चीनी दार्शनिक चुआँग-जू नदी के किनारे बैठा मछलियाँ पकड़ रहा था, तभी एक राजदूत ने आकर उससे कहा, “सम्राट् ने आपको अपना प्रधानमन्त्री नियुक्त किया है।”
“सुना है कि सम्राट् के संग्रहालय में किसी दिव्य कछुए की ढाल सुरक्षित है। बताओ, अगर वह कछुआ जीवित होता, तो क्या पसंद करता-सम्राट् के संग्रहालय की शोभा बढ़ाना या जहाँ वह पैदा हुआ था, वहाँ की दलदल में लोटना?” चुआँग-जू ने उससे प्रश्न किया।
दूत ने उत्तर दिया, “वह दलदल में लोटना ज्यादा पसन्द करता।”
चुआँग-जू ने कहा, “और मैं भी यही पसन्द करता हूँ। पद पाकर आदमी मनःशान्ति खो बैठता है और कभी-कभी अपना जीवन भी। सम्राट् से जाकर कह देना, मुझे दलदल में लोटना ज्यादा पसंद है।”
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