Gas Problems in Kids: शिशुओं के खिलखिलाने से तो समझ आ जाता है कि वह खुश है, मगर रोने का कारण समझना ज़रा मुश्किल होता है, खासकर अगर वह रोना पेटदर्द या गैस के चलते हो तो। आइए जानें इसी से जुड़ी कुछ जानकारियां-
बच्चों को कई बार गैस इतनी अधिक होती है कि उनके लिए अत्यंत पीड़ा का कारण बन जाती है। डॉ. अनिल बत्रा कहते हैं कि बच्चों में अधिक गैस होने की वजह है, उनका ज्यादा हवा ग्रहण करना। यह तब होता है जब वो खाते, रोते या किसी चीज़ को चूसते हैं। इससे आंतों में अमाशय रस की उत्पत्ति करती है, जो आगे चलकर गैस का रूप लेती है। इसलिए अगर अब आपका शिशु जरूरत से ज्यादा रोए, बिना बात के चिल्लाए, फेट फूला हुआ या सख्त महसूस हो तो समझ लीजिए कि उसके पेट में गैस है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे तरीके जिसे अपनाकर आप अपने शिशु को इस दर्द से निजात दिला सकती हैं।
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गैस दर्द के कारण

जब बच्चों के पेट या आंतों में गैस बनने लगती है, तब उन्हें दर्द होने लगता है। इस दर्द के बहुत आम कारण होते हैं, जैसे- दूध पिलाने की गलत पोजीशन्स: जब भी आप बच्चे को अपना दूध पिला रही हों या बोतल से तो उसकी पोजीशन को ठीक रखें, क्योंकि अगर पोजीशन ठीक नहीं होगी तो आपके बच्चे के पेट में जरूरत से ज्यादा हवा जा सकती है, इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें।
ज्यादा खाना खिलाना : अगर एक बार में आप अपने बच्चे को बहुत ज्यादा खाना खिलाएंगे तो भी उसे गैस बन सकती है, इसलिए ऐसा ना करें। भूख लगने पर ही खाना खिलाएं।
बहुत लैक्टोस: यह तब होता है, जब बच्चा ऐसा बहुत ज्यादा दूध पी ले, जिसमें लैक्टोस की मात्रा बहुत अधिक होती है। इससे बच्चे को गैस बनती है।
फॉर्मूला फूड: जब बच्चा पाउडर वाला दूध पीता है तो उसके पेट में दूध के साथ हवा भी जाती है, क्योंकि पाउडर वाले दूध में हवा के कुछ बुलबुले होते हंैं जो बच्चे के पेट में आसानी से चले जाते हैं और गैस का रूप ले लेते हैं।
बहुत ज्यादा रोना: बच्चे भूख लगने पर रोते हैं लेकिन अगर बच्चा बहुत ज्यादा रोने लगे तो आपको समझ जाना चाहिए कि रोने की वजह से भी कुछ हवा उसके पेट में चली जाती है, जिससे पेट फूलता है और गैस बनती है।
इसके उपचार
फीडिंग पोजीशन देखें: फीड कराते समय एक तकिए की मदद से आप अपने बच्चे का सिर उसके पेट से ऊपर रखने की कोशिश करें। इस तरह दूध सीधा पेट में नीचे चला जाएगा। अगर आप बोतल से दूध पिला रही हैं तो उसमें हवा के बुलबुले नहीं होने चाहिए।
बच्चे को बर्प करवाएं: सबसे आसान तरीका होता है कि फीड करवाने के तुरन्त बाद ही अपने बच्चे पीठ थपथपा कर उसे बर्प (डकार दिलवाना) करवाएं।
थोड़ा व्यायाम: बहुत हल्के से अपने बच्चे की मसाज करें, उसको कमर के
बल लिटाकर पैडल करवाएं। कभी-कभी गर्म पानी से नहलाने से भी गैस से आराम मिलता है।
शुगर फ्री चीजें खिलाएं: अपने बच्चे के खाने को बदलने से उसे गैस में बहुत आराम मिलता है, खासकर अगर शुगर फ्री चीजें खिलाएं तो उससे उनके पेट में कम परेशानी होगी।
बकरी का दूध पिलाएं: आप चाहे तो अपने बच्चे को गाय के दूध की जगह बकरी का दूध भी पिला सकती हैं। बकरी का दूध उन लोगों के लिए भी अच्छा होता है, जो लैक्टोस इनटोलेरंट होते हैं।
खुद की डाइट भी बदलें: मां अपने बच्चे को अपना दूध पिलाती हैं तो वे अपनी खुद की डाइट भी बदल सकती हैं। उन्हें अपने भोजन में प्राकृतिक उत्पादों को अधिक शामिल करना चाहिए और गाय का निकला असली दूध ही पीना चाहिए।
पेट की मालिश
जब बच्चे के पेट में गैस बने तो आप उसकेपेट पर धीरे-धीरे हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा करने से पेट में बनी गैस बाहर आ जाएगी।
समय से खाना खिलाएं
खाली पेट से भी गैस बनती है, इसलिए बच्चे को समय से पहले खाना खिलाएं, साथ ही उसको दिन में कितनी बार फीड करानी है इस बात का भी ध्यान रखें। साथ ही बच्चे के रोते ही तुरंत दूध ना पिलाएं।
(डॉक्टर अनिल बत्रा, चाइल्ड स्पेशलिस्ट, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, फरीदाबाद से बातचीत पर आधारित)
ये भी करें

1 बच्चे को दिन में कम से कम आधा घंटे उल्टा लिटाना चाहिए।
2 बच्चे को हमेशा ताजे दूध का सेवन कराना चाहिए। ठंडे व कच्चे दूध का सेवन नुकसानदायक होता है।
3 बच्चे की दूध की बोतल को अच्छे से साफ करें ताकि उसमें बैक्टीरिया ना पनपने पाए।
4 कभी भी बच्चे को जबरदस्ती खाना ना खिलाएं और ना ही दूध पिलाएं। ऐसा करने से बच्चा उल्टी कर सकता है।
5 बच्चे को हल्का गुनगुना पानी भी पिलाते रहें ताकि उसे गैस की परेशानी ना हो।
