mera kasoor kya hai
mera kasoor kya hai

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

जून का महीना था। गर्मी पूरे जोरों पर थी। सूरज देवता भी अपने पूरे जोर-जलाल पर थे। उस पर मुसीबत लाइट बंद। कॉलेज में बी.एड. के पेपर चल रहे थे। राज की ड्यूटी भी लगी हुई। थी। राज एक शरीफ और होनहार लड़का था, लेकिन ड्यूटी करते समय वह अपने आपको सहज महसूस नहीं कर रहा था कारण यह कि जिस कमरे में राज की ड्यूटी लगी हुई थी वहां दो लड़के और बाकी सारी लड़कियां थीं। आमतौर पर लड़कियों को देखकर लड़के खुश होते हैं लेकिन राज का स्वभाव औरों से अलग था। वह शर्मीले स्वभाव वाला लड़का था, जो लड़कियों से दूर ही रहना पसंद करता था। आज इतनी सारी लड़कियों में वह अपने आप को सहज महसूस नहीं कर रहा था उस पर ड्यूटी भी सब के ऊपर नजर रखने की थी ताकि कोई नकल न कर सके बस यही काम उसे सबसे मुश्किल लग रहा था जिसने उसे परेशान किया हुआ था। बार-बार उसके मन में यही सोच आ रही थी कि कहां फंस गया? पहले पता होता तो साफ मना कर देता पर अब कुछ नहीं हो सकता था।

विद्यार्थियों में कुछ पढ़ कर आए हुए थे बाकी सिर्फ टाइमपास ही कर रहे थे। वे इधर-उधर झांककर या किसी से पछ कर अपना काम चला रहे थे, जिस पर उनको अध्यापकों से डांट भी पड़ रही थी। पेपर दे रही लड़कियों में दो लड़कियां थी निशा और आरती। दोनों सहेलियाँ थीं और एक ही कॉलेज में बी.एड. कर रही थी। उनका नंबर भी इकट्ठा ही आया हुआ था। दोनों ही तेज-तर्रार और खुले विचारों वाली लड़कियाँ थी। दोनों पढ़ाई में ठीक-ठाक ही थी और चाहती थीं कि एक-दूसरे की मदद से पास हो जाये। इसके लिए वो बार-बार एक-दूसरे से पूछ रही थीं। राज और दूसरे अध्यापक उनको रोक रहे थे, पर वह आगे से हंसकर सॉरी बोल देती।

राज उस कमरे के हालात देखकर सोच रहा था कि इनमें से कई पास होकर स्कूलों में अध्यापक बनेंगे। इनकी जो प्रकृति है उसके कारण विद्यार्थियों का भविष्य बनाने की जगह उसे खराब ही करेंगे क्योंकि जो खुद नकल करके पास होंगे वे दसरों को क्या सिखायेंगे? यहीं तो हमारे सिस्टम की खराबी है काबिल व्यक्ति रह जाता है और नकलची पैसे और सिफारिश के बल पर नौकरी हासिल कर लेते हैं। इससे शिक्षा का स्तर नीचे गिरता है, इसीलिए राज की पूरी कोशिश थी कोई नकल ना कर सके, पर लड़कियां ज्यादा होने के कारण वह अपने आप को असहज महसूस कर रहा था। ज्यादा देर तक किसी लड़की की तरफ वह देख नहीं सकता था, क्योंकि जवान लड़की को ज्यादा देर तक देखना आज के हालात के मुताबिक खतरे से खाली नहीं था, चाहे वह अध्यापक था और नजर रखना उसकी ड्यूटी थी इतने में हाफ-टाइम हो गया और कुछ बच्चे अपना पेपर देकर चले गए इनमें बहुतों के पेपर खाली ही थे। राज पेपर देखकर मन में हल्का-सा हँसा और सोचने लगा कि यह पढ़ने वाले का कसूर है या पढ़ाने वाले का। अभी वह सोच ही रहा था कि रीमा मैडम ने आकर उसके कान में कुछ कहा, जिसे सुनकर राज के हाथ-पैर काँपने लगे। रीमा मैडम ने कहा, “सर वह जो पहली लाइन के आखिर में लड़की है उसको चेक करना, मुझे लगता है उसके पास कुछ है।”

राज मन ही मन कहने लगा है, “हे परमात्मा! यह क्या कर रहा है तू, मैं एक नौजवान लड़का होकर एक नौजवान लड़की को कैसे चेक करूँ? यह काम तो इस मैडम का है इसने अपने सिर से बला हटाकर मेरे सिर पर डाल दी। अब क्या करूँ?

