Hindi Story: घमंडी लाल किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से अपने परिवार के लिये दो वक्त की रोजी-रोटी का प्रबन्ध कर पाता था। इसके परिवार के पास न तो कोई जमीन-जायदाद थी और न ही खेती-बाड़ी जिससे यह कुछ कमाई कर सके। घर के अंदरूनी हालात इतने कमजोर होने के बावजूद भी घमंडी लाल पूरे गांव में अपने नाम का रौब रखने के लिये हर वक्त दिखावे का सहारा लेकर घमंड और अहंकार में डूबा रहता था। एक दिन शहर से एक लॉटरी कम्पनी के अफसर ने आकर इनके परिवार को बताया कि घमंडी लाल की बीस लाख रुपये की लॉटरी निकली है।
जैसे ही उस अफसर ने घमंडी लाल को बुलाने के लिये कहा तो इनके घर वालों ने सोचा कि सारी उम्र दिखावटी जीवन जिया है। अब उम्र के इस पड़ाव में इतनी बड़ी रकम जीतने की खबर सुनकर अचानक कहीं इनकी तबीयत खराब न हो जाये। इनके घर वालों ने आपस में सलाह करके यह तय किया कि पहले गांव के पुजारी जी को बुला लिया जाये और फिर उनकी मौजदूगी में घमंडी लाल जी को यह खबर सुनायेंगे। यदि फिर भी इन्हें कोई परेशानी होती भी है तो पुजारी जी तुरंत इन्हें संभाल लेंगे। उसी वक्त तुरंत गांव के पुजारी जी से संपर्क किया गया। पुजारी जी जो कि एक बहुत ही ज्ञानवान और सुलझे हुए इंसान थे उन्होंने सभी घरवालों को पूरा भरोसा दिलाया कि आप किसी किस्म की चिंता न करे, मैं खुद घमंडी लाल को बड़े ही तरीके से लॉटरी के इनाम के बारे में बता दूंगा।
पुजारी जी को देखते ही घमंडी लाल ने हैरान होते हुए कहा कि हमारे घर में तो सब ठीक-ठाक चल रहा है, फिर आप हमारे यहां क्या करने आये हो? लगता है आज फिर मंगल-शनि ग्रह का डर दिखा कर कुछ न कुछ रकम ऐंठने का चक्कर चलाओगे। पुजारी जी ने कहा कि मैं ऐसा कुछ भी नहीं करने आया जैसा तुम सोच रहे हो, बल्कि मैं तो तुम्हें एक अच्छी खबर सुनाने आया हूं। पुजारी जी ने कुछ घर-परिवार की बात करने के बाद घमंडी लाल से कहा कि भगवान ने तुम्हारे कुछ अच्छे कर्मों को देखते हुए तुम्हारी बीस लाख रुपये की लॉटरी निकाली है। इतना सुनते ही घमंडी लाल पुजारी जी से बोले कि मेरे साथ क्यूं ऐसा मज़ाक कर रहे हो? पुजारी जी ने अच्छे से तसल्ली देते हुए कहा कि यह कोई मज़ाक नहीं बल्कि बिल्कुल सच्ची खबर है। अचानक इतना पैसा मिलने से घमंडी लाल और अधिक घमंड के जोश में आकर बोले- ‘अब मैं कुछ ही दिनों में अपने सारे परिवार की सभी परेशानियां खत्म कर दूंगा। सारे इलाके के लोग चाहे मुझे कुछ भी कहते रहे, लेकिन यह सब मेरी अक्ल और होशियारी का नतीजा ही है जो मुझे इतनी बड़ी रकम मिली है।’
पुजारी जी ने घमंडी लाल से कहा कि यह ठीक है कि कभी-कभी किस्मत हमारा साथ देती है लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिये कि परमात्मा हमारे कर्मों के हिसाब से हमें फल-फूल से लेकर सोना-चांदी तक देते रहते हैं। इतना सब कुछ पाने के बाद भी हम उसका शुक्रिया अदा करने की बजाय अपनी ही दुनिया में मगरूर रहते हैं। हम हर किसी के सामने अपना सिर घमंड से ऊंचा करके यह कहते हैं कि यह सब कुछ हम कमा कर लाये हैं। देखते ही देखते घमंडी लाल का घमंड और अधिक बढ़ चुका था। जिस प्रकार एक आम आदमी अहंकार में डूब कर अपने जीते जी तो हर किसी को नीचा दिखाता ही है, साथ ही यह इच्छा भी करता है कि उसके मरने के बाद भी दुनिया-जहां में सदियों तक उसके नाम के चर्चे होते रहे। इसी तरह घमंडी लाल ने भी थोड़ा उतावले होते हुए कहा कि अब मैं अपना अभी का जीवन तो संवार ही लूंगा, मुझे यह बताओ कि मुझे स्वर्ग कैसे मिल सकता है?
