Hitopadesh ki Kahani : किसी वन में एक वृक्ष पर घौंसला बनाकर एक कौआ और उसकी पत्नी रहते थे । समय पर कौवी गर्भवती हुई और फिर उससे अंडे उत्पन्न हुए। उन अंडों के देने के बाद यथावसर उनमें से कौवे के बच्चे निकल आये। ज्यों ही वे बच्चे कुछ बड़े हुए कि उसी पेड़ के कोटर में रहने वाले काले सांप ने एक दिन उन सबको निगल लिया ।
काक दम्पती को इससे बड़ा दुख हुआ। उनके पास कोई उपाय नहीं था । मन मार कर रह गये । किन्तु काक पत्नी जब गली बार गर्भवती हुई तो उसने अपने पति से कहा, “देव हमको यही उचित है कि अब हम इस वृक्ष को छोड़कर किसी अन्य वृक्ष पर जाकर अपना घौंसला बनायें । “
उसकी पत्नी ने कहा, “मैं पुनः गर्भवती हूं। यदि हम इस वृक्ष पर रहे तो इस बार भी वह काला सांप हमारे बच्चों को खा जायेगा I
“कहा भी गया है कि जिस घर में कर्कशा पत्नी हो, दुष्ट मित्र हो, उलटकर उत्तर देने वाला नौकर हो, और जिस घर में सांप रहता हो उस घर में तो समझो कि प्रति क्षण मृत्यु सम्मुख ही रहती है । “
कौआ बोला, “प्रिये !
अब बहुत हो गया है। तुम डरो मत। अब तक तो हम इसकी सहते आये थे । अब कठिन हो गया है। अब मैं इसको क्षमा नहीं करूंगा।”
उसकी पत्नी कहने लगी, “इस भयंकर विषधारी जीव से आप किस प्रकार लड़ाई करेंगे ?”
तुम्हें मुझ पर सन्देह नहीं करना चाहिए।
मैं युद्ध नहीं करूंगा अपितु बुद्धि से उसे पराजित करूंगा।
“कहा भी गया है कि जिसके पास बुद्धि होती है उसी में बल रहता है। जो निर्बुद्धि है उसमें बल कहां ?
“क्या तुमने वह कथा नहीं सुनी जब एक मतवाले सिंह को छोट से खरगोश ने मरवा डाला था ?”
उसकी पत्नी ने पूछा, “वह किस प्रकार ?”
कौआ बोला, “सुनो, सुनाता हूं।”