राज का दिल जोरो से धड़कने लगा। अपने इस धड़कते दिल को लेकर राज उस लड़की की तरफ गया, जो कोई और नहीं निशा थी। निशा को पहले ही बहुत बार वार्निंग मिल चुकी थी। राज को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? उसको कैसे पकड़े? क्योंकि उसे यह भी नहीं पता था कि उसके पास कुछ है भी या नहीं? राज चुपचाप उसके पास जाकर खड़ा हो गया। काफी देर नजर रखने के बाद उसको यकीन हो गया कि निशा के पास कुछ नहीं है। दूसरी ओर निशा बार-बार राज की तरफ देख कर हंस रही थी। पेपर खत्म हो गया। सारे बच्चे पेपर देकर कमरे से बाजार जा रहे थे। निशा और आरती ने भी पेपर दिया और कमरे से बाहर निकलने लगी। दोनों राज की तरफ देखकर हंस रही थी। अचानक निशा ने राज को आंख मार दी। उसकी इस हरकत से राज घबरा गया और उसने अपनी नजरें दूसरी तरफ मोड़ लीं।

घर आकर राज रात को इस सारी घटना के बारे में सोचने लगा कि यह जो कुछ आज हुआ यह सही था या गलत। निशा और आरती उसकी तरफ देखकर हँस क्यों रही थी? निशा ने जाते-जाते उसको आंख क्यों मारी? क्या वह समझ गई है कि यह सिर्फ गरजने वाला बादल है? या उसके मन में कुछ और चल रहा है? सोचते-सोचते कब उसकी आंख लग गई पता ही ना चला।

दो दिन बाद फिर पेपर था। हालात पहले दिन वाली ही थे। वही नकल की कोशिशें, वही अध्यापकों के धमकियाँ। राज की नजरों का कैद निशा और आरती थीं। पिछले पेपर के दौरान हुई हरकत राज को अब तक समझ नहीं आ रही थी। राज नजरें चुराकर निशा की तरफ देख रहा था। निशा भी उसकी तरफ ही देख रही थी। जिस वक्त दोनों की नजरें मिलती राज का दिल काँप जाता और वो अपनी नजरें दूसरी तरफ मोड़ देता। पेपर खत्म हो गया। राज कॉलेज से बाहर निकलने लगा तो उसने निशा और आरती को खड़ा देखा। दोनों राज की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थीं। राज भी अपने होठों पर हल्की-सी मुस्कान बिखेर कर आगे निकलने लगा तो पीछे से आवाज आई, “सर” यह आवाज निशा की थी। आवाज सुनकर राज रुक गया पीछे मुड़कर देखा तो निशा उसकी तरफ आ रही थी। “नमस्ते सर’, निशा ने कहा, “नमस्ते” राज ने जवाब दिया वह अंदर ही अंदर काँप रहा था।

“क्या हाल हैं सर”, निशा ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

बस ठीक हूँ, राज ने जवाब दिया।

“सर, बड़ा घूर-चूर कर देखते हो’, हँसते हुए निशा ने कहा।

“कौन’, ‘काँपते हुए राज ने कहा।

“आप और कौन’, निशा ने भी आगे से कहा।

“न…नहीं मैं….मैं तो नहीं’, राज ने काँपते हुए कहा। राज की हालत बड़ी पतली हो गई थी।

राज की पतली हालत को देखकर निशा ने कहा, “छोड़ों सर कोई बात नहीं आप भी जवान हो और हम भी जवान और खूबसूरत है। खूबसूरत लड़कियों को अभी नहीं देखोगे तो क्या बुढ़ापे में देखोगे, निशा ने हँसते हुए कहा।

“नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। मुझे तो सब के ऊपर नजर रखनी पड़ती है ड्यूटी जो है।

