Short Story in Hindi: पिछले 6 महीने से तारा को रात से डर लगने लगा था। शाम ढलते ढलते ही उसे बेचैनी महसूस होने लगती थी। तारा के बेटे कनिष्क को 6 महीने पहले अचानक हार्ट अटैक आया और हॉस्पिटल ले जाने के बाद पता चला इस अटैक के साथ उसके दिमाग पर भी असर पड़ा है। कनिष्क को अस्पताल में एडमिट हुए अब 6 महीने हो चुके थे, जवान बेटे की ऐसी हालत देख कर तारा का दिन भी मुश्किल होता था। लेकिन रात आते ही उसे घबराहट होने लगती थी। सारी रात उसके दिमाग में बस यही ख्याल आता ना जाने उसका बेटा अब कभी ठीक हो भी पाएगा या नही।

तारा को इन दिनों सालों पहले की एक बात याद आती थी, जब उसने अपनी भतीजी रीना की बेटी राशि को बिना वजह ही काफी गुस्से में दिल को चुभ जाने वाले शब्द कहे थे। कनिष्क के बीमार हो जाने पर तारा समझ रही थी माँ के मन में कितनी बेचैनी होती है, अपने बच्चे को ऐसी हालत में देख कर।
दरअसल रीना अपनी बुआ तारा के घर हफ्ते भर रहने आयी थी। राशि के इलाज के लिए तारा के शहर में काफी बड़ा अस्पताल था। इसलिए रीना ने सोचा बुआ के घर रहकर एक हफ्ते में कोई अच्छा-सा ठिकाना तलाश कर लेगी।
इलाज के तीसरे ही दिन राशि ने रीना से कहा मम्मा मुझे कुछ चटपटा खाने का बहुत मन है। तारा सब सुन रही थी। इसी बात पर उसने राशि को जोर से डांट कर कहा, तेरा इलाज चल रहा है और तू चटपटा खाने का सोच रही है, रीना तेरी बेटी कितनी चटोरी है।
बुआ के ऐसे तीखे शब्द राशि और रीना दोनों को ही बहुत बुरे लगे थे। उसी दिन रीना ने तारा का घर छोड़ कर होटल में रुकने का फैसला कर लिया। इन सब बातों के बावजूद भी रीना ने कभी तारा से कोई मनमुटाव नही रखा, और तारा को लगा उसने कुछ गलत किया ही नही।

आज यही सालों पुरानी बातें याद कर के तारा को पछतावा महसूस हो रहा था, वो शर्मिंदा महसूस कर रही थी। माफ़ी किस हक़ से मांगे ये भी समझ नही आ रहा था।
जिस भतीजी को वो तीन दिन भी अच्छे से अपने घर में नही रख पायी थी, आज उसी के शहर में वो पिछले 6 महीने से रह रही थी। जिसमें एक दिन भी ऐसा नही गया जब रीना कनिष्क को देखने ना आयी हो। कनिष्क को लिक्विड डाइट पर रखा गया था, इस लिए रीना उसके लिए घर से सूप, जूस, और दाल का पानी ले कर आती थी।
तारा को अपना किया हुआ ख़राब व्यवहार बेचैन कर रहा था। आज हिम्मत जुटा कर उसने रीना से माफ़ी मांगने का फैसला कर लिया था। जब रीना हॉस्पिटल आयी तो तारा ने उसे कास कर गले लगा लिया और हिचकियाँ लेते हुए रोने लगी। उसने रीना से माफ़ी मांगनी चाही तो रीना ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया। रीना ने कहा बुआ जी सालों पहले जो हुआ उसे भूल जाइये, मेरे मन में आपके लिए कोई गुस्सा नही है।
मैं कनिष्क को ये सूप पिला देती हूँ , इसकी पसंद का चटपटा सूप है। ”चटपटा” ये शब्द सुन कर तारा की आँखों में पश्चाताप के आंसू आ गए। यही शब्द तारा ने नफरत में राशि के लिए कहा था। लेकिन आज रीना ने इसी शब्द में प्यार घोल दिया था। तारा प्यार से कनिष्क को सूप पिलाती रीना को देख कर सोचने लगी ‘कितना फर्क है मेरी और रीना की सोच में’।
