मेरी सास के घुटनों में समस्या है। चिकित्सक ने घुटना प्रत्यारोपण की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि सर्जरी से वह 3 माह तक चलने-फिरने की स्थिति में नहीं होंगी। उनका वजन भी ज्यादा है और मैं कामकाजी महिला हूं, ऐसे में उनकी देखभाल करना संभव नहीं होगा। मैंने मिनिमल इनवैसिव नी रिप्लेसमेंट के बारे में सुना। यह कितना फायदेमंद होगा?
– दिव्या अग्रवाल, मसूरी
टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सबसे सफल सर्जिकल प्रक्रिया है। इसने घुटनों के ऑथ्र्रराइटिस से पीडि़त लाखों लोगों को नया जीवन दिया है। पारंपरिक सर्जरी में घुटनों के जोड़ तक पहुंचने के लिए हम जांघ की मांसपेशियों को दो हिस्सों में अलग करते हैं। यह मांसपेशियां शरीर की सबसे मजबूत मांसपेशियों में से एक हैं और यह चलने में सहायक होती हैं। जब हम मांसपेशियों को अलग
करते हैं तो सर्जरी के दौरान काफी मात्रा में रक्तस्राव होता है और सर्जरी के बाद दर्द महसूस होता है, साथ ही इसके ठीक होने में लंबा वक्त लगता है। ऑपरेशन के बाद दर्द और उसमें सुधार में लंबा समय लगने से बहुत से मरीजों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता है और वे इस सर्जरी कराने के प्रति हतोत्साहित होते हैं। इस असुविधा को दूर करने के लिए हाल के वर्षों में एमआईएस तकनीक को अपनाया गया है। इस तकनीक में केवल त्वचा के ऊपर ढांचागत चीरा लगाया जाता है।
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