“हमारे ऊपर कुछ ज्यादा ही रखते हो”, आरती ने हंसते हुए कहा। आरती के भी शामिल होने से राज की हालत और पतली हो गई। उसने अपना पीछा छुड़ाने की खातिर कहा “अच्छा मैं चलता हूं लेट हो रहा हूँ कहकर राज आगे की तरफ चल पड़ा। निशा और आरती उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। राज की हालत बड़ी खराब थी, उससे सही तरीके से गाड़ी नहीं चल रही थी। आज की घटना ने उसका बुरा हाल कर दिया था।

दो दिन बाद फिर पेपर था। विद्यार्थी कमरे में आ रहे थे और अपनी-अपनी सीटों पर बैठ रहे थे। राज भी वहीं पर था। इतने में निशा और आरती आई। निशा ने बड़ी कातिल नजर से राज की तरफ देखा। उसने राज की तरफ देख कर सिर हिलाया। राज को समझ नहीं आई उसने भी आगे से सिर हिला दिया। पेपर शुरू हो गया। हालात पहले दिनों वाले ही थे। निशा रह-रहकर राज की तरफ देख रही थी। जब दोनों की नजरें मिलती तो वो हँस देती। पेपर खत्म होने को एक घंटा रह गया था, अचानक राज को ऐसा महसूस हुआ कि निशा के पास कुछ है। उसको समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। पहले भी ऐसा हो चुका था, पर मिला कुछ भी नहीं था। राज चुपचाप जाकर निशा के पास खड़ा हो गया निशा ने भी आगे से हँसकर सिर हिलाया। निशा लिखना छोड़कर इधर-उधर देखने लगी। उसने शरारत भरे लहजे से राज की तरफ देखा और पूछा, “क्या हुआ सर?”

राज ने आगे से सिर हिलाकर कहा, “कुछ नही अपना काम करो।”

निशा आगे से मुस्कुरा पड़ी पर उसकी हरकतों ने राज को शक में डाल दिया। राज ने रीमा मैडम को निशा को चेक करने के लिए कहा। रीमा मैडम ने जाकर निशा से कहा, “खड़ी हो जाओ”

“क्या हुआ मैडम”, निशा ने पूछा।

रीमा मैडम बिना कोई जवाब दिए उसके पेपर को आगे-पीछे करके चेक करने लगी। निशा ने फिर पूछा, “क्या हुआ मैडम” रीमा बिना कुछ बोले चली गई और राज को ना का इशारा किया। थोड़ी देर बाद राज को फिर लगा कि निशा कुछ गड़बड़ कर रही है वह चोर नजरों से निशा की तरफ देखने लगा। थोड़ी देर बाद अचानक निशा ने एक कागज निकाला और अपनी शीट के नीचे रख दिया। वो उसे देखकर लिखने लगी। राज ने यह देख लिए था, वह तेजी से निशा की तरफ बढ़ा राज को अपनी तरफ आता देख निशा ने कागज अपने मुँह में डालकर निगल लिए। राज ने उसका पेपर छीन लिए, “क्या हुआ सर”, निशा ने पूछा।

“तुम नकल कर रही थी”, राज ने जवाब दिया।

“सर मैं कोई नकल नहीं कर रही थीं आपको गलतफहमी हुई है।”

“मैंने खुद तुम्हें नकल करते देखा है” राज ने गुस्से से कहा।

“सर, आप मेरी तलाशी ले लो”, इतने में रीमा मैडम भी नजदीक आ गई।

उन्होंने पूछा “क्या हुआ सर?”

“मैडम यह लड़की नकल कर रही थी मैंने पकड़ लिया इसको”

“मैडम मैं कोई नकल नहीं कर रही थी यह झूठ बोल रहे हैं’ ‘निशा ने थोड़े गुस्से से कहा रीमा ने सवालिग नजरों से राज की तरफ देखा।

“मैडम यह नकल कर रही थी मैंने खुद देखा है।”

“मैडम आप मेरी तलाशी ले लो”, रीमा ने तलाशी ली लेकिन कुछ नहीं मिला। रीमा राज की तरफ देखने लगी। “मैडम इसने मेरे सामने कागज निगला है।”

