9 super seeds se apni diet ko banaye sehatmand
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Super Seeds for Diet: अपने किचन में हम अक्सर कई तरह के सीड्स यानी बीजों का उपयोग करते हैं, फिर भी अक्सर इनके फायदों से अनजान ही रह जाते हैं। आइए जानें कुछ इसी बारे में-

हम लोग अपनी डाइट में कुछ सुपर सीड्स का उपयोग करते हैं लेकिन हममें से बहुत कम इनके महत्व
को जानते हैं। सुपर सीड्स दिखने में तो छोटे से हैं लेकिन इनमें पोषण भरपूर होता है। इनमें प्रोटीन, मोनो अनसेचुरेटेड और पॉली अनसेचुरेटेड फैट, इसेनशियल अमीनो एसिड, मिनरल्स जैसे जिंक, कैल्शियम,
कापर, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाये जाते हैं, जो वेजिटेरियन डाइट में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सुपर सीड्स को यदि स्वास्थ्य का खजाना कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आइये जानते हैं
सुपर सीड्स के बारे में जिनको अपनी डाइट में शामिल करके आप रह सकते हैं हेल्दी।

चिया सीड्स वास्तव में तुलसी के बीज होते हैं। इसमें प्रोटीन, फैट्स, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट्स तथा ओमेगा-3 जैसे उपयोगी पोषक तत्व पाये जाते हैं। सिर्फ 100 ग्राम चिया सीड्स में बहुत ही महत्वपूर्ण पोषक तत्व जैसे आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी, मैग्नीशियम, जिंक, फॉस्फोरस आदि होते हैं। मेडिकल एक्स्पर्ट्स की मानें तो
अगर हम अपनी डाइट में रोज इनकी थोड़ी मात्रा भी शामिल करें तो यह मेटाबॉलिक को सही करता है साथ ही
इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है। इन बीजों में पानी को अवशोषित करने की क्षमता होती है जिससे ये पेट में फूलते हैं इस कारण ये भूख के अहसास को कम करते हैं, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसके साथ ही ये ब्लड शुगर तथा कोलेस्टेरोल को भी नियंत्रित करते हैं। इन बीजों को सूप, दूध में या सलाद और हैल्थ
ड्रिंक्स में ड्रेसिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन्हें फ्लेक्स सीड्स भी कहा जाता है। इसमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी ऐसिड तथा एंटी ऑक्सीडेंट्स की अधिकता होती है। ये महिलाओं के लिए खासतौर से मीनोपॉज के समय होने वाली समस्याओं के लिए बहुत लाभदायक है। मैरीलैंड मेडिकल सेंटर की यूनिवर्सिटी के अनुसार यदि एक चम्मच अलसी के बीज के पाउडर का सेवन रोज 2-3 बार किया जाए तो मिनोपॉज के लक्षणों जैसे- हॉट फ्लाशेस, मूड में उतार-चढ़ाव और योनि के सूखेपन को कम किया जा सकता है।

साथ ही यह मासिक धर्म को नियमित करने तथा प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका सेवन ब्लड प्रैशर, कोलेस्ट्रॉल तथा कैंसर का खतरा भी कम करता है। प्रतिदिन 100 मिलीग्राम अलसी का सेवन रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3, फाइबर तथा वजन कम करने में भी मदद करते हैं। इसके साथ ही यह डायबिटीज़ के खतरे को भी कम करता है। पिसी हुई अलसी के बीज को अपने सूप-सलाद, सब्जी, दही और जूस में छिड़ककर सेवन कर सकते हैं।

हिममें से अधिकतर लोग अपनी डाइट में इस्तेमाल करते हैं खासकर सर्दियों के समय। सर्दियों में तिल का सेवन बहुत फायदेमंद है, इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है तथा इसके तेल की मालिश से सर्दी से भी बचाव होता है और शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है। ये आयरन और कैल्शियम के बेमिसाल स्रोत माने जाते हैं। तिल फाइबर से भरपूर होते हैं इसलिए ये पाचन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं साथ ही कब्ज दूर करता है और बड़ी आंत से संबंधित बीमारियों को कम करने में सहायता करता है। तिल का रोजाना उपयोग दांतों और हड्डियों को भी मजबूत करता है। यह ऑर्थराइटिस के मरीजों के लिए बहुत उपयोगी है। जोड़ों में तिल के तेल से मालिश सूजन तथा दर्द को कम करता है। यह चिंता, तनाव तथा डिप्रेशन को कम करता है। काले तिल का सेवन लिवर के उपयुक्त है साथ ही ये आंखों को भी स्वस्थ रखते हैं।

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इसे इंग्लिश में पोपी सीड्स तथा कई लोग पोस्ता दाने के नाम से भी जानते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइटोकैमिकल्स, ओमेगा-6 फैटी एसिड, विटामिन बी, कैल्शियम, मैगनीज और थाइमीन जैसे पोषक तत्व पाये जाते हैं। जो शरीर के सम्पूर्ण पोषण के लिए जरूरी है। रात में सोने से पहले एक गिलास खसखस का दूध पीने से नींद न आने की समस्या दूर होती है। इसमें दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं। दर्द वाले स्थान पर इसके तेल मालिश दर्द को दूर करता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स की अधिकता होती है, जिससे ये मानसिक तनाव को कम करके त्वचा को
हमेशा जवान रखता है। इसका सेवन कैल्शियम और विटामिन डी की कमी को पूरा करता है। खासकर महिलाओं में 40 वर्ष के बाद कैल्शियम की कमी होने लगती है खसखस का सेवन शरीर में इसकी आपूर्ति करता है। खसखस को मिठाइयों में तथा ड्राई फ्रूट्स के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

ये सीड्स हमारे किचन में बहुत इस्तेमाल होते हैं। इन्हें सामान्य भाषा में सरसों या राई कहा जाता है। भोजन में मैग्नीशियम की कमी माइग्रेन का मुख्य कारण है। सरसों में इसकी अधिकता होती है इसलिए यह माइग्रेन के इलाज में उपयोगी है। सरसों का तेल बालों के गिरने की समस्या को दूर करता है तथा उन्हें मजबूती देता है। ये
विटामिन बी कॉम्ह्रश्वलेक्स से भरपूर होते हैं, जो शरीर के नर्वस सिस्टम को अच्छे से चलाने के लिए बेहद उपयोगी होता है। यह ऑर्थराइटिस के इलाज में सहायक है। सरसों के तेल का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर
को कम करता है।

इनमें विटामिन ई तथा अन्य खनिज पदार्थों की प्रचुरता होती है। नेशनल सनफ्लावर एसोसिएशन के अनुसार एक औंस सूरजमुखी के बीज से 76 फीसदी विटामिन ई की जरूरत पूरी हो जाती है। कई शोध इस ओर इशारा करते हैं कि यदि व्यक्ति विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में सेवन करे तो उसे हृदय रोगों का खतरा कम रहता है।
यह रक्त नलिकाओं में कोलेस्ट्रॉल को जमने नहीं देता, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा दूर होता है। इसमें फाइबर की भी अधिकता होती है, जो कब्ज को दूर करने में मदद करता है। इनमें एंटी ऑक्सीडेंट्स की भी अधिकता होती है जो पेट, प्रोस्टेट तथा ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम दिमाग
की नसों को शांत रखता है तथा स्ट्रैस और माइग्रेन को दूर करता है।

इसे भांग के बीज कहा जाता है। हममें से अधिकतर लोग भांग को नशे में रूप में इस्तेमाल होने से जानते हैं। परंतु इसमें बहुत से पोषक तत्व पाये जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए उपयोगी हैं। इसमें फैटी एसिडस, प्रोटीन, विटामिन ई के साथ फास्फोरस, सोडियम, कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे खनिज पदार्थ पाये हैं। कई शोधों के अनुसार इन बीजों में अमीनो एसिड की मात्रा काफी अधिक होती है इसलिए यह हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करती है। एक्जीमा जैसे त्वचा संबंधी रोगों में भांग का तेल बहुत राहत पहुंचाता है। ये फैटी एसिड्स
से भरपूर होते हैं, जो अनहैल्दी फैटस को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। महिलाओं में मिनोपॉज के समय होने वाली तकलीफों जैसे- ब्रेस्ट टेंडरनेस, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन को कम करता है।

कद्दू के बीज पौष्टिक तत्वों का भंडार हैं। इनके बीज विटामिन बी के अच्छे स्रोत होने के साथ- साथ आयरन, प्रोटीन, जिंक और मैग्नीशियम के भंडार होते हैं। अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए कद्दू के बीज बहुत उपयोगी हैं। इनके बीज मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है, जो हार्ट के उपचार में मदद करता है। ये शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है इसलिए डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद हैं। इन बीजों का सेवन शरीर में रक्त और ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-इन्फेलेमेटरी गुण पाये जाते हैं। ये शरीर में कोलेस्टेरोल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं।

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इसे इंग्लिश में स्माल फनेल, कलाजाजी, निगेल्ला सीड कहते हैं। इसका प्रयोग हमारी किचन में मसाले के रूप में किया जाता है। इसे विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नॉन, केक और अचार आदि में उपयोग किया जाता है। इसमें वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होते हैं साथ ही कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, जिंक और मैग्निशियम जैसे खनिज तत्व पाये जाते हैं।
इनमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो कैंसर से बचाव करते हैं। इसको खाने से पेट साफ रहता है तथा हाजमा दुरुस्त रहता है। यह दिमाग को तेज करती है तथा स्मरण शक्ति को बढ़ाती है। इसका
तेल ब्युटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होता है। जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द में इसके तेल की मालिश से आराम मिलता है।
सुपर सीड्स को सुपर इसीलिए कहा जाता है क्योंकि ये देखने में तो छोटे से होते हैं लेकिन बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर रहते हैं। यदि हम इन्हें अपने दैनिक खानपान में उचित स्थान दें तो हम इनके लाभों को
प्राप्त कर सकते हैं।