पुजारी जी ने कहा कि जिस तरह की तुम बातें करते हो, इस तरह से किसी को स्वर्ग नहीं मिलता। घमंडी लाल ने कहा- ‘आप जो कुछ कहो मैं वो सब कुछ करने को तैयार हूं, लेकिन मुझे हर हाल में स्वर्ग में ही जाना है। यदि आप चाहते हो मैं कुछ पूजा-पाठ भी करवा दूंगा। पुजारी जी ने कहा कि यह सब कुछ करने के बावजूद भी तुम्हें स्वर्ग नहीं मिल पायेगा। अब घमंडी लाल जी ने जोर डाल कर कहा कि फिर स्वर्ग कैसे मिलता है? पुजारी जी ने कहा कि स्वर्ग पाने के लिये तुम्हें मरना पड़ेगा। इसके बाद भी कोई यह दावे से नहीं कह सकता कि स्वर्ग के दरवाजे तुम्हारे लिये खुल ही जायेंगे। पुजारी जी की यह सारी नकारात्मक बातें सुन कर घमंडी लाल उनसे नाराज होते हुए बोला कि मुझे ठीक से बताओ कि स्वर्ग को पाने की सबसे आसान राह कौन सी है? पुजारी जी ने घमंडी लाल से कहा कि तुमने यदि कभी कोई धार्मिक पुस्तकें पढ़ी हां तो तुम्हें इतना जरूर मालूम होगा कि पुराने जमाने में बड़े से बड़े राजा भी अपने बच्चों को धर्मगुरुओं के पास भेज देते थे ताकि उनका सही मार्गदर्शन हो सके। उनके बच्चे राजसी ठाठ-बाट का सुख भोगते हुए अहंकार और घमंड के शिकार न हो पाये। साधु-संत ही वो लोग है जो हमारे जीवन की दिशा को बदल सकते हैं।
घमंडी लाल ने पुजारी जी के यह अल्फाज़ सुनकर कहा कि आप तो न जाने किस गुजरे हुए जमाने की बात कर रहे हो। आजकल अच्छे साधु-संत आसानी से मिलते ही कहां है जो कोई उनसे कुछ धर्म-कर्म की बातें सीख पाये। पुजारी जी ने घमंडी लाल को बताया कि आज यदि अच्छे साधु-संत नहीं मिलते तो हम अपने गुरुओं द्वारा लिखे हुए ग्रन्थों का सहारा तो ले सकते हैं। हर प्रकार के धार्मिक ग्रन्थ और पुस्तकें भी ज्ञान का अनमोल खज़ाना होते हैं। घमंडी लाल ने पुजारी जी से कहा कि आप जब से आये हो मेरे घमंड का रोना रोये जा रहे हो। आखिर आपको मेरे अंदर कहां से घमंड नज़र आ रहा है।
पुजारी जी ने कहा कि घमंड कोई समान या वस्तु नहीं होती। घमंड तो एक भाव है जो मनुष्य की बुद्धि को नष्ट कर देता है। अहंकार से ज्ञान का तो नाश होता ही है साथ ही यह मनुष्य के सारे काम बिगाड़ देता है। इतिहास इस बात का गवाह है कि कंस से लेकर रावण तक की मृत्यु उनके घमंड के कारण ही हुई थी। मेरी एक बात और कभी मत भूलना कि बड़े से बड़ा शत्रु भी इंसान को उतना नुकसान नहीं पहुंचा सकता जितना कि उसका अपना घमंड। पुजारी जी की बातें सुनकर जौली अंकल इस बात को खुशी-खुशी कबूल करते हैं, यदि विनाश से बचना है तो घमंडी लाल की तरह घमंड करने की बजाए हमें हर प्रकार के घमंड को सदा के लिये त्यागना होगा। घमंडी इंसान एक फूले हुए गुब्बारे की तरह होता है, जिसके बाहर भी केवल हवा होती है और अंदर भी केवल हवा।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