“मैडम यह झूठ बोल रहे हैं मेरे पास कुछ नहीं है आपने भी तो मेरी तलाशी ली थी क्या? आपको कुछ मिला? निशा ने रीमा से पूछा।

मैं झूठ क्यों बोलूँगा मुझे क्या जरूरत पड़ी है झूठ बोलने की”, राज ने गुस्से से कहा।

“जरूरत..हुँह….मुझे पता है आप की क्या जरूरत है”, निशा ने व्यंग के भरे लहजे से कहा।

“मतलब क्या है तुम्हारा”, राज ने पूछा।

“तुम कहना क्या चाहती हो”, रीमा ने भी पूछा।

“मैडम यह सर मुझ पर गंदी नजर रखते है’ निशा ने गुस्से से कहा। राज के होश उड़ गए उसकी आंखें खुली की खुली रह गई, बाकी स्टाफ भी हैरान हो गया कि गंदी नजर और वो भी राज!

“क्या बकवास कर रही हो तुम”, राज ने गुस्से से कहा।

“बकवास नहीं कर रही जो सच है वही बोल रही हूँ, निशा ने भी गुस्से में जवाब दिया।

तुम कहना क्या चाहती हो’, रीमा मैडम ने पूछा।

“मैडम मैं पिछले दो पेपर से देख रही हूँ, यह सर मुझे घूर घूर कर देखते हैं। मैंने सोचा कोई बात नहीं यह इनकी ड्यूटी है, पर पिछले पेपर वाले दिन इनकी असलियत सामने आ गई।”

“क्या हुआ था पिछले पेपर वाले दिन”, रीमा मैडम ने पूछा। राज के होश उड़े हुए थे।

“मैडम पिछले पेपर वाले दिन पेपर के बाद मैं और मेरी सहेली आरती बाहर खड़े थे, सर ने हमें आवाज लगाई। इनकी आवाज सुनकर मैं और आरती दोनों इनकी तरफ आने लगी तो इन्होंने सिर्फ मुझे आने को कहा, जब मैं इनके पास गई तो यह मेरे साथ फ्लर्ट करने लगे।”

“मैडम यह झूठ बोल रही है मैंने इसको नहीं बुलाया था उल्टा इसने मुझे बुलाया था। आप इसकी सहेली से पूछ लें, राज ने आरती की तरफ इशारा करते हुए कहा।

रीमा मैडम ने आरती की तरफ देखा तो आरती ने जवाब दिया, मैडम यह सर झूठ बोल रहे है, इन्होंने ही हमें आवाज लगाई थी।” आरती का जवाब सुनकर राज की रही-सही हिम्मत भी जवाब दे गई। उसे ऐसे लगा जैसे उसकी टांगे जवाब दे रही हैं, वह बड़ी मुश्किल से डेस्क का सहारा लेकर खड़ा हुआ।

“जब मैं इनकी बातों में नहीं आई तो उन्होंने साफ कह दिया कि मैं तुम्हें अगला पेपर नहीं देने दूंगा तेरा नकल का केस बना दूँगा”, यह सब इसलिए हो रहा है मैडम कहते हुए निशा रोने लगी।

“मैडम यह झूठ बोल रही है आप तो मुझे जानते हैं”, राज ने हिम्मत हारते हुए याचना भरे लहजे में कहा।

रीमा मैडम को समझ नहीं आ रही थी कि वह क्या करें पेपर दे रहे सभी विद्यर्थियों का ध्यान भी इसी घटना की तरफ था। कई विद्यार्थियों के चेहरे पर गुस्से वाले भाव थे। वह आपस में कानाफुसी भी करने लगे थे और राज को शक भरी नजर से देखने लगे थे। कई तो यह भी कहने लगे थे कि ऐसे अध्यापकों की वजह से ही यह पेशा बदनाम हो रहा है। इनको पुलिस के हवाले कर देना चाहिए। कई तो राज को नौकरी से निकालने की भी बातें कर रहे थे। उधर राज बेचारे को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या कहे। हर बात उसके खिलाफ जा रही थी। रीमा मैडम ने मौका संभालते हुए निशा, आरती और राज को दूसरे कमरे में चलने को कहा और बाकी बच्चों को गुस्से से कहा कि वह अपना पेपर करें। उसने सुनीता मैडम से कहा कि आप यहाँ ध्यान रखें मैं थोड़ी देर में आई।

