आपका पुराना साथी पीठ का दर्द लौट आया है। कह सकते हैं कि हारमोनों की वजह से ढीले पड़ गए लिगामेंट अभी तक ढीले हैं।उन्हें अपनी ताकत पाने में कई दिन या सप्ताह का समय लग सकता है। पेट की कमजोर मांसपेशियाँ भी आपकी पीठ पर अपना असर दिखा रही हैं। शिशु को उठाने, झुलाने या सुलाने के कारण भी पीठ में दर्द रहने लगता है। शिशु का आकार बढ़ रहा है और साथ ही पीठ पर दबाव और तनाव भी बढ़ता जा रहा है। वैसे समय के साथ-साथ आपकी पीठ के दर्द में काफी आराम आ जाएगा।

ये उपाय होंगे फायद्मंद-

1. पेट से जुड़े कुछ व्यायाम और पेल्विक टिल्ट करें ताकि पीठ को सहारा देने वाली मांसपेशियाँ मजबूत हो सकें।

2. सामान उठाते या झुकते समय पीठ का ध्यान रखें।

3. सारा दिन बिस्तर पर न पड़ी रहें। अपनी पीठ को तकिए का सहारा देकर टिकाएँ।

4. जब भी मौका मिले, पैरों को थोड़ा आराम दें। जब खड़ा होना हो तो पाँव छोटे स्टूल पर टिका लें।

5. अपने पोश्चर पर ध्यान दें। कंधे तने रहेंगे तो पीठ नहीं दुखेगी शिशु बड़ा हो जाए तो उसे उठाते समय एक ही नितंब पर सारा भार न डालें। इससे भी पीठ में दर्द होगा।

6. अक्सर मम्मियां बच्चे को एक हाथ से उठाए रखती हैं और दूसरे हाथ से काम करती हैं। आपको बीच-बीच में हाथ बदलना चाहिए।

7. यदि समय और मौका मिले तो पीठ की मांसपेशियों की मालिश करें अपने साथी की मदद लें।

8. शिशु को दूध पिलाते समय पीठ की सिंकाईं कर लें।

9. जब शिशु थोड़ा संभल जाएगा तो आपके शरीर की खोई ताकत भी लौट आएगी।