गर्मियों में मैं अपने मायके से लौट कर आई तो वहां से लाया हुआ सूट का कपड़ा सिलने के लिए दर्जी के पास गई। मुझे सिर्फ चूड़ीदार पजामे का नाप देना था और कुर्ते के नाप के लिए अपना पुराना कुर्ता लेकर गई थी। मैंने दर्जी के असिस्टेंट को चूड़ीदार का नाप दिया तो दर्जी ने कुर्ते का नाप पूछा। मैंने कहा कि नाप का कुर्ता इसी सूट के कपड़े के अंदर रखा है। जब दर्जी ने कपड़े की तह खोली तो उसमें मेरे बेटे की बनियान निकली। दर्जी बोला क्या कुर्ता इस नाप का बनेगा? वहां खड़े सभी लोग मुस्कुराने लगे और मुझे अपनी बेवकूफी पर बहुत शर्म आई। जल्दबाजी में मैंने सूट के कपड़े में कुर्ते की जगह बनियान लपेट ली थी, नाप का कुर्ता तो मेरे हाथ में पकड़ी हुई थैली में था।
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