Hindi Story: रोज की तरह आज भी जब चीकू अपने स्कूल देर से पहुंचा तो उसकी मैडम ने उससे पूछा कि आज कौन-सा नया बहाना लेकर आये हो। चीकू ने सिर झुका कर थोड़ा डरते हुए कहा कि मैडम आज तो स्कूल की तैयारी में इतनी देर हो गई कि कोई नया बहाना सोचने का समय ही नहीं मिला। बहानेबाजी का इतना बढ़िया मजाक सुनकर सारी क्लास ठहाकों से गूंज पड़ी।
चीकू की मैडम सोचने लगी कि हर मां-बाप अपने बच्चों को बचपन से सदा ही सच बोलने के लिये प्रेरणा देते आये हैं, लेकिन फिर भी बात को घुमा-फिरा कर एक शानदार मदमस्त बहाने की शक्ल देने में हर किसी को महारत कहां से और कैसे हासिल हो जाती है? क्या कोई इस पहेली का जवाब ढूंढ पाया है? बहानेबाजी एक ऐसा गुनाह बनता जा रहा है जो हर इंसान अपने जीवन में बार-बार करने से भी परहेज नहीं करता। खुद को ज्ञानी समझने वाले अपना यही तर्क देते हैं कि बहानेबाजी करके न तो वो कोई झूठ बोलते हैं और न ही कोई पाप कर रहे हैं।
दोस्त-यार या रिश्तेदारों के बहाने बनाने पर तो अक्सर लोगों को गुस्सा करते देखा जा सकता है, परंतु प्रेमी-प्रेमिका के बहानों पर तो हर किसी का प्यार सावन की घटा के समान बरसने लगता है। नये जमाने के साथ बहाने बना कर एक-दूसरे को बेवकूफ़ बनाना भी गुनाह की जगह एक फैशन बनता जा रहा है। सबसे अधिक हैरान करने वाली बात तो यह है कि सदियों पुराने बहाने आज भी कामयाबी की कसौटी पर खरे उतरते हैं। हमारी सरकार कितना भी चिल्ला-चिल्लाकर क्यूं न कह ले कि सिगरेट और दारू पीने से सेहत को नुकसान होता है, लेकिन हर पीने वालों को सिर्फ पीने का कोई न कोई छोटा-सा बहाना चाहिये। दफ्तर में किसी का बर्थडे हो या किसी साथी को ऊपर की कुछ थोड़ी बहुत कमाई हो जाये तो फिर दारू पार्टी करने का इससे बढ़िया बहाना और क्या हो सकता है? कुछ महाशय तो केवल सिगरेट इस बहाने से पीते हैं कि उनको सुबह प्रेशर नहीं बनता। दोस्तों के साथ मौज-मस्ती करनी हो या अपने प्रेमी के साथ अच्छी-सी फिल्म देखने का कार्यक्रम, बिना घरवालों से बहाना बनाये तो पूरा हो ही नहीं सकता।
आधुनिक जीवनशैली के माहौल को देखे तो ऐसा महसूस होता है कि शायद बिना बहानों के हम कामयाबी की मंजिल को पा ही नहीं सकते। स्कूल, दफ्तर या अन्य किसी रिश्तेदार के घर आप चाहे किसी भी कारण से देरी से पहुंचे, रास्ते में ट्रैफिक जाम का बहाना बिल्कुल सटीक बैठता है। इंसान, इंसान को तो क्या अपने स्वार्थीपन के चलते भगवान को भी अपने बहानों के जाल में उलझाने का प्रयास करता रहता है। पैसा कमाने के लालच में कुछ लोग साधु, संतों के भेष में दुनिया को ऐसे हसीन ख्वाब दिखाते हैं कि भोले-भाले लोग अपने खून-पसीने से कमाया हुआ सारा धन इनके चरणों में अर्पित कर देते हैं। जब कुछ समय में ही हसीन ख्वाब टूट कर बिखरने लगते हैं तो ऐसे लोग एक से बढ़ कर एक मदमस्त बहाने बना कर आम लोगों को गुमराह करने लगते हैं।
