मुझे डर है कि मैं वायरल हेपैटाइटिस से ग्रस्‍त हूं। क्या यह वक्त के साथ लिवर को नुकसान पहुंचाएगा? क्या सिरोसिस या लिवर कैंसर होने की आशंका ज्यादा है? इसे होने से रोकने के सर्वोत्तम उपाय क्या हैं?

मानव शरीर में लिवर (यकृत) एक महत्वपूर्ण अंग है, जो कई सारे काम करता है। इनमें पोषक तत्वों को लेना, खून छानना और संक्रमण से लड़ना भी शामिल हैं। हेपैटाइटिस की बीमारी (यकृत सूजन) अक्सर विषाणु से होती है। इनमें से कुछ विषाणु हमारे शरीर में काफी समय के लिए रह सकते हैं और वे लिवर खराब कर सकते हैं। इससे सिरोसिस और कई बार लिवर कैंसर तक हो जाता है। वायरल हेपैटाइटिस में हेपैटाइटिस ए और ई की बीमारी आम तौर पर दूषित पानी और भोजन से फैलती है, जबकि हेपैटाइटिस बी और सी खून और शरीरद्रव्य के माध्यम से फैलती है। हेपैटाइटिस के मरीज की शुरुआत में आंखें और मूत्र पीली (पीलिया) हो सकती हैं। आम तौर पर शरीर रुग्ण हो सकता है और पेट संबंधी थोड़ी गड़बड़ियां आ सकती हैं। कई बार ये लक्षण काफी कम होते हैं और कुछ मामलों में तो लोगों को यह भी पता नहीं चलता कि उन्हें वायरल हेपैटाइटिस है। ऐसी बीमारी में अगर लक्षण कम भी हों, तब भी मेडिकल सलाह के लिए कहा जाता है। यह साबित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है कि अगर मरीज को हेपैटाइटिस है, तो कौन-सी है। आम तौर पर हेपैटाइटिस ए और ई स्वयं-सीमित हैं और इमें कुछ हफ्तों के अंदर स्थिति सुधरने लगती है। लेकिन कुछ मामलों में हेपैटाइटिस की बीमारी तेजी से बढ़ती है। इससे लिवर काम करना बंद करता है और यह घातक हो सकता है। ऐसे कुछ मरीजों को लिवर बदलने की जरूरत होती है, जो अच्छा नतीजा देता है। गर्भवती महिला में मुख्यतः हेपैटाइटिस ई का संक्रमण काफी गंभीर हो सकता है। हेपैटाइटिस बी और सी के विषाणु हेपैटाइटिस ए और ई की तरह घातक हेपैटाइटिस के कारण बन सकते हैं। लेकिन मुख्य अंतर यह है कि कुछ मरीजों में हेपैटाइटिस बी और सी बगैर किसी लक्षण के लंबे समय तक रह सकती हैं और धीरे-धीरे ये लिवर खराब कर देती हैं। वायरल हेपैटाइटिस का यह दीर्घकालिक रूप सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारक बन सकता है। हेपैटाइटिस ए और हेपैटाइटिस बी का इलाज है, क्योंकि इनके टीके उपलब्ध हैं। हेपैटाइटिस ई को भी रोका जा सकता है, अगर हम अपने खाने की आदतों का ख्याल रखें और दूषित पानी व भोजन ग्रहण न करें।

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