Babugosha Benefits: बारिश के मौसम में नाशपाती की तरह दिखने वाला बब्बूगोशा स्वाद में हल्का मीठा और फाइबर से भरपूर रेशेदार नरम और रसेदार फल है। एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनॉयड और हाइपो-एलर्जेनिक औषधीय गुणों के कारण बब्बूगोशा को सुपर फ्रूट सेब के समकक्ष माना गया है। हमारे शरीर के लिए जरूरी सभी प्राकृतिक विटामिन्स, खनिज और एंजाइम इसे हमारी सेहत का खजाना बना देते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि नियमित तौर पर रोजाना बब्बूगोशे का सेवन हमारे शरीर को अनेक रोगों से भी बचाता है।
इम्यूनिटी बढ़ाए

बब्बूगोशे में मौजूद विटामिन सी और तांबा जैसे एंटीऑक्सीडेंट गुण पर्याप्त मात्रा में मिलते है जो आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। विटामिन सी सामान्य चयापचय और ऊतकों के मरम्मत में मदद करता है। हमारे शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कण से होने वाले संक्रामक रोगों के खिलाफ रक्षा में मदद करता है।
कोलेस्ट्राल के स्तर को करे नियंत्रित
बब्बूगोशा में मौजूद पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर रक्त कोलेस्ट्रॉल और सेलुलोज के स्तर को नियंत्रित करता है। कम कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग को रोकने में मदद करता है। नियमित रूप से फाइबरयुक्त बब्बूगोशे का ग्लूटाथिओन तत्व उच्च रक्तचाप और हार्ट स्ट्रोक का खतरा 50 प्रतिशत कम करने में मदद करते हैं।
कैंसर की रोकथाम

बब्बूगोशा में हाइड्रोऑक्सीनामिक एसिड, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण कैंसर के नुकसान से कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। इसका फाइबर पेट के कैंसर को बढ़ने से रोकता है और बड़ी आंत के स्वास्थ्य को बनाए रखता है। अध्ययनों से पता चला है कि बब्बूगोशो के नियमित सेवन से मोनोपोज के बाद महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
डायबिटीज को करे कंट्रोल
फाइबर से भरपूर बब्बूगोश टाइप-2 के मधुमेह रोगियों के लिए स्मार्ट नाश्ता माना जाता है। इसकी कम मिठास से उन्हें संतुष्टि का अहसास होता है। इसमें मौजूद लोवा ग्लीसरीन सूचकांक और फाइबर शर्करा को खून में अवशोषित होने से रोकता है और मधुमेह के स्तर को नियंत्रित रखता है।
पाचन तंत्र को बनाए मजबूत

फाइबर में समृद्ध बब्बूगोशा एक स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए आवश्यक है। इसमें मौजूद अघुलनशील फाइबर बड़ी आंत के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। यह कब्ज को दूर कर विशाक्त पदार्थों के उत्सर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें मौजूद पेक्टिन मूत्रवर्धक है। यह पाचन तंत्र में वसायुक्त पदार्थ को बांधता है और उनके उन्मूलन को बढ़ावा देता है। इसमें मौजूद पोटेशियम मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका संचरण, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के चयापचय पाचन में मदद करता है। नियमित रूप से बब्बूगोशा का जूस पीने से आंतों में हुई गड़बड़ी को नियंत्रित किया जा सकता है।
कब्ज रोकने में सहायक
बब्बूगोशा फाइबर कब्ज रोकने में मदद करता है और नियमितता सुनिश्चित करता है। इसमें मौजूद सोरबिटोल अतिरिक्त फाइबर कब्ज से पीड़ित व्यक्ति के लिए आदर्श है। यह पाचन प्रणाली को नियमित करने में मदद करता है और कब्ज, दस्त जैसे पेट के विकारों को रोकता है।
ऊर्जा स्तरमें बढ़ोतरी

बब्बूगोशा प्राकृतिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत हैै। इसमें बड़े पैमाने पर ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। बब्बूगोशा खाने से शरीर का ग्लूकोज उर्जा में बहुत जल्दी बदल जाता है। जब आप स्वयं को थका महसूस करें या लगे कि आपके अंदर उर्जा का स्तर कम हो रहा है, तो बब्बूगोशा खाना फायदेमंद होगा।
ऑस्टियोपोरोसिस की करें रोकथाम
इसमें बड़ी मात्रा में तांबा, बोरान होता है जो हमारे शरीर में कैल्शियम के स्तर को बनाए रखता है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना कम होती है। हड्डियों को स्वस्थ रखने और उनकी कमजोरी दूर करने में मदद करता है।
पित्ताशय संबंधी समस्याओं में आराम

नियमित तौर पर बब्बूगोशा के सेवन से पित्ताशय संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण गठिया के इलाज के लिए आदर्श है। जोड़ों में होने वाली सूजन और दर्द में राहत पहुंचाता है।
शिशुओं के लिए सर्वोत्तम आहार
बब्बूगोशा एक हाइपो-एलर्जेनिक फल है और इसमें एसिड की मात्रा बहुत कम होती है जिससे यह आसानी से पच जाता है। शिशुओं के लिए सुरक्षित है। जब बच्चे खाना शुरू करते हैं, तब कई डॉक्टर उन्हें बब्बूगोशा खिलाने की सलाह देते हैं।
खांसी और कफ से छुटकारा

गर्मियों के मौसम में बच्चों को खांसी हो जाती है और फेफड़ों मे कफ जम जाता है जिससे उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होती है। बब्बूगोशा का ताजा जूस दिन में दो बार पीने से कफ कम करने में मदद मिलती है। जूस का नियमित सेवन करने से गले की खराश और बच्चों के गले में होने वाले टॉनसिस को आराम मिलता है।
त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद
हमारी त्वचा में कोलेजन प्रोटीन की क्षति होने से बचाने में फाइबर से भरपूर बब्बूगोशा मददगार है। यह हमारी त्वचा और बालों को मॉइश्चराइज करके प्राकृतिक नमी को बनाए रखता है। बब्बूगोशे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज हमारी त्वचा टोन कर झुर्रियों जैसे बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करते हैं। तेलीय त्वचा पर शहद के साथ बब्बूगोशे का पेस्ट मिलाकर लगाना फायदेमंद है।
खाते समय बरतें कुछ सावधानियां

बब्बूगोशा को अच्छी तरह धो कर छिलके समेत चबा-चबाकर खाना चाहिए। विटामिन और खनिज ज्यादातर बब्बूगोशा के छिलके में होते हैं इसलिए बिना छीले खाना फायदेमंद है। जल्दबाजी में बिना चबाए निगलने पर पाचन तंत्र पर दवाब पड़ता है जिससे कई बार पेट दर्द की शिकायत हो जाती है।
देर से काटकर रखा बब्बूगोशा नहीं खानी चाहिए। इससे बब्बूगोशा में मौजूद लोह ऑक्साइड से लोहा फैरिक ऑक्साइट के रूप में बदल जाता है। हवा के संपर्क में आने से यह ब्राउन रंग में बदल जाता है जिसे खाना नुकसानदायक होता है।
(डॉ रचना कटारिया, आहार विशेषज्ञ, डाइट क्लीनिक, दिल्ली)
