एक बार एक भारतीय सज्जन ने विचार किया कि हमारे भारत में इतनी अशांति एवं गड़बड़ी क्यों है? अन्य देशों में नहीं। वे एक बार जापान गये। रेल में सफर कर रहे थे। उन्होंने देखा कि जापान का एक व्यक्ति सुई और धागे से सीट का फटा कवर सिल रहा था।
उस सज्जन ने उस व्यक्ति से कहा कि, “यह काम तो रेलवे कर्मचारियों का है। आप क्यों कर रहें है? तो उस व्यक्ति ने कहा देश की संपत्ति हमारी भी संपत्ति है। इसकी सुरक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। इतना सुनते ही भारतीय सज्जन की आंखें खुल गई। उन्होंने विचार किया कि यदि भारत का प्रत्येक नागरिक यह विचार करने लगे तो संपूर्ण भारत उन्नति के पथ पर अग्रसर हो जायेगा।
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