कोविड से रिकवर होने के लिए ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल आप सभी के शब्दकोष में अब शामिल हो चुका है। एक्सपर्ट्स ने सुझाया है कि अब सभी को ऑक्सीमीटर जैसे यंत्र तो घर पर रखने ही चाहिए क्योंकि यह आपके लिए बहुत अधिक लाभदायक साबित हो सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आप किस प्रकार ऑक्सीमीटर का प्रयोग प्रभावशाली रूप से कर सकते है।

पल्स ऑक्सीमीटर की डिमांड लगातार बढ़ रही है

केमिस्ट की दुकान वालों का कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से पल्स ऑक्सीमीटर की बिक्री बहुत अधिक हो रही है। वह दिन के 150 ऑक्सीमीटर बेच रहे हैं। दुकानों पर हर दूसरे दिन ऑक्सीमीटर आउट ऑफ स्टॉक हो जातें हैं और लोग पहले से ही ऑर्डर भी देकर जा रहे है। यह यंत्र चलाने में भी आसान होता है और इसमें 6 महीने को गारंटी भी होती है। आपको केवल अपनी उंगली इस यंत्र के अंदर डालनी होती है और इसकी रीडिंग नोट करनी होती है। तो क्या आप देख रहे हैं कि ऑक्सीमीटर कितना काम का डिवाइस है। यह आज के समय सभी के घरों में होना आवश्यक है। अगर आपको लग रहा है कि आपके घर में किसी को कोविड के लक्षण हैं तो आप पहले ऑक्सीमीटर से उसका ऑक्सीजन लेवल जरूर चेक करें।

ऑक्सीमीटर की वैल्यू कैसे रीड करें?

ऑक्सीमीटर की एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति की रीडिंग 95 से 100 के बीच होती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर आपका लेवल इतना है तो आपकी ऑक्सीजन लेवल सामान्य है। डॉक्टरों के मुताबिक आपको पूरी 99 या 100 लेवल ऑक्सीजन होनी भी जरूरी नहीं है। अब 92 से 95 तक का लेवल भी बॉर्डर लाइन माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति का लेवल 92 से कम चला जाता है तो उसे अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ा सकता है

कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज आपके फेफड़ों की क्षमता बढ़ा सकती हैं और आपके रेस्पिरेटरी सिस्टम के लिए भी लाभदायक होती हैं और इससे आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ती है। आपको सुबह प्राणायाम जैसे भस्त्रिका, कपालभाति और नदी शुद्धि जैसे योगासन हर रोज 10 से 15 मिनट के लिए करने चाहिए। इन आसनों को आप खाली पेट सुबह के समय करेंगे तो अधिक लाभ मिलेगा, आप खाने के 3 घंटे बाद भी यह योग कर सकते हैं। सांस छोड़ने की प्रक्रिया को सांस लेने से अधिक रखें। अगर आपको पहले से ही कोई बीमारी है तो आपको कपालभाति जैसी एक्सरसाइज डॉक्टर की देखरेख में करनी चाहिए क्योंकि इनमें ब्रीदिंग  करते समय अधिक जोर लगाना पड़ता है।

कुछ योगासन जो आपका ब्रीदिंग लेवल बढ़ा सकते हैं

कपालभाति व भस्त्रिका: यह एक क्लीनिंग प्रैक्टिस है और इस आसन का हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह हमारे शरीर के अंदर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाती है और हमारे सभी ऑर्गन और टिश्यू को मजबूत बनाती है। हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाती है और भस्त्रिका हमारे फेफड़ों में जमे अतिरिक्त बलगम को निकालती है।

विभाग प्राणायाम: यह आसन हमारे फेफड़ों को हेल्दी बनाता है और इसमें हमारा अब्दोमन, थोरेसिक और क्लेविकुलर सेक्शन को शामिल करता है।

नदी शुद्धि: यह एक्सरसाइज आपके फेफड़ों को ठीक करती है और हमारे नर्वस सिस्टम, रेस्पिरेटरी सिस्टम और पाचन तंत्र को संतुलित करता है।

प्रोनिंग तकनीक: अगर आप लेट कर प्रोनिंग तकनीक और तीन बाल वाली मशीन का प्रयोग करते हैं तो उससे भी आपके फेफड़े मजबूत बनते हैं और आपके शरीर में ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ता है। इसलिए इन तकनीकों का और ब्रीदिंग एक्सरसाइज का प्रयोग भी जरूर करें।

