Loneliness and Health
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Summary: अकेलेपन सेहत के लिए छुपा खतरा

अकेलापन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कमजोर करता है, डिप्रेशन, दिल की बीमारी और इम्युनिटी पर नकारात्मक असर डालता है।

Loneliness and Health: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग बेशक अपना समय लोगों के बीच बिताते हैं लेकिन फिर भी उनके अंदर अकेलेपन की भावना बढ़ रही है। किसी भी व्यक्ति के अंदर अकेलेपन की भावना न सिर्फ उसे भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है बल्कि व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है। कई रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय से अकेलेपन से जूझ रहा व्यक्ति एंजायटी डिप्रेशन यहां तक की हार्ट प्रॉब्लम का शिकार भी हो सकता है। आईए जानते हैं इस लेख में हमारा अकेलापन हमें बीमार क्यों करता है।

क्या है अकेलापन: अकेलेपन का अर्थ केवल अकेले रहने से नहीं है बल्कि उस भावना या स्थिति से है जो व्यक्ति सबके साथ होकर भी अकेला महसूस करता है। वह अपने आसपास एक व्यक्ति तलाश करता है जिससे वह अपने मन की बात कर सके। अकेलापन एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक स्थित है इसे अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग प्रकार से महसूस कर सकते हैं।

अकेलेपन का मानसिक स्वास्थ्य पर असर: अकेलेपन की स्थिति में व्यक्ति का मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे वह डिप्रेशन जैसी स्थिति में पहुंच सकता है।

अकेलापन महसूस करने वाला व्यक्ति जब अपनी बातें किसी से साझा नहीं कर पाता तो वह ओवरथिंकिंग का शिकार होता है जिससे उसका दिमाग हर वक्त थका हुआ महसूस करता है।

अकेलेपन के कारण होने वाले डिप्रेशन और ओवरथिंकिंग की वजह से नींद के गुणवत्ता में भी कमी आती है जिससे व्यक्ति थका हुआ और चिड़चिड़ा रहता है।

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अकेलेपन का शारीरिक स्वास्थ्य पर असर: अकेलेपन की स्थिति के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है और हैप्पी हार्मोन का स्तर घटता है जिस कारण हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है, शरीर की रूप प्रतिरोधक क्षमता घटती है और शरीर में दर्द और थकान की समस्या होती है।

अकेलेपन का व्यवहार पर असर: अकेलेपन की भावना से ग्रसित व्यक्ति लोगों से और अधिक दूरी बनाते हैं जिस कारण वह अत्यधिक चुप गुस्सैल और नकारात्मक सोच से भर जाता है कई बार वह गलत आदतों का भी शिकार हो जाता है।

अकेलेपन की भावना से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है जो की डिप्रेशन, हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियों का कारण होता है।

शरीर में लगातार बढ़ते तनाव और नकारात्मक भावना के कारण डोपामिन और सेरोटोनिन जो कि हैप्पी हार्मोन कहलाते हैं शरीर में इनका स्तर गिरता है जिससे व्यक्ति उदास और निराश महसूस करता है।

अकेलेपन के कारण व्यक्ति नकारात्मक विचारों में खुद को फसाता जाता है जो की धीरे-धीरे उसे मानसिक रूप से अधिक बीमार बनाता है।

अपने परिवार और दोस्तों के संपर्क में रहें उनसे अपनी बातें साझा करें।

अच्छा दिनचर्या अपनाएं, अपने दिनचर्या में योग, व्यायाम, मेडिटेशन शामिल करें। किताबों से दोस्ती करें अपने पसंद के काम में खुद को व्यस्त करें कुछ नए स्किल सीखे।

सोशल मीडिया की जिंदगी से अपनी तुलना ना करें। आपके लिए यह समझना जरूरी है सोशल मीडिया एक भ्रम है, वास्तविक जीवन से खुद को अधिक जोड़े।





निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...