कुछ बेचारे सीधे-सादे लोग महंगाई और गरीबी के बोझ तले इतना दब चुके हैं कि वो एक ही बहाने को बार-बार इस्तेमाल करके अपना काम चलाते हैं, जबकि चंद चतुर लोग हर बार बिना कोई भूमिका बांधे और चेहरे पर शिकन आये हुए नया बहाना में माहिर होते हैं। बस, रेल की टिकट लेनी हो या किसी धार्मिक स्थल के दर्शन करने हो, किसी दफ्तर से कोई काम जल्द करवाना हो तो ऐसे लोग अपने सगे रिश्तेदारों को मारने तक से गुरेज नहीं करते। ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर बड़े से बड़ा रईस भी पुलिसवालों के सामने ऐसे अजीबोगरीब बहाने बनाता है कि यदि आज उसका चालान कट गया तो उसका सारा परिवार भूखा ही मर जायेगा। अमीर लोग अपने पैसे के बल पर मन मुताबिक फैसला करवाने के लिये वकीलों के माध्यम से हर दिन नये बहानों का सहारा लेकर बरसों तक केस को कोर्ट-कचहरियों में लटका देते हैं।
कभी रोजमर्रा के जीवन की परेशानियां, कभी अधिक काम का दबाव और कभी काम न मिलने की टेंषन के चलते आम आदमी किसी न किसी बहाने का सहारा लेकर मौज-मस्ती का रास्ता ढूंढ ही लेता है। दारू, सिगरेट और तन्हाई का रिश्ता तो मिर्जा गालिब और देवदास के जमाने से चला आ रहा है। पुरुष वर्ग तो इन चीजों का खुल्ले तौर पर मजा लेते ही हैं, लेकिन आजकल की मॉर्डन लड़कियों को यह लुत्फ उठाने के लिये कोई न कोई बहाना बनाना पड़ता हैं। कुछ लड़कियां सिगरेट और शराब का आनंद लेने के लिये खुद को मर्दो के बराबर साबित करने के बहाने को बैसाखी बना लेती है। यदि इस बात को मान भी लिया जाये कि कभी-कभार बहानेबाजी से कोई रुका हुआ काम बन भी जाता है, लेकिन अंत में यही देखने को मिलता है कि आम आदमी बहानेबाजी से अपने दुःखों को दूर करने की बजाए और अधिक बढ़ा लेता है। जो लोग अपनी मंजिल को पाना जानते हैं वो कहीं न कहीं से अपना रास्ता बना ही लेते हैं और जो आलस्य के सताये हुए होते हैं उनके पास सैकड़ों बहानों का भंडार होता है।
हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिये कि ईमानदारी का फल एक दिन में नहीं बल्कि इसे पकने में वर्षों लगते हैं। यदि आप जीवन में कामयाबी की ओर आगे बढ़ना चाहते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आपकी इच्छायें सीमा से आगे न बढ़ने पायें। जब आप बहानेबाजी को भूल कर शुभ प्रयास करते हैं तो आपका मन आनन्दित हो उठता है, ऐसे में इन प्रयासों का फल प्राप्त होने पर आपकी प्रसन्नता और भी कई गुणा बढ़ जाती है। इसलिये हर कार्य को हंसते-खेलते खुशी से करने वालों को कोई भी कार्य मुश्किल नहीं लगता। बहानेबाजी से यदि कोई सबसे अधिक पीड़ित है तो वो है हमारा आज का लेखक। मुद्दा चाहे कोई भी हो अधिकांश संपादक महोदय कोई न कोई नया बहाना ढूंढ कर अच्छे लेखकों की रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने के लिये टालमटोल करते रहते हैं। आखिर में जौली अंकल बहानेबाजी करके काम से मन चुराने वालों को इतना ही कहते हैं कि जिंदगी में बहानेबाजी से नहीं श्रेष्ठ कर्म करने से खुशी और सफलता मिलती हैं। जिंदगी में कामयाबी हासिल करना साइकिल चलाने जैसा होता है जब तक आप चलते रहते हैं तो ठीक है वरना गिर जायेंगे।
ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं–
