(1) पेट की बिमारियों में-उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन।
(2)सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन।
(3)मधुमेह-पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन।
(4)वीर्यदोष- सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा।
(5)गला-सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन।
(6)आंखें-सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन।
(7)गठिया-पवनमुक्तासन, पद्ïमासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्टï्रासन।
(8) नाभि-धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन।
(9)गर्भाशय-उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन।
(10) कमर-हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन।
(11)फेफड़े-वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन।
(12) यकृत-लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन।
(13)गुदा, बवासीर, भंगदर आदि में-उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन, चन्द्रनमस्कारासन।
(14)दमा-सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन।
(15)अनिद्रा-शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रासन।
(16)गैस-पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन।
(17)जुकाम-सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन।
(18)मानसिक शांति के लिए-सिद्धासन, योगासन, शतुरमुर्गासन, खगासन योगमुद्रासन।
(19)रीढ़ की हड्डी के लिए-सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, शतुरमुर्गासन करें।
(20)गठिया के लिए– पवनमुक्तासन, साइकिल संचालन, ताड़ासन किया करें।
(21)गुर्दे की बीमारी में-सर्वांगासन, हलासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन करें।
(22)गले के लिए– सर्पासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा करें।
(23)हृदय रोग के लिए-शवासन, साइकिल संचालन, सिद्धासन किया करें।
(24)दमा के लिए-सुप्तवज्रासन, सर्पासन, सर्वांगासन, पवनमुक्तासन, उष्टï्रासन करें।
(25)रक्तचाप के लिए-योगमुद्रासन, सिद्धासन, शवासन, शक्तिसंचालन क्रिया करें।
(26)सिर दर्द के लिए-सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, शतुरमुर्गासन करें।
(27)पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए-यानासन, नाभि आसन, सर्वांगासन, वज्रासन करें।
(28)मधुमेह के लिए-मत्स्यासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, हलासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन करें।
(29)मोटापा घटाने के लिए-पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, नाभि आसन करें।
(30)आंखों के लिए-सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
(31) बालों के लिए-सर्वांगासन, सर्पासन, शतुरमुर्गासन, वज्रासन करें।
(32). प्लीहा के लिए– सर्वांगासन, हलासन, नाभि आसन, करें।
(33)कमर के लिए-सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रासन करें।
(34)कद बड़ा करने के लिए-ताड़ासन, शक्ति संचालन, धनुरासन, चक्रासन, नाभि आसन करें।
(35)कानों के लिए-सर्वांगासन, सर्पासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
(36)नींद के लिए-सर्वांगासन, सर्पासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, नाभि आसन करें।
विशेष- प्रत्येक आसन खुली हवा में सुन्दर और सुहावने स्थान पर नियमित किया करें।
कैसी हो योगी की दिनचर्या?
यूं तो प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या का निर्धारण स्वयं करता है तथा उसकी दिनचर्या उसकी जरूरतों तथा प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है लेकिन अगर आप योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहते हैं तथा निरोगी जीवन जीना चाहते हैं तो निम्नलिखित दिनचर्या को अपना सकते हैं-
प्रात: 4 से 5 बजे- ब्रह्म मुहूर्त (उषा काल) में उठना, प्रभुस्मरण।
प्रात: 5 से 6 बजे- शौच, दन्तधावन, स्नान आदि।
प्रात: 6 से 7 बजे- आसन, प्राणायाम, संध्या।
प्रात: 7 से 8 बजे- हवन, स्वाध्याय, प्रातराश।
प्रात: 8 से 9 बजे- पारिवारिक कार्य।
प्रात: 9 से 10 बजे- भोजन।
प्रात: 10 से सांय 5 बजे तक- अपना व्यावसायिक कार्य।
सांय 5 से 6 बजे- पारिवारिक कार्य।
सांय 6 से 7 बजे- शौच, आसन, संध्या हवन।
सांय 7 से 8 बजे- भ्रमण, स्वाध्याय।
सांय 8 से 9 बजे- भोजन।
सांय 9 से 10 बजे- संगीत, व्याख्यान, सत्संग, स्वाध्याय आदि
इच्छानुसार परोपकार के सामाजिक कार्य। दिन भर के अच्छे व बुरे कार्यों का चिन्तन करें।
उसके पश्चात तमाम विचारों, चिंताओं को अपने दिमाग से निकाल कर, निश्चिंत हो कर प्रभु का स्मरण करके आराम करें।
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