Summary: जानलेवा निपाह वायरस फिर एक्टिव, पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट घोषित
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट पर है और तीन जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग तेज कर दी गई है।
Nipah Virus: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो केस आने के बाद देशभर में एक बार फिर स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट मोड में आ गया है। दोनों संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत “बेहद गंभीर” बनी हुई है। दोनों मरीज हाल ही में निजी कार्य से पूर्वा बर्दवान जिले की यात्रा पर गए थे। इसके बाद वे अपने कार्यस्थल लौटे, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई। इसी वजह से उत्तर 24 परगना, पूर्वा बर्दवान और नदिया जिलों में बड़े पैमाने पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी गई है। उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है, जो किसी भी तरह इन दोनों मरीजों के संपर्क में आए थे।
निपाह वायरस अत्यंत खतरनाक और तेजी से फैलने वाली ज़ूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है, हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर निगरानी और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस का नाम मलेशिया के एक गांव कंपुंग सुंगाई निपाह से लिया गया है, जहां इसकी पहली बार पहचान 1998–99 में हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस एक ज़ूनोसिस है, यानी यह बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह वायरस हेनिपावायरस नामक जीनस से संबंधित है और पैरामाइक्सोविरिने उप-परिवार का हिस्सा है।
यह वायरस फल खाने वाले चमगादड़, जिन्हें फ्रूट बैट्स कहते हैं, से फैलता है। कई मामलों में सुअर से भी यह संक्रमण इंसानों तक पहुंच सकता है।
इन नंबरों पर कर सकते हैं कॉल
आम जनता की सहायता और जानकारी के लिए राज्य सरकार ने तीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं 03323330180, 9874708858 और 9836046212। इन नंबरों पर लोग लक्षण, जांच और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा, केंद्र सरकार की ओर से एक राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर संक्रमण को फैलने से रोकने, निगरानी बढ़ाने और इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने का काम कर रही है।
निपाह वायरस के लक्षण

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण आमतौर पर फ्लू जैसे होते हैं। इसमें बुखार, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ शामिल है।
हालांकि, गंभीर मामलों में यह वायरस दिमाग पर हमला कर सकता है, जिससे एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन हो जाती है। ऐसे मरीजों में भ्रम, दौरे, बेहोशी और सांस लेने में गंभीर समस्या देखी जाती है। कुछ मामलों में बीमारी देर से उभरती है, जिससे अचानक स्थिति बिगड़ सकती है। यह भी देखा गया है कि कुछ लोग बिना किसी लक्षण के भी संक्रमित रह सकते हैं और दूसरों में वायरस फैला सकते हैं।
कैसे होती है निपाह की जांच?
निपाह वायरस को बायो-सिक्योरिटी लेवल-4 (BSL-4) श्रेणी में रखा गया है, यानी इसकी जांच केवल अत्यधिक सुरक्षित प्रयोगशालाओं में ही की जा सकती है। डॉक्टर इसकी पुष्टि के लिए खून की जांच से एंटीबॉडी की पहचान करते इसके लिए हिस्टोपैथोलॉजी, पीसीआर (PCR) टेस्ट और वायरस आइसोलेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। अंतिम पुष्टि के लिए RT-PCR, ELISA और सीरम न्यूट्रलाइजेशन टेस्ट किए जाते हैं।
फिलहाल निपाह के लिए इंसानों या जानवरों के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीजों को पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर गहन चिकित्सा देखभाल दी जाती है। निपाह के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी, समय पर जांच और सख्त आइसोलेशन को ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार मानते हैं।
