क्या आप जानते हैं कि फिलिपींस में एक व्यक्ति से नाइट कर्फ्यू का नियम तोड़ने पर 300 स्क्वाट करवाए गए जिससे वह बहुत दर्द में रहा और उसकी मृत्यु हो गई। जी हां यह वायरस से जुड़ा एक अनोखा किस्सा है और ऐसे ही बहुत से किस्से हम एक साल पहले देख चुके हैं। लेकिन जैसे जैसे वायरस फिर से फैलता जा रहा है हम दुबारा से पिछले साल वाले कुछ नियम नहीं देखना चाहते। हम इस साल भी निम्न 10 चीजों को तो बिलकुल नहीं देखना चाहते।

लॉकडाउन : बहुत से लोगों का मानना है कि लॉकडाउन ने बहुत सी जानें बचाने में हमारी मदद की तो बहुत से लोग मानते हैं कि इसी की वजह से बहुत सी जान चली गई। लॉकडाउन की वजह से बहुत से रोजगार चले गए। लोगों की नौकरियां छूट गई, बिजनेस में बहुत नुकसान होने की वजह से बहुत से व्यापारियों ने सुसाइड कर लिया और गरीबी की वजह से बहुत से लोगों की तो भूख के कारण मृत्यु हो गई। इसलिए हम दूसरा लॉकडाउन नहीं चाहते।

मास्क के बिना ड्राइविंग करने का चलान : अगर आप अकेले गाड़ी में है और मास्क नहीं लगाया है तो भी आपका चलान हो सकता है। लेकिन अकेले व्यक्ति को खतरा गाड़ी की स्टीयरिंग से है या सीट्स से। इसलिए हम यह नियम भी दोबारा नहीं चाहते।

आरडब्ल्यूए की कुछ लापरवाहियां : आरडब्ल्यूए ने पिछले साल बहुत सी सेवाएं जैसे डिलीवरी की सुविधा, पार्क और खेल मैदान की सुविधा और अखबार वितरण की सुविधाओं पर रोग लगवा दी थी इसलिए इन सुविधाओं पर दुबारा से कोई रोक नहीं लगवाना चाहता।

जनता की बेइज्जती करना : भारतीय पुलिस ने भी लॉकडाउन या नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को खूब बेरहमी से पिटा है चाहे ऐसा करना उनकी मजबूरी ही क्यों न रही हो। हालांकि नियम तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए लेकिन वह भी एक सीमा में।

डिस इंफेक्शन का ड्रामा : कुछ जगहों में डिस इंफेक्शन के लिए सब कुछ बंद कर दिया जाता था। हालांकि यह डीस इंफेक्शन बिलकुल निरर्थक होती थी। आपको इससे ज्यादा मास्क और सेनिटाइजर की आवश्यकता पड़ती है।।

झूठी खबरों का तेजी से फैलना : जहां वायरस को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है वहां कुछ लोग वायरस को लेकर झूठी बातें और अंध विश्वास फैला रहे थे और बहुत से लोग तो इनका शिकार भी हुए हैं। इस कारण से बहुत से लोग सद बुद्धि से काम लेने की बजाए बहुत डरे हुए प्रतीत होने लगे।

नाइट कर्फ्यू या सप्ताह के अंत में लगने वाला कर्फ्यू : क्या यह वायरस केवल रात में या हफ्ते के अंत में ही फैलता है? क्या आप दो दिन घर में रुक कर इसका अंत कर सकते हैं? इनका जवाब है नहीं। तो नाइट कर्फ्यू और वीकेंड कर्फ्यू जैसी चीजें केवल लोगों की मुसीबतें बढ़ा रही हैं न कि कोई हल दे रही हैं।

चेक पॉइंट्स चार्ली : अगर कहीं बाहर जाते हैं या किसी अन्य शहर में भी जाते हैं तो आपका स्वागत तापमान नापने और सैनिटाइज करने से किया जाता है। हालांकि इनसे आपके वायरस से संक्रमित होने का पता नहीं चलता है और आप आराम से कहीं बाहर जा कर अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए यह सब भी किसी काम के नहीं।

एंटी मास्कर्स : एक राज्य के नेता ने अपने राज्य को वायरस मुक्त बता कर मास्क के प्रयोग को बंद करने के बारे में कहा। शायद उन्हें बचाव और इलाज के बीच अंतर का ही नहीं पता।

एंटी वेक्सर्स : बहुत से लोग वैक्सीन के प्रभाव पर शक कर उसे लगवाने से कतरा रहे हैं लेकिन यह हमें इस महामारी से मुक्त करवाने का एक जरिया है। इसके बिना यह वायरस लंबे समय तक चल सकता है।

अगर आप भी नहीं चाहते हैं कि आपको उपरलिखीत चीजों का फिर से सामना करना पड़े तो आपको मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग अवश्य करना चाहिए और अगर हो सके तो आपको वैक्सीन भी लगवानी चाहिए।

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