकर बोले|
मीता ने सोचा बता दे कि पिछले कुछ दिनों से वो यही सोचती रही है,कुछ सोचकर वो बोली।
जी, मैं आपकी बात पर विचार करूँगी मीता बोली।
सच,अनु खुश हो गयी।
अनु तुम भी। मीता ने आश्चर्य से कहा।
हाँ मीता जी,मैे भी नही चाहती पापा अकेले रहे।आप हमारे जीवन में आएँगी तो पापा को भी साथी मिलेगा|अनु ने खुशी के चहकते हुए कहा।
आप आयेंगी तो मैं भी शादी के लिये हाँ कह दूँगी|
आप दोनो कन्या दान करोगे|अनु मानों सपनो के झूले पर सवार थीं।
मीता ने ज्यादा देर नहीं की।
कुछ समय बाद ही मधुकर,मीता सादगी से विवाह बंधन में बंध गये।मीता को अनु का कन्यादान भी करना था।जीवन का अधूरापन पूरा हो गया था।
