रेल में एक भिखारी भीख माँग रहा था। वहाँ उसे एक सेठ जी दिखे। अच्छे पैसे मिलेंगे, यह सोचकर वह सेठ से भीख माँगने लगा। सेठ ने कहा, “तुम माँगते ही हो, क्या कभी कुछ देते भी हो?”
तुरंत उनके पास गया और बोला, “आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल है, आप मुझे भीख दीजिए, बदले में मैं आपको कुछ फूल दूँगा।”
सेठ ने कहा, “वाह, आज तुम भी मेरी तरह एक भिखारीः “साहब, मैं भिखारी हूँ, किसी को क्या व्यापारी बन गए हो। “सेठ ने पैसे दिए, फूल लिए और दे सकता हूँ?” सेठ ने कहा,
“जब किसी को कुछ नहीं सकते तो तुम्हें माँगने का भी कोई हक नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ। अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो, तभी मैं तुम्हें बदले में कुछ दे सकता हूँ। सेठ वहाँ से चला गया।
सेठ की बात भिखारी के दिन में उतर गई। वह सोचने लगा कि मैं किसी को क्या दे सकता हूँ? भिखारी लगातार इस पर सोचता रहा था। दूसरे दिन उसकी नजर स्टेशन पास के फूलों पर पड़ी। उसने कुछ फूल रख लिए। वह ट्रेन में भीख माँगने पहुँचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह कुछ फूल दे देता। लोग भी फूल खुशी से अपने पास रख लेते। वह ऐसा ही करने लगा। उसने महसूस किया कि अब उसे ज्यादा भीख मिलने लगी है।
एक दिन उसे रेल में फिर वही सेठ मिले। वह तुरंत उसके पास गया और बोला, “आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल है, आप मुझे भीख दीजिए, बदेल में मैं आपके कुछ फूल दूंगा।”
सेठ ने कहा, ‘वाल, आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो। सेठ ने पैसे दिए फूल लिए और चला गया। भिखारी फिर सोचने लगा। उसकी आंखें चमकने लगीं, उसे लगा कि अब वह अपना जीवन बदल सकता है। वह ट्रेन से उतरा और खुशी में ऊपर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ।” अगले दिन भिखारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा। एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति यात्र कर रहे थे। उनमें से एक ने-दूसरे को प्रणाम किया और कहा “क्या आपने मुझे पहचाना?” दूसरे ने मना कर दिया।
भिखारी ने कहा, “सेठ जी, मैं वही भिखारी हूँ। जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी बार बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ। नतीजा यह कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ। आपने मुझे प्रकृति का नियम बताया कि हमें सब कुछ तभी मिलता है, जब हम कुछ देते हैं।
ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–Anmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)
