मेरे पापा का ट्रांसफर गांव में होने कारण मैं अपने दादा-दादी के पास रहकर पढ़ती थी। घर में तीन बुआ, चाचा, चाची सभी लोग साथ में रहते। मुझे सभी बहुत प्यार करते थे, मैं सभी की दुलारी थी। मेरी गलती पर मुझे कभी डांटा नहीं जाता था। हमारे पड़ोस में एक मिठाई की दुकान थी। रोज उस दुकान के अंकल मुझे सवेरे कभी गरम जलेबी, कभी गुलाब जामुन तो कभी मिठाई देते थे। एक दिन मेरी बुआ के मना करने के बाद भी मैं उनसे जलेबी मांगने चली गई, जब मैं उनकी दुकान से जलेबी खा कर वापस आई, मेरी बुआ, जो सब देख रही थी, उन्होंने मुझे जोरदार थप्पड़ मारा और कहा, कभी किसी से मांग कर नहीं खाते। उस दिन से मैं उनके बुलाने पर भी उनकी दुकान की तरफ देखती नहीं थी। यह बात मुझे अभी तक याद है। ऐसी बातें जो हमें अच्छा सबक देती हैं जिंदगी भर याद रहती हैं।