Pediatric Oncology : बच्चों में कैंसर रोग पीडियाट्रिक आबादी के बीच रोग संबंधी मौतों का प्रमुख कारण है। ध्यान देने की बात है कि बच्चों में कैंसर रोग वयस्कों में कैंसर के मामलों से काफी अलग होता है। इसलिए, शुरुआत में ही डायग्नोसिस तथा समय पर ऑंकोलॉजिस्ट द्वारा जांच काफी महत्वपूर्ण होती है। दुनियाभर हर साल, बच्चों में कैंसर के लगभग 400,000 नए मामले सामने आते हैं।
डॉ कविता विजयकुमार, एवीपी एंड लैब ऑपरेशंस, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के मुताबिक , बच्चों में कैंसर रोग वयस्कों को प्रभावित करने वाले कैंसर से अलग होता है क्योंकि जोखिम कारक जैसे तंबाकू, शराब का सेवन, मोटापा और संक्रमण वयस्कों में कैंसर पैदा कर सकते हैं। बच्चों में कैंसर का कारण आनुवांशिक या खराब एटियोलॉजी होता है। चूंकि इन कैंसर रोगों से कोई रिस्क फैक्टर नहीं जुड़े हैं, इसलिए इनकी रोकथाम के भी कोई प्राथमकि उपाय नहीं होते हैं। परिणामस्वरूप, शीघ्र निदान के तौर पर सेकंडरी बचाव की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बच्चों में सबसे प्रमुख कैंसर रोगों में ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), सेंट्रल नर्वस सिस्टम कैंसर (ब्रेन ट्यूमर) और लिंफोमा शामिल हैं। इसके उलट, 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की तुलना में अधिक उम्र के बच्चों में एपिथेलियल तथा जर्म सेल ट्यूमर ज्यादा देखे गए हैं।
पीडियाट्रिक कैंसर रोग अधिक ‘बायोलॉजिकली एक्टिव’ होते हैं और यही कारण है कि डायग्नोसिस के समय ये एडवांस स्टेज में और अधिक आक्रामक प्रकृति के भी होते हैं। जहां एक ओर वयस्कों के कैंसर स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं में सामने आते हैं वहीं बच्चों को प्रभावित करने वाले कैंसर रोगों को स्क्रीन करना संभव नहीं होता क्योंकि इन रोगों के प्राकृतिक कारणों के बारे में कम जानकारी उपलब्ध है।
बच्चों के कैंसर के डायग्नॉसिस में प्रायः स्थानीय लक्षणों के अभाव के चलते मुश्किलें बढ़ती हैं। इन रोगों में, आमतौर से बुखार, उल्टी, भूख न लगना, वज़न न बढ़ना, लिंफ नोड्स बढ़ना और हड्डियों में दर्द की शिकायत प्रमुख है। बच्चों के कैंसर के डायग्नॉसिस के लिए क्लीनिकल स्तर पर अधिक संदेह प्रमुख महत्वपूर्ण होता है। लेकिन यह डायग्नॉसिस काफी हद तक देरी से हो पाता है क्योंकि अक्सर उपरोक्त लक्षण सामान्य शारीरिक विकास में देरी या बचपन के अन्य रोगों से भी जुड़े हो सकते हैं।
यदि लंबे समय तक बुखार बना रहे या कम समय में ही शारीरिक वज़न से 10प्रतिशत से अधिक वज़न कम हो जाए तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बच्चे की मैलिग्नेंसी के लिए जांच होनी चाहिए। ऐसे मामलों में, लेबोरेट्री और रेडियोलॉजी जांच से शुरुआत में ही डायग्नॉसिस तथा पिडियाट्रिक ओंकोलॉजिस्ट से परामर्श करना महत्वपूर्ण होता है।
चूंकि बच्चों में कैंसर प्रायः एडवांस स्टेज में ही सामने आता है, शुरुआती डायग्नॉसिस होने पर अधिक गहन उपचार, स्वास्थ्य लाभ की बेहतर संभावना और जीवनकाल बढ़ाने में मदद मिलती है। बेहतर उपचार दरों के लिए, बेहतर डायग्नॉस्टिक सेटअप और एडवांस टार्गेटेड थेरेपी उपलब्ध कराने वाले उपचार केंद्रों तक सुगमत पहुंच भी जरूरी है।
यदि आनुवंशिक कैंसर रोगों की फैमिली हिस्ट्री हो, तो जहां तक संभव हो मॉलिक्यूलर अध्ययनों की मदद से स्क्रीनिंग की जानी चाहिए जिनसे आनुवंशिक कैंसर रोगों के शीघ्र डायग्नोसिस में मदद मिलती है।