पल्स ऑक्सीमीटर के प्रयोग

प्रोब पर रखना

  • यह चेक करने के लिए कि ऑक्सीमीटर सही से काम कर रहा है या नहीं, आपको प्रोब सीधे मरीज के ऊपर सही ढंग से रखना होगा।
  • अधिकतर ऑक्सीमीटर में उंगली द्वारा जांच होती है लेकिन कुछ ऑक्सीमीटर में कान के द्वारा भी जांच होती है।
  • प्रोब बड़े ही ध्यानपूर्वक डिजाइन किए गए है ताकि उनके अंदर से लाइट आ सके और दूसरी साइड से डिटेक्ट हो सके।
  • प्रोब बहुत ही नाजुक होते हैं इसलिए आपको उनका प्रयोग बड़े ही ध्यान से करना होगा।
  • यह प्रोब उंगली में बड़े ही ध्यान पूर्वक और सही ढंग से फिट किया गया है। याद रखें कि यह प्रोब  इस तरह उंगली में लगाया गया है कि वह न तो अधिक टाइट हो और न ही अधिक ढीला।
  • यह प्रोब सबसे लंबी उंगली में लगाया हुआ है और इसे सही ढंग से भी नहीं लगाया गया है। लंबी उंगली का प्रेशर अधिक होने के कारण प्रोब पर अधिक फोर्स लग रहा है जिस कारण वह टूट भी सकता है। इस तरह प्रोब लगाने पर सर्कुलेशन घटी हुई दिख सकती है और डिजिट भी कम दिख सकती हैं।

कान का प्रोब

कान के प्रोब को आपने इयर लोब पर लगा कर प्रयोग करना होता है। छोटे बच्चों में यह प्रोब मुंह के आंतरिक भाग से बाहरी भाग की ओर जाते हुए लगाया जाता है और इस दौरान प्रोब साफ भी रहता है। कई बार अगर आप इयर लॉब को हल्का हल्का मसलते भी हैं तो भी वह सर्कुलेशन को बढ़ी हुई दिखाता है।

किन वजहों के कारण पल्स ऑक्सीमीटर गलत रीडिंग दिखा सकता है?

  • ऐसे कुछ 5 कारण हैं जिनके कारण आपका पल्स ऑक्सीमीटर सही रीडिंग नहीं भी दिखा सकता है।
  • उंगली पर किसी प्रकार का पिगमेंट लगा होना।
  • प्रोब पर बहुत तेज लाइट होना।
  • मरीज की मूवमेंट होते रहना।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड प्वाइजनिंग होने के कारण।
  • अगर आपको ऑक्सीमीटर का प्रयोग करते समय यह सब चीजें दिखाई दे रही हैं तो आपकी रीडिंग बिलकुल सटीक आए यह संभव नहीं है।

नाखूनों पर नेल पॉलिश लगाना

आखिर नेल पेंट का ऑक्सीमीटर से क्या मतलब? आप भी यह सवाल सोच रहे होंगे। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नेल पेंट का रंग ऑक्सीमीटर के प्रोब पर ब्राइट प्रभाव डालता है जिस कारण वह सही रीडिंग नहीं दिखा पाता है। इसलिए आप जब भी ऑक्सीमीटर का प्रयोग करती हैं तो अपनी नेल पेंट को उतार लें।

मेहंदी लगने पर ऑक्सीमीटर गलत रीडिंग क्यों दिखाता है?

मेहंदी हाथों पर लगे होने पर ऑक्सीमीटर पल्स तो डिटेक्ट कर लेगा लेकिन वह एसपीओ 2 लेवल नहीं नाप पाएगा क्योंकि मेहंदी की पिगमेंटेशन सिग्नल को ब्लॉक कर देती है। इसलिए आपको कान या ऐसी उंगली पर जांच करनी चाहिए जिस पर मेहंदी न लगी हो।

द्रवनिवेशन

ऑक्सीमीटर को काम करने के लिए आपकी उंगलियों के बीच रक्त का प्रवाह चाहिए होता है। कुछ ऑक्सीमीटर ब्लड फ्लो को डिटेक्ट करने के बाद किसी प्रकार का संकेत दे देते हैं। इस तस्वीर में ऑक्सीमीटर का यह भाग ब्लड फ्लो डिटेक्ट करने की सूचना दे रहा है। कई बार इस पर नंबर भी होते हैं। जब किसी इंसान का ब्लड फ्लो बदलता है तो इसके द्वारा पता लगाया जा सकता है।

एनिस्थिशिया के दौरान एसपीओ 2 का नॉर्मल लेवल क्या होता है?

एसपीओ 2 का नॉर्मल लेवल 95 प्रतिशत या उससे ऊपर होता है। इसका अर्थ है अगर यह लेवल 95 से नीचे चला जाता है तो यह एक चिंता का विषय है।

निष्कर्ष 

अगर आपका ऑक्सीजन लेवल 95 में से 92 होता है तो आपको घर पर ही उपचार करवाना चाहिए। इस दौरान आप इन सभी एक्सरसाइज का प्रयोग कर सकते हैं। इस दौरान आप घर पर ही डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं। अगर आपका ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे चला जाता है तो आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए और उपयुक्त इलाज करवाना चाहिए।

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