मीनाक्षी लेखी की कड़ी मेहनत और बोलने की कला, ने उन्हें राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। देश के नामी-गिरामी अधिवक्ता पी.एन. लेखी की पुत्रवधू मीनाक्षी लेखी अपने ससुर से काफी प्रभावित हैं और यही कारण है वह उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रहीं हैं।

पहले वकालत फिर प्रवक्ता और अब सांसद कितना मुश्किल है इतनी जिम्मेदारियां एक साथ निभाना?
नई पारी नई जिम्मेदारियां भी लाती है और मेरे साथ भी वही हो रहा है। जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं तो काम भी बढ़ गया है। वैसे आपने तीसरे पक्ष के बारे में नहीं पूछा, जो परिवार है। राजनीति का दबाव कई बार परिवार और पेशे दोनों में असंतुलन पैदा करता है। मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं सभी मोर्चों पर कामयाब रहती हूं क्योंकि मुझे मेरे परिवार और मित्रों का सहयोग मिलता रहा है।

आपको राजनीति में आने की जरूरत क्यों पड़ी? परिवार के लिहाज से क्या ये सही फैसला रहा?
मैं फैसले को सही या गलत के तौर पर नहीं मानती, शायद समय और भाग्य का मेल था कि मैं राजनीति में उतरी। मैं कॉलेज के समय राजनीतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थी। मेरा परिवार हर कदम पर मेरे साथ रहा और आज मैं सफलता की सीढिय़ां चढ़ रही हूं। मेरा मानना है कि राजनीति ही समाज में पॉजिटिव बदलाव ला सकती है। 2002-03 में शांति मुकुंद हॉस्पीटल रेप केस मामले में मैं खुद पीडि़ता की तरफ से लडऩे के लिये उतरी थी। उस वारदात में पीडि़ता की आंखें फोड़ दी गई थीं। मैंने तब आरोपी के लिये मृत्युदंड की मांग की थी। बदलाव तो आया है, राजनीति इस बदलाव को लाने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है।

अमन लेखी, आपके पति से आपकी मुलाकात कब और कैसे हुई थी?
हम दोनों अदालत में मिले थे। कई मामलों में एक-दूसरे को सलाह देते या लेते थे। एक दिन अमन ने प्रपोज किया तो मैंने स्वीकार कर लिया। मैं अपने परिवार में काफी हिल-मिल गई हूं। इसका ज्यादा श्रेय परिवार के लोगों को जाता है, जिसने हर कदम पर मेरा साथ दिया है। मुझे अपने पति के साथ बच्चों से भी काफी सहयोग मिलता है। आप पर यह आरोप लगते हैं कि आपको राजनीति में आने के लिए ज्यादा

संघर्ष नहींकरना पड़ा और लेखी सरनेम का आपको फायदा भी मिला?
मेरे ससुर ने बरसों की मेहनत और लगन से समाज में जो नाम स्थापित किया है उसके कारण लेखी परिवार की छवि एक ईमानदार और बेदाग फैमिली की रही है। मैं मानती हूं कि इससे फायदा मिला। मुझे अपनी पहचान बनाने के लिये जूझना नहीं पड़ा। हालांकि इसके साथ ही मेरे कंधों पर परिवार की छवि को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी आ जाती है। लेखी परिवार से होने का दूसरा फायदा मुझे ये मिला कि मुझे अपने रोजमर्रा के खर्चों के बारे में सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। मेरे पति अमन लेखी इसका ध्यान रखते हैं, ताकि मैं राजनीति पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकूं। पर अगर मेहनत की बात करें तो आपने खुद देखा है कि किस तरह मैं नई दिल्ली लोकसभा की गली-गली में वोट मांगने गई थी। मौका तो मिल सकता है पर बिना मेहनत आप उस मौके का फायदा नहींउठा सकते। मुझे मौका मिला पर मेरी मेहनत से वह रंग लाया।

राजनीति में महिलाओं के लिये क्या चुनौतियां हैं? आपकी पार्टी में महिलाओं की स्थिति क्या है?
जहां तक महिलाओं का प्रश्न है मेरी पार्टी की स्थिति बहुत बेहतर है। आपको मालूम ही होगा कि देश में भले ही महिला आरक्षण नहीं लागू हुआ हो, भाजपा में 33 प्रतिशत आरक्षण घोषित हो चुका है। हमारी पार्टी में महिलाओं को एक परिवार की तरह सुरक्षा दी जाती है।

राजनीति में आपका लक्ष्य क्या है?
मैं ज्यादा महत्वाकांक्षी नहीं हूं। मेरा मानना है कि जो आपकी किस्मत में है तो वो आपको जरूर मिलेगा।

पहले आप भाजपा जैसी बड़ी पार्टी के मीडिया सेल में प्रवक्ता थींफिर सांसद बनी पर आपको मंत्री नहींबनाया गया?
बहुत ज्यादा महत्वकांक्षी नहींहूं। मुझे लगता है जो मुझे मिलना है वह मिल कर ही रहेगा तो ज्यादा सोचती नहीं। वैसे भी बड़ी जिम्मेदारियां हैं तो दबाव तो रहता ही है।

राजनीति और वकालत के बीच रसोई तो मुश्किल में पड़ जाती होगी? क्या कुछ बनाती और खाती हैं आप?
वास्तव में मेरी रसोई मेरे व्यस्तता के चलते बेहद प्रभावित होती है। मुझे इस बात का बहुत बुरा लगता है कि मैं रसोई के लिये समय नहीं निकाल पाती। पर मैं रसोई में बहुत माहिर हूं। जब मैं मास्टर कुक शो देखती हूं तो हमेशा सोचती हूं कि इसमें हिस्सा लेती तो जरूर जीतती।

महिलाओं से क्या कहना चाहेंगी?
महिलाओं से मैं यही कहूंगी कि आज की नारी न तो कमजोर है और न ही असहाय। अपने आपको कमजोर न समझें। एक जीवन मिला है, इसे खुलकर जीएं। किसी का जुल्म न सहे और खुद पर भरोसा करना सीखें। द्य