पिछले कुछ वर्षों में डाइबिटीज़ एक ऐसी समस्या के रूप में सामने आया है जो बहुत ही व्यापक स्तर पर फैल रही है। यह एक ऐसी बीमारी है जो एक बार हो गयी तो मरते दम तक पीछा नहीं छोड़ती। इसलिए इस बीमारी को धीमी मौत भी कहा जाता है। डाइबिटीज़ का नाम सुनते ही हर किसी व्यक्ति का अपना रिएक्शन होता है। ज़्यादातर हम लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि ज्यादा मिठाई मत खाओ या चीनी मत खाओ, वरना डाइबिटीज़ हो जाएगी। लेकिन क्या सचमुच ऐसा होता है या यह सिर्फ एक मिथ है। क्या वाकई मीठा खाने से डाइबिटीज़ हो जाती है? आइये जानते हैं कि डाइबिटीज़ होने की असली वजह क्या है।
कैसे होती है डाइबिटीज़
डाइबिटीज़ एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है, जिसका संबंध शरीर के मेटाबोलिज्म में गड़बड़ी से होता है। डाइबिटीज़ दो प्रकार की होती हैं टाइप-1 और टाइप-2 डाइबिटीज़। टाइप-1 डाइबिटीज़ में पेंक्रियाज़ से निकलने वाला इंसुलिन हार्मोन बनना बंद हो जाता है। टाइप -2 डाइबिटीज़ में कम मात्रा में इंसुलिन बनता है। टाइप- 2 डाइबिटीज़ के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा पायी जाती है। इंसुलिन की मात्रा कम निकलने से शरीर में ब्लड शुगर का लेबल बढ़ जाता है।
डाइबिटीज़ होने के ये भी हैं कारण
वैसे तो डाइबिटीज़ शरीर की मेटाबोलिज़्म प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण होता है। लेकिन अनियमित जीवन शैली, हैवी और जंक फूड का ज्यादा सेवन, पर्याप्त नींद न लेना, अधिक प्रैशर के कारण होने वाला तनाव या स्ट्रैस और मोटापा डाइबिटीज़ होने की संभावना को और भी ज्यादा बढ़ा देता है। इसके अलावा हैरेडिटी या आनुवंशिकता भी डाइबिटीज़ के खतरे की एक वजह होती है।
क्या वास्तव में मीठा खाने और डाइबिटीज़ में कोई संबंध है
डाइबिटीज़ को लेकर लगभग हम सभी के मन में यह बैठा हुआ है कि ज्यादा मीठा खाने से डाइबिटीज़ हो जाती है। लेकिन यह सच नहीं है यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति चीनी या मीठी चीजें खाता है तो उसको इससे कभी भी डाइबिटीज़ की समस्या नहीं होती। लेकिन जो लोग ओवरवेट या मोटापे का सामना कर रहे हैं या जिनके परिवार में डाइबिटीज़ की हिस्ट्री है उन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। वास्तव में होता यह है कि हाई कैलोरी और फैट से भरपूर चीजें खाने से वजन बढ़ता है और यदि व्यक्ति अनियमित जीवनशैली जीता है, तो यह बढ़ा हुआ वजन डाइबिटीज़ का खतरा उत्पन्न कर देता है।
हालांकि यह बात सही है कि डॉक्टर डाइबिटीज़ के मरीजों को मीठा न खाने की सलाह देते हैं। क्योंकि मीठा खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है जिससे डाइबिटीज़ की समस्या बढ़ सकती है। लेकिन मीठा खाना डाइबिटीज़ होने की वजह नहीं हो सकती। यदि आप डाइबिटीज़ से पीड़ित हैं तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप चीनी और मीठा खाना पूरी तरह से बंद कर दें। यदि आप संतुलित मात्रा में इसे अपने भोजन में सम्मलित करते हैं तो यह कोई समस्या पैदा नहीं करती। फलों और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से मिठास पायी जाती है लेकिन यह कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