रीमा मैडम उनको लेकर दूसरे कमरे में चली गई उसने बड़े प्यार से निशा को पूछा, “सच-सच बताओ क्या हुआ था यहाँ सिर्फ हम चार ही हैं। तुम्हारा पेपर भी हम तुम्हें वापस कर देंगे बस तुम सच-सच बताओ क्योंकि तुम्हारे एक से किसी की नौकरी जा सकती है।” पर निशा अपनी बात से पीछे ना हटी। वह अपनी बात पर डटी रही। आरती से पूछा वह भी अपनी बात पर कायम थी और सारा दोष राज को दे रही थी। राज बेचारा वह तो पागल ही हो गया था वह बार-बार यह कह रहा था, “मैंने कुछ नहीं किया यह सब झूठ है।” रीमा मैडम भी परेशान हो गई उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? लेकिन अब उसको भी लग रहा था कि राज कहीं ना कहीं झूठ बोल रहा है क्योंकि दोनों लड़कियां अपनी बात से पीछे नहीं हट रही थी। मौके की नजाकत को समझते हुए रीमा मैडम ने बड़े प्यार से निशा, आरती और राज से कहा, “देखो जो कुछ हुआ वह बहुत गलत हुआ, लेकिन मैं आप लोगों को यही सलाह दूंगी कि इस बात को यही खत्म कर दिया जाए। यह बात अगर बाहर निकली तो आप सभी के चरित्र पर सवाल खड़े होंगे, विद्यार्थी और अध्यापक का रिश्ता बदनाम होगा इसलिए इस मसले को यहीं पर खत्म कर दो।

“मैडम हमने तो कुछ नहीं किया हम तो चुपचाप सब कुछ बर्दाश्त कर रही थी, पर यह सर ने ही हमें मजबूर किया है।” राज नफरत भरी नजर से निशा की तरफ देख रहा था, लेकिन कुछ बोल नहीं रहा था।

“चलो कोई बात नहीं इनकी तरफ से मैं तुम लोगों से माफी माँग लेती हूँ”, रीमा मैडम ने हाथ जोड़ते हुए कहा।

“मैडम यह आप क्या कह रही है”, राज ने हैरान होते हुए कहा।

“आप चुप रहो प्लीज”, रीमा मैडम ने आगे से गुस्से भरे लहजे में कहा। राज चुप हो गया।

“मैडम आप माफी क्यों मांग रही हो माफी तो इनको मांगनी चाहिए” आरती ने राज की तरफ इशारा करते हुए कहा।

“मैं माफी क्यों मांगू मेरा कसूर क्या है”, राज ने गुस्से से कहा।

“हाँ आप माफी क्यों मांगेगे मर्द जात ने भी कभी औरत से माफी माँगी है”, निशा ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा- सारा कसूर तो हमारा ही हैं, जो हम आप जैसे लोगों को बर्दाश्त करती हैं।

“चुप करो प्लीज, मैंने सॉरी बोल दिया ना।

“ठीक है मैडम हम आपकी बात मान लेते हैं, लेकिन यह सर हमारे कमरे में नहीं आएंगे, निशा ने सख्त लहजे में कहा।

“ठीक है मैं देखती हूं आप अपने कमरे में जाओ” रीमा मैडम ने कहा निशा और आरती चली गई।

दो दिन बाद फिर पेपर था विद्यार्थी आकर अपने नंबरों पर बैठ रहे थे। राज आज कमरे में नहीं था उसको कमरे में ना देख कर विद्यार्थी आपस में बातें कर रहे थे। आज वह सर नहीं आया लगता है। उसकी डयूटी काट

दी गई। “हाँ मुझे भी यही लगता है इन जैसे लोगों के साथ यही होना चाहिए”,

दूसरे विद्यार्थी ने कहा। “मैं तो कहता हूँ इन जैसों को नौकरी से ही निकाल देना चाहिए। इन जैसों के कारण ही अध्यापकों का पेशा बदनाम हुआ है”, एक और ने अपना मत प्रकट किया।

पिछली सीट पर बैठी निशा और आरती एक-दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी।

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं