महिलाओं तथा युवा लड़कियों को मासिक धर्म के चलते कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है जैसे- पीरियड्स के समय होने वाला दर्द, पीरियड्स में अनियमितता, ब्लड का कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम बहाव। इन सब परेशानियों को दूर करने के लिए योग में एक बहुत ही आसान लेकिन बहुत ज्यादा प्रभावशाली आसन है- तितली आसन। जिसे बटरफ्लाई पोज भी कहा जाता है। इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस आसन को करते वक्त हम अपनी टांगें इस तरह हिलाते हैं मानो तितली अपने पंख फड़फड़ा रही हो। आइये जानते हैं इस आसन को कैसे करें : –
- इस आसन को करने के लिए कमर- गर्दन सीधी रखते हुए पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएँ। फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए ऐसे रखें कि दोनों पैरों के तलवे आपस में जुड़ जाएँ।
- दोनों हाथों से अपने दोनों पैरों को कसकर पकड़ लें और एडी को अपने शरीर के जितना नजदीक हो सके लाने का प्रयास करें। लेकिन हाँ यह करते वक्त ध्यान रखें कि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।
- श्वास सामान्य रूप से लेते रहें और अपने पैरों को तितली के पंखों के समान ऊपर -नीचे करें, धीरे- धीरे गति बढ़ाते जाएँ। जितना संभव हो उतनी तेज इस प्रक्रिया को करें। ध्यान रखें जितना आसानी से आप इस प्रक्रिया को कर सकते हैं करें, झटका बिल्कुल न दें।
- शुरुआत में इस प्रक्रिया को 50 बार करें फिर धीरे- धीरे बढ़ाकर 100 तक या अपनी क्षमतानुसार करें।

महिलायें क्यों करें यह आसन
- इस आसन को नियमित रूप से करने से पीरियड्स के समय होने वाले दर्द में राहत मिलती है। साथ ही जिन लोगों के पीरियड्स नियमित नहीं हैं उसमें रेगुलेरिटी आती है।
- गर्भवती महिलायें यदि इस अभ्यास को रोजाना करती हैं तो डिलिवरी के समय होने वाली पीड़ा में काफी हद तक कमी आती है और प्रसव में आसानी होती है। यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है कि गर्भवती महिलाएं इस अभ्यास को अपने चिकित्सक की परामर्श से ही किसी प्रशिक्षित योगा चिकित्सक की देखरेख में करें।
- इस आसन को करने से जांघों के अंदरूनी हिस्से पर इस आसन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है इस कारण जांघों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। साथ ही जांघ के अंदरूनी हिस्से में जमा फैट भी कम होता है।
- ज्यादा समय तक खड़े रहने और चलने के कारण होने वाली पैरों को थकान को यह आसन बड़े ही चमत्कारिक ढंग से दूर करता है।
- इस आसन से पैरों में खून का बहाव ठीक रहता है। गठिया और जोड़ों के दर्द में इस आसन को करने से आराम मिलता है।
कब न करें
- जिन लोगों को साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहता हो वे इस अभ्यास को न करें।
- यदि घुटने में किसी प्रकार का दर्द या चोट हो वे यह आसन न करें। जिनकी घुटनों की किसी तरह की कोई सर्जरी हुई हो वे भी इस अभ्यास को न करें।
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